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लॉक डॉउन में कुछ सेक्टर को छूट पर कई गलतियां

  • अधूरे फैसले से कारोबार में आ रही अड़चनें

  • आधा अधूरा फैसला से हो रही है परेशानी

  • मजदूर आये तो सीमेंट आदि की दुकानें बंद

  • परिवहन चालू तो मोटर पार्ट्स की दुकानें बंद

शिव कुमार अग्रवाल

रांची: लॉक डॉउन को लेकर सरकार गंभीर है। वहीं नागरीक सुविधा को देखते हुए लॉक

डाउन में कई सेकटर में ढीलाई देते हुए राहत दी गयी है। लेकिन इसके व्यवहार में आने के

बाद इस छूट की खामियां भी नजर आने लगी हैं। इससे कारोबार सही तरीके से व्यवस्थित

नहीं हो पा रहा है। उदाहरण के तौर पर हम निर्माण कार्य में दी गयी छूट को ले सकते हैं।

निर्माण कार्य की छूट सरकार ने दे दी है। इस छूट के बाद भवन और सड़क निर्माण से जुड़े

मजदूर काम पर आ भी गये हैं। परन्तु सिमेंट, छड़ की दुकानें बंद हैं। गिट्टी,बालू एंव ईट

कहां से आयेगा यह भी सुनिश्चत नहीं हो पाया है। इससे काम पर मजदूर होने के बाद भी

काम गति नहीं पकड़ पा रही है।

ठीक इसी तरह परिवहन सेवा में सिर्फ मालवाहक ट्रकों को छूट दी गई है। इससे जुड़े

मरम्मति सेवा गैराज, पंक्चर दुकान को खोलने की छूट भी मिली है। लेकिन इससे मोटर

पार्टस की दुकानें बंद हैं इस वजह से अगर कोई वाहन किसी कारण से खराब हो रही है तो

उसे सड़क पर ही खड़ा करना पड़ रहा है क्योंकि मोटर पार्ट्स की दुकानें नहीं खोली गयी हैं।

सरकार के इस फैसले से कारोबार को गति देने की कोशिश तो की गयी है लेकिन वास्तव

में अड़चनों की वजह से यह काम तेज गति को प्राप्त नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों को

सुविधा कम और परेशानी ज्यादा हो रही है।

लॉक डॉउन में छूट अधूरी मिलने से काम बाधित

शहर के कई बिल्डरों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा लॉक

डाउन की अवधि बढ़ाने के साथ ही नागरिक सुविधा को ध्यान रखते हुए कई सेक्टर लॉक

डाउन में छूट दी गई है परन्तु इसमें कई गलतियां भी शामिल है। निजी प्रयास से स्थानीय

मजदूर काम पर लौट आये हैं परन्तु निर्माण में लगने वाले सीमेंट, छड़, बालू, ईट एवं गिट्टी

के बिना यह निर्माण कैसे होगा। सिमेंट एवं छड़ दुकाने बंद हैं। बालू,गिट्टी एवं ईट उद्योग

बंद हैं। इस स्थिति में निर्माण कार्य कैसे होगा यह समझ से परे है। दुसरी ओर परिवहन

सेवा में मालवाहक ट्रक को छूट देते हुए मुख्य सड़कों के ढ़ावा, गैराज एवं पंक्चर दुकानों को

खोलने की छूट दी गई है। गैराज में गाड़ी मरम्मत के लिए मोटर पाटर्स की दुकानों को भी

खोलने की छूट मिलनी चाहिए थी ताकि गाड़ियों के पाटर्स उपलब्ध हो सके। बाहर के

प्रदेशों से अनाज एवं अन्य वल्तु लेकर पंडरा बाजार पहुंचे मालवाहक वाहनों के कई

ड्राईवरों ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि कई-कई मील तक भोजन नहीं मिल रहा

है। यदि गाड़ी खराब हो गई तो राम भरोसे सड़क पर ही कई-कई दिनों तक खड़ा रहना पड़

रहा है। मीलों पैदल चल कर यदि गैराज मिला भी तो गाड़ी के पार्टस नहीं मिल रहे हैं। इस

भीषण परिस्थिति में भी हमें सेवा उपलब्ध कराना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए की जिस

सेवा में छूट दे उस सेवा से जुड़े सभी वस्तुओं की ईकाई को खोलने की छूट प्रदान करें।


 

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