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पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार ने जासूसी करायी है

पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार ने जासूसी करायी है
  • अनेक लोगों के फोन की फोरेंसिक जांच में प्रमाणित

  • सरकार की तरफ से जासूसी नहीं होने की सफाई

  • विदेशी मीडिया समूहों ने करायी है फोरेंसिक ऑडिट

  • राष्ट्रीय खबर ने नवंबर 2019 में प्रकाशित की थी रिपोर्ट

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पारदर्शिता का दावा करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरी सरकारों के मुकाबले बहुत

ज्यादा जासूसी करायी है। खास तौर पर पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संबंधों के बारे

में जानकारी हासिल करने के लिए इजरायली साफ्टवेयर पिगासूस का इस्तेमाल किया गया

है।  विदेशी समाचार पत्रों के समूहों ने एक साथ मिलकर की जांच में पता लगा लिया है।

जिनलोगों के मोबाइल पर यह जासूसी साफ्टवेयर भेजा गया था, उसका भी अब खुलासा हो

गया है। इधर केंद्र सरकार ने औपचारिक तौर पर ऐसी किसी जासूसी से फिर इंकार किया है।

केंद्र सरकार ने ऐसी किसी जासूसी से किया है इंकार

बताते चलें कि पिगासूस साफ्टवेयर से भारत में हो रही जासूसी का खुलासा राष्ट्रीय खबर ने

वर्ष 2019 में ही कर दिया था। गत 8 नवंबर 2019 के अंक में इससे संबंधित सूचनाएं भी

प्रकाशित की गयी थी। विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो गया

था कि इस जासूसी साफ्टवेयर की खरीद केंद्र सरकार की किसी एजेंसी द्वारा की गयी थी।

इसके एवज में कितने रुपये का भुगतान किया गया था, यह अब तक गुप्त है। लेकिन यह

स्पष्ट है कि यह साफ्टवेयर सस्ती नहीं है। दूसरी तरफ दुनिया भर में फिर से इस मुद्दे पर

हंगामा होने के बाद इसे बनाने वाली कंपनी ने फिर से अपनी बात दोहरायी है कि उसकी तरफ

से किसी निजी कंपनी अथवा व्यक्ति को यह साफ्टवेयर नहीं बेचे गये हैं। कंपनी ने सिर्फ

किसी देश की सरकार को ही यह साफ्टवेयर बेचा है। भारतवर्ष में जिन पत्रकारों के टेलीफोन

पर जासूसी हुई है, उसकी सूची भी अब सार्वजनिक हो चुकी है। इनमें कई ऐसे पत्रकार भी हैं जो

पारदर्शिता का दावा करने वाली इस सरकार के विरोध की वजह से अपनी नौकरी गंवाने के

बाद फिलहाल मुख्यधारा की पत्रकारिता में नहीं हैं। वैसे यह काम किस सरकारी एजेंसी का है,

इस रहस्य पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।

पारदर्शिता का दावा लेकिन जांच रिपोर्ट भी सामने

विदेशी मीडिया संस्थानों ने समूह ने मिलकर इस मामले की जांच की और एक एक कर सारे

तथ्यों का खुलासा किया है। इस खुलासा से पूरी दुनिया में सत्ता के खिलाफ फिर से माहौल

बन गया है। कुछ ऐसी ही इससे पूर्व विकीलिक्स के खुलासे के दौरान हुआ था। जिसके

परिणाम स्वरुप कई देशों में तख्ता पलट तक हो गया था। सिर्फ सरकार को ही साफ्टवेयर

बेचने की बात कहने के दौरान इजरायल की कंपनी एनएसओ ने किन सरकारों को इसे बेचा

गया है, उसकी जानकारी नहीं दी है। दूसरी तरफ मीडिया समूहों की जांच में जैसे जैसे

फोरेंसिक ऑडिट का काम हुआ है, वैसे वैसे किन देशों में ऐसी जासूसी हुई है, उसका पता

चलता जा रहा है। वैसे यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि जिस किसी भी पत्रकार ने किसी

समय अमित शाह से जुड़े मामलों पर खबरें छापी थी, उनके मोबाइल में यह जासूसी

साफ्टवेयर भेजा गया था। वैसे इस जांच में अजीब तथ्य यह भी सामने आया है कि कई

विरोधी राजनीतिक नेताओं के साथ साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की भी जासूसी इस

साफ्टवेयर के जरिए की गयी थी। इससे स्पष्ट है कि इस साफ्टवेयर के जरिए जासूसी कराने

वाली एजेंसी के नियंत्रक को पारदर्शिता का दावा करते रहने के बाद भी दरअसल अपनी ही

पार्टी के कुछ बड़े नेताओं पर भरोसा नहीं था।

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