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अगले दो दिनों में पृथ्वी पर दिख सकता है सूरज की आंधी का कुप्रभाव




सूर्य में फिर विस्फोट निकली बड़ी सौर आंधी

जी वन स्तर का होगा वहां से आने वाला तूफान

बिजली सब स्टेशनों पर आवेश की वजह से असर

आम आदमी के लिए तूफान से कोई खतरा नहीं है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अगले दो दिनों में सूर्य से निकली सौर आंधी धरती तक पहुंच सकती है। इस बार के बारे में वैज्ञानिकों ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस बार की सौर आंधी का आकार थोड़ा बड़ा है। लिहाजा इसकी वजह से दुनिया के कई स्थानों पर बिजली का संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे कुछ सैटेलाइट भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।




वैसे इसकी वजह से फिर से दोनों ध्रुवों में रंग बिरंगा औरा भी नजर आ सकता है, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। इस बार यह औरा उत्तरी छोर पर नजर आने जा रहा है। अनुमान है कि यह सौर आंधी रविवार के प्रारंभ होते ही पृथ्वी के करीब होगी। वैसे इसे लेकर वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि यह आम इंसान के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं डालने जा रहा है।

सूर्य में हुए इस विस्फोट के बाद वहां से तेजी से निकली सौर आंधी के बारे मे खगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि यह छोटे आकार का जी 1 स्तर की होगी। वैसे इसे खगोल विज्ञान के लिहाज से अत्यंत छोटे आकार की सौर आंधी माना जाता है।

इसके बाद जी 2 स्तर की आंधी होती है, जो इस स्तर से लगभग दोगुणा प्रभाव छोड़ती है। वैसे बता दें कि सूर्य में चल रहे लॉकडाउन के दौर में अक्सर ही इस किस्म का विस्फोट यदाकदा होते रहते हैं।




अगले दो दिन क्योंकि इस दूरी को तय करती है आंधी

फिर भी इस सौर आंधी के पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभाव को भांपते हुए ही बिजली संकट की पूर्व चेतावनी जारी की गयी है। ऐसी स्थिति में सौर आंधी की वजह से बिजली स्टेशनों पर विद्युतीय आवेश बढ़ जाने की वजह से ही वे बंद हो जाते हैं। वैसे सूर्य के इस भीषण विस्फोट का इलाका भी सूर्य के केंद्र का वह इलाका है, जो कोरोना कहा जाता है।

यह सूर्य का वह इलाका है जो सबसे अधिक गर्म है। विस्फोट पर नजर रखने वालों के मुताबिक इस विस्फोट की वजह से सूर्य के ऊपर कई लाख मील तक प्लाज्मा किरणें की लपट उठी। वैसे भी वहां प्लाज्मा किरणों की बारिश को पहले ही वैज्ञानिक देख चुके हैं।

इसमें प्लाज्मा किरणें कई लाख मील तक ऊपर जाने के बाद फिर से सूर्य की सतह पर बारिश की तरह आ गिरती हैं। इसकी वजह से पूरे इलाके में चुंबकीय उथल पुथल मच जाती है। वहां से उत्पन्न आवेशीय तूफान को ही सौर आंधी कहा जाता है।

ऐसी ही एक आंधी अब तेज गति से पृथ्वी की तरफ आ रही है।



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