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सौरमंडल का भयानक विस्फोट आज नजर आया

  • बिग बैंग के बाद की शायद सबसे बड़ी घटना

  • प्राचीन महाप्रलय के बाद की सबसे बड़ी घटना

  • भारतीय दूरबीन से भी नजर आयी यह घटना

  • पृथ्वी पर डायनासोर नजर आने जैसी घटना

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सौरमंडल का भयानक विस्फोट वैज्ञानिकों को नजर आया है। हमारी दृष्टि के

मुताबिक यह आज की घटना है लेकिन वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह घटना

पृथ्वी से करीब 390 प्रकाशवर्ष की दूरी पर घटी है। इसलिए समझा जाना चाहिए कि यह

घटना पुरानी है और उतनी दूरी से पृथ्वी तक इसकी आहट पहुंचने में काफी समय लगा

होगा। लेकिन वैज्ञानिक इस बात पर एकमत है कि शायद बिग बैंग यानी सौरमंडल के

महाप्रलय के बाद की यह सबसे बड़ी घटना है। इतना बड़ा विस्फोट इससे पहले कभी नहीं

देखा गया था।

इस विस्फोट को देखने से जुड़े वाशिंगटन के नौसेना रिसर्च प्रयोगशाला के निदेशक

सिमोना जियासिनटुची कहते हैं कि पृथ्वी के लिहाज से अगर बात करें तो यह वर्ष 1980 से

सेंट हेलेना पर्वत के विस्फोट जैसा ही है। याद रहे कि माउंट हेलेना पर्वत इस दौरान

विस्फोट की वजह से ध्वस्त हो गया था। ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से इस पर्वत का

पूरा ऊपर का हिस्सा ही उड़ गया था। वैज्ञानिकों की राय है कि एक ब्लैक होल के

गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आने की वजह से यह विस्फोट हुआ है ।

अनेक तारामंडलों के एक साथ इस ब्लैक होल के अंदर जाने के दौरान सारे तारों का

विखंडन हुआ है। इसी वजह से उनमें मौजूद गैस तारों के टूटने की वजह से पूरे अंतरिक्ष में

फैले हैं। लेकिन अधिकांश को इसी ब्लैक होल ने फिर अपने अंदर ही सोख लिया है।

सौरमंडल का भयानक विस्फोट का काफी देर बाद पता चला

सौर मंडल में जहां यह घटना घटी है, वह ओपिहिचूस गैलेक्स के केंद्र का हिस्सा है। यह

सबसे बड़े गेलैक्सी वाले हिस्से के तौर पर जाना जाता है। इस इलाके को खगोल दूरबीन के

देखने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस एक इलाके में ही एक साथ हजारों

सौरमंडल मौजूद हैं। इन सभी के बीच में एक विशाल ब्लैक होल मौजूद है। इन सभी के

अपने अपने गुरुत्वाकर्षण की वजह से वे अपनी अपनी जगह पर मौजूद हैं। इनमें से कई

अचानक से ब्लैक होल के प्रवल गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आने की बजह से टूटकर

विखंडित हो चुके हैं। इतनी दूरी पर होने की वजह से इस विस्फोट की सूचना पृथ्वी तक

पहुंचने में भी काफी वक्त लगा होगा लेकिन इसे पृथ्वी पर वैज्ञानिकों ने आज ही होते हुए

देखा है। जो कुछ नजर आया है, उसके मुताबिक इलाके में काफी दूर तक गैस के गुबार

फैल गये हैं। इससे पूरे इलाके में रंग बिरंगे गैस के बादल नजर आ रहे हैं। यह सारा कुछ

उसी विशाल ब्लैक होल की वजह से हो रहा है जो इनके केंद्र में स्थित है।

अंतरिक्ष में इस किस्म के विस्फोटों की सूचना भी दर्ज होती रहती है। इसके पहले एमएस

0735+74 का विस्फोट दर्ज किया गया था। आज देखा गया विस्फोट उससे शायद पांच

गुणा ज्यादा शक्तिशाली था। जाहिर है कि इससे जो ऊर्जा निकली है वह पूरे सौरमंडल में

अथवा उस इलाके के सौर मंडल के बाहर भी फैलती जा रही है।

दुनिया के अनेक खगोल दूरबीनों में नजर आयी है यह घटना

दुनिया के कई वेधशालाओँ के साथ साथ भारत में लगे रेडियो टेलीस्कोप में भी इसे देखा

गया है। इस बारे में भारतीय वैज्ञानिक बताते हैं कि ऐसा कुछ होने वाला है, इसके संकेत

तो वर्ष 2016 में ही मिल गये थे। भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को अपने अभियान के जरिए

इसकी पूर्व सूचना मिल गयी थी। वैसे आज के विस्फोट की सूचना भारत के अलावा

यूरोपिय स्पेस एजेंसी के एक्स एम एम न्यूटन और ऑस्ट्रेलिया के मुर्सिचिसन वाइडफील्ड

में भी दर्ज हुई है। भारतीय वैज्ञानिकों के अपने चंद्र तकनीक की बदौलत यह पाया था कि

इस इलाके के बीच में विशाल शून्य पैदा हो रहा है। उस वक्त यह माना गया था कि आने

वाले दिनों में यहां कुछ ऐसा ही होने जा रहा है।

इस घटना के नजर आने के बाद अब वैज्ञानिक वहां के भावी घटनाओं को देखना चाहते हैं।

यह प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य है कि हर कुछ अपने अंदर सोख लेने के बाद अनेक अवसरों

पर ब्लैक होल तारों को नये स्वरुप में अंतरिक्ष में उछाल देता है। इसलिए इतने बड़े इलाकों

में मौजूद तारों को निगल लेने के बाद यह ब्लैक होल आगे क्या कुछ करेगा, इस पर

खगोल वैज्ञानिकों की नजर लगी हुई है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक आज की इस उपलब्धि से प्रसन्न हैं। उनके मुताबिक यह एक

ऐसी घटना है मानों पृथ्वी पर नये सिरे से डायनासोर को देखा गया है। अंतरिक्ष से जो

रेडियो संकेत आये हैं वे आकार में काफी छोटे हैं और एक हथेली के इलाक में समा सकते

हैं। अत्याधुनिक उपकरणों ने सौरमंडल का यह धमाका देखा तब जाकर अन्य तथ्यों के

मिलान से अंतरिक्ष के इस भयानक विस्फोट की पुष्टि हुई है


 

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