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रोबोट बनाने की नई तकनीक का प्रयोग सफल कई नई उम्मीदें

  • यंत्रों के बदले समझदार और सक्रिय पार्टिकल्स का प्रयोग होगा

  • यह अपने आप ही बहुत कुछ महसूस करते हैं

  • आस पास की परिस्थिति को समझ लेते हैं

  • सामूहिक तौर पर भी आचरण करते हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रोबोट बनाने की दिशा में बहुत कुछ निरंतर प्रयोग चल रहा है। इंसानी काम और

खतरा को कम करने के लिए भी विभिन्न किस्म के रोबोट बनाने का यह काम प्रारंभ हुआ

था। इस दिशा में काफी कुछ काम हो भी चुका है। अभी चीन के वूहान शहर में कोरोना

महामारी के फैलने के बाद मरीजो की मदद में भी ऐसे रोबोट बहुत काम आये थे। वहां के

अस्पतालों में संक्रमण से बचने के लिए रोबोट की मदद से मरीजों को दवा दी जा रही है।

साथ ही अपने साथ लगे कैमरों की मदद से वे मरीजों का हाल दूर बैठे डाक्टर को बताते थे।

डाक्टर के निर्देश पर वे मरीज की स्वास्थ्य जांच भी कर लेते थे। इसके अलावा परमाणु

संयंत्रों में विकिरण से बचाने के लिए भी रोबोट विकसित किये गये हैं। अनेक इलाकों में

निरंतर चलने वाले कार्यों के लिए भी अब इंसानों के बदले रोबोट का प्रयोग किया जा रहा

है। अनेक सैन्य क्षेत्रों में भी निरंतर निगरानी की जिम्मेदारी रोबोटों को सौंप दी गयी है।

रोबोट बनाने की इन्हीं कोशिशों के बीच एक नया प्रयोग भी सफल हुआ है। नार्थ वेस्टर्न

विश्वविद्यालय ने इस दिशा में स्मार्ट पार्टिकल तैयार किये हैं। इन्हें आचरण के लिहाज से

स्मार्टिकल्स का नाम दिया गया है। सामान्य भाषा में ऐसे सुक्ष्म कण अपने आप में

समझदार और अत्यंत सक्रिय हैं। यह अकेले भी सक्रिय रहते हैं लेकिन समूह में रखने पर

उनकी सक्रियता और बढ़ जाती है क्योंकि एक कण खुद दूसरे कण की गतिविधियों से भी

संकेत लेकर खुद को सक्रिय रख पाता है। सुक्ष्म कणों को एक संकेतग्राही और एक

विश्लेषक के साथ जोड़कर उन्हें बाहरी निर्देश से भी संचालित किया जा सकता है।

यह स्मार्टिकल्स एक दूसरे की मौजूदगी समझ लेते हैं

जो प्रयोग किया गया था, उसमें तैयार यंत्र अपनी बांह फैलाने के बाद आकार में करीब छह

ईंच लंबा होता है। उसमें दो बांह जोड़ गये हैं और वह अपने दोनों हाथों को जो दिखने में

सामान्य पट्टे जैसे हैं, हिला सकता है। एक स्थान पर जब ऐसे तीन रोबोट बनाने के बाद

एक साथ रखे गये तो तीनों की क्रियाएं किसी यांत्रिक नृत्य जैसी बनी। इसका वीडियो भी

शोध वैज्ञानिकों ने जारी किया है। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि

इन्हें स्मार्ट पार्टिकल इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्हें पहले से दिये गये किसी निर्देश का

पालन करने के लिए नहीं बना गया है। उन्हें अपने करीब के पार्टिकल का संकेत समझने

का भी कोई निर्देश नहीं दिया गया है। वह अपनी समझदारी से यह सारा काम कर लेते हैं।

वे समझदार होने की वजह से अपने आस पास के घटनाक्रमों के अनुसार ही प्रतिक्रिया कर

सकते हैं। इस नये किस्म के बनाने की पूरी तकनीक की कई वैज्ञानिकों ने समीक्षा भी की

है। इसमें नेशनल साइंस फाउंडेशन, जेम्स एस मैकडोनेल फाउंडेशन, आर्मी रिसर्च ऑफिस

ने भी पूंजी निवेश किया था। मैसाच्युट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पावेल

चाइवीकोव, और जॉर्जिया टेक के जेरेमी इंग्लैड ने भी इन स्मार्टिकल्स को प्रोग्राम करने में

महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

रोबोट बनाने में चार्ल्स सोरट का सिद्धांत उपयोग में लाया गया

इसे तैयार करने के लिए वर्ष 1870 के उस वैज्ञानिक परीक्षण के सिद्धांत का सहारा लिया

गया है, जिसे उस वक्त के स्विस बैज्ञानिक चार्ल्स सोरट ने किया था। उन्होने यह बताया

था कि जब कोई लवण का घोल किसी बर्फ के संपर्क में आता है तो बर्फ तेजी से जमता है।

इसके पीछे का जो वैज्ञानिक सिद्धांत था वह अणुओं के स्थान बदलने पर ही आधारित था।

इस स्मार्टकिल्स प्रयोग में भी उसी का इस्तेमाल किया गया है। अणुओँ के एक तरफ से

दूसरी तरफ जाने की वजह से ही इन नन्हे रोबोट के दोनों बांह किसी पक्षी के पंख

फड़फड़ाने जैसा आचरण करते नजर आते है। खुद की समझदारी से आचरण करने की

वजह से इन नन्हें रोबोटों का महत्व अधिक आंका जा रहा है। समझा जा रहा है कि भविष्य

में ऐसे स्मार्ट रोबोट अपनी समझदारी से ही वैसे ढेर सारे काम कर लेंगे, जिनमें सुक्ष्म

नजर और वैज्ञानिक ज्ञान की आवश्यकता होती है। एक से अधिक स्मार्टिकल्स एक समूह

में काम करते हुए किसी सामान को भी एक निर्धारित स्थान से दूसरे निर्धारित स्थान तक

सामूहिक प्रयास से धकेलकर ले जा सकेंगे। इस पूरे शोध का मूल्यांकन करने वाले

वैज्ञैनिक अरविंद मुरुगन ने कहा कि इनकी जटिल संरचना और सरल विज्ञान उन्हें

अत्यधिक कुशल रोबोट बना देता है। श्री मुरुगन वर्तमान में शिकागो विश्वविद्यालय से

जुड़े हुए हैं और वह इस प्रयोग से प्रत्यक्ष तौर पर संबंधित नहीं थे। एक दूसरे से खुद ही

संपर्क करने में सक्षम इन बोट्स की कार्यकुशलता को भविष्य में और धारदार बनाते हुए

उन्हें अत्यंत जटिल कार्यो में भी नियोजित किया जा सकेगा।

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