Press "Enter" to skip to content

बहुत छोटे आकार का चिप अदृश्य चीजों को भी देख समझ सकता है




  • खेती में कारगर साबित होगा यह उपकरण
  • व्यापारिक उत्पादन में यह बहुत सस्ता होगा
  • नजर आने वाली संरचना का विश्लेषण करता चलेगा
  • खेती जैसे कार्यो में बहुत कारगर होना मोबाइल में लगने के बाद
राष्ट्रीय खबर

रांचीः बहुत छोटे आकार का एक चिप बनाने में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। चिप का आकार छोटा होना कोई बड़ी बात नही है। इस चिप के अन्य गुण ही से दूसरों से अलग बनाते हैं। अच्छी बात यह है कि यह बहुत सस्ती है और उसका इस्तेमाल स्मार्ट फोनों में किया जा सकता है।




अपने इंफ्रा रेड तकनीक की वजह से बहुत छोटे आकार का यह चिप उन अदृश्य चीजों को भी देख सकता है, जो आम इंसानी आंखों को नजर नहीं आते हैं। इसके व्यापारिक उत्पादन के बाद इसका औदयोगिक और कृषि संबंधी गतिविधियों में सबसे बेहतर इस्तेमाल हो सकता है, ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं।

इस तकनीक की विशेषता यह है कि यह इंसानी आंख की तरह तीन रिसेप्टर सेलों का इस्तेमाल करता है तथा उन्हें अलग अलग संकेतों में बदलने की क्षमता रखता है। हमारी आंख भी कुछ इसी पद्धति पर काम करती है पर उसके देखने की अपनी एक सीमा है।

बहुत छोटे आकार के कारण स्मार्ट फोन में लग जाएगा

इंसानी आंख के काम करनेकी पद्धति के आधार पर ही इस बहुत छोटे आकार के चिप को विकसित किया गया है। इंसानी आंख किसी वस्तु को देखने के बाद उसके संकेत दिमाग तक पहुंचाता है, जहां से वस्तु क्या और कैसी है, इसका फैसला होता है।

इस नये चिप में नियंत्रण केंद्र को नजर आने वाले वस्तु के बारे में अलग अलग आंकड़े भेजे जाते हैं। इसकी परख करने के लिए वैज्ञानिकों ने दूध पर इसका परीक्षण किया था। दूध में पौष्टिकता कितनी है, यह चिप बता सकता है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादन और कृषि में और बेहतर होने की उम्मीद जतायी गयी है।




आइंडहोवेन विश्वविद्यालय के शोध दल ने इसे तैयार किया है। शोध दल की नेता केयी हाक्केई बताती हैं कि जैसे इंसानी आंख किसी फल को देखकर वह कौन सा फल है यह समझ लेता है। साथ ही वह पका है अथवा कच्चा है, यह भी इंसानी दिमाग तय कर लेता है।

यह नजर आने वाले इलाके का विश्लेषण कर सकता है

इसी पद्धति पर बहुत छोटे आकार का चिप उन आंकड़ो का विश्लेषण कर सकता है, जो उसे नजर आते हैं। मसलन किसी जमीन की गुणवत्ता कैसी है तथा उसकी संरचना में क्या कुछ है, यह चिप बता सकता है। इंसानी आंख के मुकाबले मैंटिस श्रृम्प में 16 रिसेप्टर सेल होते हैं।

वह अल्ट्रावॉयोलेट के साथ साथ नियर इंफ्रा रेड किरणों का भी विश्लेषण कर सकता है। वर्तमान मे इन गुणवत्ताओँ के विश्लेषण के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत पड़ती है। लेकिन यह बहुत छोटे आकार का चिप ऐसे काम कर सकता है, जो उत्पादन लागत के लिहाज से बहुत सस्ता है और किसी स्मार्ट फोन में लगाया जा सकता है।

इसे साथ लेकर चलने वाला किसान अपनी खेत की गुणवत्ता की खुद ही परख करता चला जाएगा। इसी तरह औद्योगिक उत्पादन के इलाको में भी यह छोटा सा चिप काम की गुणवत्ता का खुद ही निर्धारण करने की क्षमता से लैश होगा।



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »

Be First to Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: