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इटली का छोटा सा द्वीप जो कोरोना के प्रभाव को आसानी से झेल गया

  • वायरस का संक्रमण आया और यूं ही समाप्त हो गया

  •  द्वीप की आबादी करीब आठ सौ है

  • कई संक्रमित लोग यहां आये भी थे

  • अब यहां एक भी संक्रमित मरीज नहीं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इटली का छोटा सा द्वीप भी वैज्ञानिकों के जांच के दायरे में हैं, जहां कोरोना का

संक्रमण फैल नहीं पाया। इस द्वीप का नाम गिजिलियो द्वीप है। वहां कोरोना के मरीज

आये थे लेकिन यह संक्रमण दूसरों तक क्यों नहीं फैला, यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है।

वहां का जनजीवन और लाईफ स्टाईल कोरोना संक्रमण फैलाने के अनुकूल थे। इसके बाद

भी आज वहां कोई भी इस संक्रमण से ग्रस्त नहीं है। इसकी असली वजह क्या है, अब तक

यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिर भी वैज्ञानिक इस सवाल का उत्तर तलाशने की भरसक

कोशिश कर रहे हैं। यह सवाल इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण बना है क्योंकि करीब आठ सौ की

आबादी वाले इस छोटे से द्वीप में कोरोना संक्रमण आया था और यहां के लोगों की

दिनचर्या भी कोरोना फैलने के लिए पूरी तरह अनुकूल थी। इस द्वीप पर रहने वाले

अधिकांश लोग एक दूसरे के काफी करीब ही निवास करते हैं। यहां के लोगों का आपस में

नजदीकी बनाकर बैठना, किसी भी समारोह में एक दूसरे का आलिंगन करना जैसी आदतें

आम बात है। कोरोना संक्रमण के दौरान भी ऐसा होता रहा। इसके बाद भी वहां कोरोना

संक्रमण के मामले उस तेजी से फैल नहीं पाये, जिस तेजी से वे इटली की मुख्य जमीन के

कुछ हिस्सों में फैले थे। इटली कभी दुनिया का सबसे बुरी तरह कोरोना प्रभावित देशों में से

एक था। वहां की हालत इतनी बिगड़ गयी थी कि चिकित्सा सुविधाएं कम पड़ गयी थी।

इसके बाद इटली का यह छोटा द्वीप इस प्रतिकूल परिस्थितियों से स्वाभाविक तौर पर

बचा रहा।

इटली का छोटा द्वीप अपने आप में शोध का विषय

इस द्वीप पर फंसी एक कैंसर विशेषत्र पाओला मुटी ने जब यह जाना कि वहां आने वाले तीन पर्यटन बीमार हो गये थे, तो उनकी चिंता स्वाभाविक थी।

पाओला मुटी मिलान विश्वविद्यालय में स्तन कैंसर की विशेषज्ञ हैं।

उनके मुताबिक यहां के लोग जिस तरीके से रहते हैं, उससे कोरोना संक्रमण का तुरंत फैल जाना स्वाभाविक था। सारी परिस्थितियां

कोरोना संक्रमण के फैलने के अनुकूल होने के बाद भी ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसका उत्तर

तलाशने की कवायद चल रही है। पहले इस द्वीप की भौगोलिक संरचना को समझ लें कि

इस पर ऊपर एक किला बना हुआ था, जो अब लगभग टूट चुका है। प्राचीन समय में

समुद्री डाकुओं से बचाव के लिए इस किला को बनाया गया था। यहां के लोग अपने खाली

समय में यहां आने के समुद्री रास्ते के पास ही बैठा करते हैं। यहां के सारे घर भी एक दूसरे

के काफी करीब बने हुए हैं। इस द्वीप पर एकमात्र डाक्टर हैं डॉ आर्माडो शियाफिनो। वह

पिछले चालीस वर्षों से यहां रहते आये हैं। उन्होंने भी कैंसर विशेषत्र मुटी की चिंत का

समर्थन किया है। डॉक्टर शियाफिनो के मुताबिक पहले भी यहां जब कोई संक्रामक बीमारी

आती थी तो पूरा द्वीप ही संक्रमित हो जाया करता था। यह पहला मौका है जबकि ऐसा

नहीं हुआ। दोनों ने इस बारे में और भी आंकड़े एकत्रित किये। दरअसल दोनों यह जानना

चाहते थे कि क्या कोरोना का संक्रमण यहां फैला हुआ है और लोगों को पता भी नहीं है।

जो पहला मरीज आ रहा था वह इटली जाकर मर गया

यहां कोरोना हमले के बारे में जो जानकारी है, उसके मुताबिक साठ साल का एक व्यक्ति

गत 18 फरवरी को यहां आया था। वह अपने किसी रिश्तेदार को दफनाये जाने के कार्यक्रम

में आया था। उसे सभी ने पूरे कार्यक्रम के दौरान खांसते हुए देखा था। अनुमान है कि

उसकी वजह से ही कोरोना संक्रमण इस द्वीप पर आया हो। लेकिन वह कार्यक्रम समाप्त

होने के बाद उसी दिन इटली वापस लौट गया था। उसके बारे में पता चला है कि तीन

सप्ताह बाद इटली के एक अस्पताल में उसकी कोरोना से मौत भी हो गयी थी। उसके बाद

पांच मार्च को तीन और लोग इस द्वीप पर आये थे। इनमें से एक जर्मन नागरिक भी था,

जो उत्तरी इटली के उस क्षेत्र से आया था, जहां कोरोना का हमला सबसे जबर्दस्त था। यहां

उसने काफी लोगों से मुलाकात की। वह कई सार्वजनिक स्थलों पर भी लोगों से मिलता

जुलता रहा। एक सप्ताह बाद अपने लगातार बढ़ती खांसी की वजह से उसने अपनी जांच

करायी तो कोरोना का पता चला। उसके आने के चार दिन बाद ही पूरे इटली में लॉक डाउन

की घोषणा हो चुकी थी।

इसके अलावा भी संक्रमण लेकर कई लोग आये। लेकिन यहां उसका कोई सामुदायिक

असर नहीं पड़ा। जून के प्रारंभ में लॉक डाउन समाप्त किये जाने के बाद फिर से यहां

पर्यटन आ रहे हैं। लेकिन अब यहां कोरोना का एक भी मामला नहीं है। बचाव के लिए वहां

के 723 लोगों की कोरोना जांच की गयी है। इनमें से कोई भी संक्रमित नहीं है। अब

वैज्ञानिक इसका कारण जानना चाहते हैं। फिलहाल इस बारे में वैज्ञानिकों के पास कोई

संतोषजनक तथ्य अथवा आंकड़ा नहीं है। लेकिन वहां कोरोना नहीं फैल पाया,यह सच है।


 

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