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मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत बढ़ाया जाएगा

  • निर्मला सीतारमण ने आर्थिक पैकेज की जानकारी दी

  • मध्यम कारोबार की सीमा को बढ़ाया गया

  • इस कर्ज के लिए कुछ गिरवी नहीं रखना

  • पहले साल में मूलधन का भुगतान नहीं

प्रतिनिधि

नयी दिल्ली : मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और इस संकट को एक अवसर के

रूप में बदलने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में से तीन लाख करोड़ रुपये

का कोलेट्रल फ्री ऋण एमएसएमई को दिया जायेगा । इसके साथ ही एमएसएमई के

परिभाषा में बदलाव करते हुये मध्यम उद्यम के कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़

रुपये कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग

ठाकुर ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुये कहा कि आत्मनिर्भर

भारत अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए पैकेज की घोषणा की जा रही है। इसमें

सबसे पहले एमएसएमई के लिए मंद पड़ी अर्थव्यवस्था में यह घोषणा की गयी है। अन्य

क्षेत्रों पर अगले कुछ दिनों में घोषणायें होंगी। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इस अभियान

के तहत एमएसएमई के लिए तीन लाख करोड़ रुपये का कोलेट्रल फ्री ऋण देने का

प्रावधान किया गया है। यह ऋण चार वर्ष के लिए होगी और पहले एक वर्ष मूलधन का

भुगतान नहीं करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके तहत 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाले

एमएसएमई को 25 करोड़ रुपये तक का ऋण मिलेगा।

बैंकों और एनबीएफसी के लिए शतप्रतिशत गारंटी कवर मिलेगा। यह योजना 31 अक्टूबर

2020 तक उपलब्ध होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके साथ ही एमएसएमई के परिभाषा

में बदलाव किया गया है। एमएसएमई की नयी परिभाषा में माइक्रो उद्यम में एक करोड़

रुपये तक का निवेश किया जा सकेगा और इसके कारोबार की सीमा पांच करोड़ रुपये

होगी। इसी तरह से लघु उद्यम में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया जा सकेगा और इसका

कुल वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये का होगा। मध्यम उद्यम में 20 करोड़ रुपये तक

निवेश होगा और इसका कुल कारोबार 100 करोड़ रुपये तक का होगा।

मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने कई सुधार किये गये

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही तनावग्रस्त एमएसएमई की मदद के लिए 20 हजार करोड़

रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे ऐसे एमएसएमई को लाभ होगा जो एनपीए या

नतावग्रस्त है। इससे दो लाख से अधिक एमएसएमई को लाभ होगा। एमएसएमई में 50

हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा जो बेहतर कारोबार कर रहे हैं। उनके लिए 10

हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड की स्थापना की जायेगी। इससे एमएसएमई को शेयर

बाजार में सूचीबद्ध कराने में मदद मिलेगी।

अब 200 करोड़ तक वैश्विक टेंडर नहीं होंगे

मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को देश के भीतर मजबूत करने के लिए नये प्रावधान के तहत अब

वित्त मंत्री ने कहा कि एमएमएसई को विनिर्माण और अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में

लाने के उद्देश्य से अब 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद का वैश्विक टेंडर जारी नहीं

किया जायेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मदद करने वाला है।

इससे एमएसएमई का कारोबार भी बढ़ेगा। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि एनबीएफसी,

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये

का विशेष तरलता स्कीम शुरू किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एनबीएफसी के लिउ 45

हजार करोड़ रुपये का आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम 2.0 शुरू किया गया है। उन्होंने कहा

कि कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न विषम स्थिति में बिजली वितरण कंपनियों के

राजस्व में कमी आयी है। इसके मद्देनजर इन कंपनियों को 90 हजार करोड़ रुपये की पूंजी

उपलब्ध करायी जा रही है। पावर फाइनेंस कार्पोरेशन और आरईसी के जरिये बिजली

वितरण कंपनियों को संबंधित राज्य सरकारों की गारंटी पर ऋण दिया जायेगा।

मंद पड़ी अर्थव्यवस्था में राहत के लिए उन्होंने कहा कि सभी केन्द्रीय एजेंसियों जैसे रेलवे,

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और पीडब्ल्यूडी के ठेकेदारों को राहत दी गयी है। ठेकेदारों को

छह महीने की छूट दी गयी है। रियल एस्टेट को भी राहत प्रदान की जा रही है। इसके तहत

रेरा में पंजीकृत उन परियोजनाओं को पूर्ण करने की अवधि छह महीन बढ़ायी जा रही है

जो 25 मार्च या उसके बाद पूर्ण होनी थी। इसके लिए किसी भी रियल एस्टेट कंपनी को रेरा

कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन नया पंजीयन प्रमाण पत्र मिल जायेगा।

श्री ठाकुर ने कहा कि 1.70 लाख कररोड़ रुपये के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना शुरू

की गयी थी। इसके तहत लोगों को राहत प्रदान की गयी है।


 

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