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छह गिद्धों को खुले में छोड़ने की चल रही है तैयारी

  • केंद्र हुआ है इन विलुप्त होती प्रजाति की पक्षियों का जन्म
  • इनपर सेंसर लगाकर छोड़ा जाएगा ताकि पता चलता रहे
  • गिद्धों को विलुप्त होने से बचाने के लिए अभियान
  • सभी को उड़ने और शिकार का प्रशिक्षण दिया जा रहा
प्रतिनिधि

अलीपुरदुआरः छह गिद्धों को पहली बार खुले आसमान में उड़ने के लिए

छोड़ दिया जाएगा। इसकी तैयारियां चल रही हैं। दरअसल पूरे देश में

अचानक गिद्धों की संख्या में जबर्दस्त कमी नजर आन के बाद उनके

संरक्षण के कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इस प्रजाति के गिद्धों के

अचानक दल के दल मारे जाने के पीछे कीटनाशकों का प्रभाव माना जा

रहा है। गिद्ध जंगल के सफाई कर्मचारी माने जाते हैं। कहीं भी पशु की

लाश को भोजन बनाकर खा जाने में उनकी प्रमुख भूमिका होती है।

हाल के दिनों में उनकी संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है।

पास के राजाभातखावा केंद्र में इन गिद्धों का जन्म कृत्रिम तरीके से

हुआ है। पैदा होने के बाद ही उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है। अब

उनके पंखों पर हल्के वजन के सेंसर लगाये गये हैं। फिलहाल छह गिद्ध

इन सेंसरों को अपने शरीर के अंदर बेहतर तरीके से संभाल सके,

उसका प्रशिक्षण चल रहा है।

कृत्रिम तौर पर जन्मे इन गिद्धों को पास कोई भी प्राकृतिक प्रशिक्षण

नहीं था। इसलिए उन्हें आसमान में उड़ने और शिकार खाने का भी

प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसके शरीर में लगे सेंसरों से वे कहां और किस अवस्था में हैं, इसकी

निगरानी की जाती रहेगी। इस पूरी परियोजना का मकसद है कि खुले

में छोड़ देने के बाद यह पक्षी स्वाभाविक और प्राकृतिक तौर पर जीवन

बसर करते हुए वंशवृद्धि कर सकें। इसके माध्यम से फिर से जंगलों मे

गिद्धो की आबादी बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

छह गिद्धों पर लगातार नजर भी रखी जाएगी

मिली जानकारी के
मुकाबिक इनपर
सेंसर लगाने के
लिए केंद्र सरकार
से खास अनुमति
भी मिल चुकी है।

इन पर जो सेंसर
लगाये जा रहे हैं वे
दरअसल किसी
छोटे आकार के
सैटेलाइट की तरह
काम करेंगे और
पक्षी कहां है,
इसकी जानकारी
नियंत्रण कक्ष को
देते रहेंगे।

इन सेंसरों का
वजन  मात्र 22
ग्राम है। प्रजनन
केंद्र में पैदा होने
की वजह से उन्हें

उड़ने का खास प्रशिक्षण युद्ध स्तर पर चल रहा है। वर्तमान में उनके

शरीर पर नकली सेंसर लगाये गये हैं ताकि अभ्यास के दौरान असली

सेंसरों को कोई नुकसान नहीं हो और गिद्ध को भी इसकी आदत पड़

जाए। प्रस्तावित योजना के मुताबिक सब कुछ सही रहा तो आगामी

15 दिसंबर के बाद इन्हें खुले में छोड़ दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि

बक्सा बाघ परियोजना के साथ ही इस गिद्ध प्रजनन केंद्र को तैयार

किया गया था। अलग अलग जगहों से किसी तरह गिद्ध एकत्रित कर

उनकी संख्या बढ़ाने की कोशिशों के बीच यह छह गिद्ध वहीं पैदा हुए हैं।

वर्तमान में इस केंद्र में चार प्रजातियों के 160 गिद्ध हैं। जिन चार

प्रजातियों को यहां संरक्षित किया जा रहा है, वे स्लैंडर बिल्ड, लांग

बिल्ड, ह्वाइट बैक और हिमालयन ग्रीफिन प्रजाति के हैं।

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