सबरीमाला मंदिर के इलाके में पुलिस की मौजूदगी में स्थिति और बिगड़ी

सबरीमाला मंदिर इलाके में तनाव
  • कई महिलाओं पत्रकारों को आगे बढ़ने से रोका

  • मुख्यमंत्री ने इसे आरएसएस की साजिश बताया

  • नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई करे पुलिस-डीजीपी

शालिनी टी एस



तिरुअनंतपुरमः सबरीमाला मंदिर के आस-पास स्थिति और भी विस्फोटक हो गयी है।

कुछ महिलाओं को वहां जाने से रोकने की वजह से यह तनाव उत्पन्न हुआ है।

वैसे महिलाओं के वहां प्रवेश का विरोध करने वालों में महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है।

वहां की विशेष पूजा के मौके पर कुछ महिला पत्रकारों ने भी वहां जाने का प्रयास किया था।

इनलोगों को भी भारी विरोध और रोड़ेबाजी की वजह से लौटना पड़ा।

वहां महिलाओं के समर्थन में भारी संख्या में पुलिस बल के होने के बाद भी अब तक किसी महिला ने आगे बढ़ने का साहस नहीं किया है।

दूसरी तरफ महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वाले तमाम संगठनों के लोग वहां डेरा डाले बैठे हैं।

मंदिर जाने के रास्ते में नीलाक्कल और पंपा के साथ अब भी गाड़ियों की वहां डेरा डाले लोग जांच रहे हैं

और यह जांच सिर्फ महिलाओं की उपस्थिति को लेकर हो रही है।

मालूम हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मंदिर में महिलाओं को प्रवेश का फैसला सुनाया है।

सबरीमाला इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

राज्य सरकार भी इस फैसले को पक्ष में खड़ी है। इसी वजह से वहां भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किये गये हैं।

दूसरी तरफ अनेक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठन के लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट पीएस श्रीधरऩ पिल्लई वहां मंगलवार को पहुंचे।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर निषेधात्मक आदेश का उल्लंघन करने के लिए तैयार है।

प्रशासन ने हंगामे की आशंका को देखते हुए वहां निषेधात्मक आदेश लागू किया है।

यह आदेश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं पर लागू नहीं किया गया है।

इसी क्रम में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राहुल ईश्वर को पुलिस ने कल ही गिरफ्तार कर लिया है।

न्यूयार्क टाइम्स के लिए काम करने वाली दिल्ली की पत्रकार सुहासिनी राज भी

लोगों के भारी विरोध की वजह से आगे नहीं बढ़ पायी है।

उनकी सुरक्षा में पुलिस तैनात थी जबकि प्रदर्शनकारियों ने उनपर रोड़ेबाजी की।

जिसके बाद हंगामा को टालने के लिए वह वापस लौट गयीं।

इस बीच राज्य के डीजीपी लोकनाथ बेहरा ने पुलिस वालों को घृणा, अफवाह

और हिंसा फैलाने में सोशल मीडिया की मदद लेने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

सबरीमाला में नफरत फैला रही है आरएसएस

सबरीमाला मंदिर के इलाके में पुलिस की मौजूदगी में स्थिति और बिगड़ीदूसरी तरफ मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा है कि मंदिर में वहां के आदिवासी समुदाय की

परंपरा को सभी अच्छी तरह जानते समझते हैं।

अभी की परेशानी यह है कि आरएसएस के लोग वहां भक्तों को भड़का रहे हैं और नफरत फैला रहे हैं।

इसी के जरिए वे आतंक भी फैलाना चाहते हैं।

श्री विजयन ने कहा कि जो कुछ वहां आरएसएस द्वारा किया जा रहा है, वह दरअसल दलित और पिछड़ा विरोधी है।

ऐसे कार्यक्रमों और अफवाहों की मदद से आरएसएस वहां पिछड़ों का प्रवेश भी रोकना चाहती है।

गंदी मानसिकता है। उन्होंने कहा है कि यह ऐसा मंदिर है, जहां सभी धर्मों के लोग जाते हैं। अ

ब आरएसएस यहां भी गंदी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है। लोगों को इस किस्म की चाल से सावधान हो जाना चाहिए।

यहां के प्रमुख वकील हरीश वासुदेवन ने कहा कि यहां जो भी हमला हो रहा है, उसकी निंदा की जानी चाहिए क्योंकि यह सबरीमाला की परंपरा के खिलाफ है।

दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार ने कहा कि मंदिर की अपनी प्रथा और विश्वास की रक्षा होनी चाहिए लेकिन इस बहाने वहां हिंसा फैलाने की निंदा की जानी चाहिए।

महिलाओं को वहां प्रवेश की अनुमति देना सही फैसला नहीं है।

क्योंकि इस मंदिर का रास्ता महिलाओं को लिए सरल नहीं है।

इसलिए इसे सिर्फ बराबरी के अधिकार के हनन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

दरअसल यह विधि व्यवस्था की समस्या है और उसे इसी परिपेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों की नाराजगी महिला पत्रकारों से इसलिए भी है क्योंकि वे जबरन यहां की व्यवस्था में खलल डालने आ रही हैं।

लोगों ने आरोप लगाया कि सिर्फ चैनल की टीआरपी बढ़ाने के खेल में महिलाओं को आगे किया जा रहा है। यह भी गलत है।



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