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फ्रांस की सिस्टर एंड्रिया कोरोना को मात देने वाली विश्व की सबसे उम्रदराज

  • 117 साल की नन ने कोरोना को भी मात दे दी

  • आज ही जन्मदिन के समारोह में भाग लिया

  • इस नर्सिंग होम में 11 लोगों की मौत भी हुई

  • देख नहीं पाती और व्हील चेयर पर चलती हैं

विशेष प्रतिनिधि

पेरिसः फ्रांस की सिस्टर एंड्रिया ने 117 साल की आयु में भी कोरोना को मात देने में

सफलता पायी है। कोरोना से जंग जीतने के बाद उन्होंने गुरुवार को यानी आज अपना

जन्मदिन भी मनाया है। ईसाई धर्मप्रचारक इस महिला ने अपने जीवन काल में वर्ष 1918

की फ्लू महामारी के बाद दोनों विश्वयुद्ध भी देखें हैं। अब इस उम्र में उन्होंने फिर से कोरोना

को मात दी है। कोरोना से जंग जीतने के बाद उनके शरीर के सारे अंग ठीक ढंग से काम

कर रहे हैं। दक्षिण पूर्वी फ्रांस के टाउलोन में रहने वाले नन अपने जन्मदिन के समारोह

दौरान भी पूरा तरह सामान्य रही। वहां के सेंट कैथरीन नर्सिंग होम के प्रवक्ता डेविड

टावेला बताया कि कोरोना से मुक्त होने के बाद बुधवार तक वह विश्राम करती रही हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि गत माह ही यहां कोरोना का हमला हुआ था। इस कोरोना संक्रमण

के दायरे में यहां रहने वाली 88 में 81 लोग पीड़ित हुए थे। उनमें से 11 लोगों की मौत भी हो

चुकी है।

फ्रांस की सिस्टर एंड्रिया स्वभाव से खुशमिजाज है

कोरोना से संक्रमित होने के बाद सिस्टर एंड्रिया को अलग थलग रखा गया था। उस दौरान

वह मानसिक तौर पर थोड़ी विचलित अवश्य हुई थी। संक्रमण के दौरान भी उनकी

लगातार निगरानी की गयी। इस दौरान वह सामान्य से अधिक समय तक सोती रही।

लेकिन उनकी प्रार्थना का क्रम यथावत चलता रहा। इसलिए इस सप्ताह वह कोरोना को

मात देने वाली विश्व की सबसे अधिक उम्र की इंसान बन चुकी हैं। इस दौरान वह लगातार

यह भी कहती रही कि वह चूंकि मौत से नहीं डरती इसलिए कोरोना से भी उन्हें कोई भय

नहीं है। इसलिए अगर वैक्सिन लगनी भी है तो उन्हें लगायी जाए, जिन्हें इसकी अधिक

जरूरत है। सिस्टर एंड्रिया के बारे में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनका जन्म वर्ष

1904 में हुआ था। उन्हे वर्ष 1944 में ईसाई धर्म प्रचारक के तौर पर मान्यता दी गयी थी।

अब उम्र के इस पड़ाव में अंधी हो चुकी एंड्रिया को एक व्हील चेयर की जरूरत पड़ती है। वह

मानती है कि उम्र के इस पड़ाव में वह कई बार अकेली महसूस करती हैं। लेकिन वह सारे

घटनाक्रमों को ईश्वर के आदेश को तौर पर ही स्वीकार करती हैं।

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