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सिंगापुर के शोध वैज्ञानिकों के दल ने कोरोना से बचाव की पद्धति बतायी

  • खून के नमूनों के बी सेल से खोजा गया इसे

  • अनुमति मिलने के बाद क्लीनिकल ट्रायल होगा

  • कोरोना रोकने वाले पांच एंडीबॉडी की पहचान हुई

  • सबसे पहले प्रथम एंटीबॉडी का परीक्षण किया जाएगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सिंगापुर के शोध वैज्ञानिकों के एक दल ने कोरोना से बचाव करने वाली पांच ऐसे

प्रतिरोधकों की पहचान की है, जो शरीर में मौजूद होते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण और

उसके स्वरुप में हो रहे बदलाव के बीच इन पांच प्रतिरोधकों को दर्ज किया गया है। वहां के

डीफेंस साइंस आर्गेनाइजेशन (डीएसओ) में यह शोध चल रहा है। अब शरीर में मौजूद

प्रतिरोधकों की पहचान होने के बाद उनमें से सबसे प्रमुख प्रतिरोधक पर अब क्लीनिकल ट्रायल

भी प्रारंभ किया जाने वाला है। इस एंटी बॉडी को वैज्ञानिक ए0डी01 बता रहे हैं। इंसानों पर

क्लीनिकल ट्रायल प्रारंभ करने के लिए सरकार से अनुमति मांगी गयी है। अनुमति प्राप्त होने

के बाद ही यह परीक्षण प्रारंभ किया जाएगा।

इस सरकारी संस्था के वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के फैलने के दौरान अनेक कोरोना मरीजों

के खून के नमूने हासिल किये थे। इनमें से सभी के बी सेल का परीक्षण किया गया था। जांच के

दायरे में आये अनेक रोगी कोरोना से पूरी तरह स्वस्थ भी हो चुके थे। इसी परीक्षण के आधार

पर शरीर के खून में मौजूद कोरोना प्रतिरोधकों की एक एक कर पहचान की गयी है। खून में

मौजूद रहने वाले इस बी सेल में ही वह एंटीबॉडी मौजूद होता है तो कोरोना वायरस के हमले को

विफल करता है। जब यह प्रतिरोधक अधिक शक्तिशाली हो जाता है तो कोरोना वायरस बिना

कोई नुकसान पहुंचाये ही खत्म हो जाता है।

सिंगापुर के शोध में खून के नमूनों की जांच हुई

इस परीक्षण पर काम प्रारंभ होने के बाद सिंगापुर के शोध वैज्ञानिकों दो ऐसे प्रतिरोधकों की

सबसे पहले पहचान कर ली थी। खून का नमूना हासिल होने के एक माह के भीतर ही यह काम

पूरा कर लिया गया था। खून के यह नमूने उसे सिंगापुर के नेशनल सेंटर फॉर इंफेक्शन

डिजीसेज तथा सिंगापुर के अस्पताल से हासिल हुए थे। दोनों ही केंद्रों के पास कोरोना पीड़ित

रोगियों के खून के नमूने परीक्षण हेतु हासिल किये गये थे। इसके बाद क्रमवार तरीके से तीन

अन्य एंटीबॉडी की पहचान की गयी जो कोरोना वायरस का असर खत्म करने की क्षमता रखते

हैं। मार्च से अब तक के शोध परीक्षण के माध्यम से सिंगापुर के शोध वैज्ञानिकों ने अब जाकर

इन पांच एंटीबॉडी को अलग करने में सफलता पायी है। परीक्षण के दौरान जीवित और सक्रित

वायरस के साथ खून के बी सेल की प्रतिक्रिया को लगातार देखा परखा गया था। इसी परीक्षण

के माध्यम से यह बात सामने आयी है कि जहां ऐसे पांच प्रतिरोधक मौजूद थे, वहां वायरस का

हमला अपने आप ही कमजोर होता चला गया था। इस जांच विधि को भी डीएसओ और

सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के यंग लू स्कूल ऑफ मेडिसीन एंड लाइफ साइंसेज

इंस्टिट्यूट द्वारा मिलकर तैयार किया है। हर तरीके से जांच लेने के बाद ही यह माना गया है

कि शरीर में मौजूद रहने वाले यह पांच प्रतिरोधक कोरोना के हमले को विफल कर देते हैं। इनमें

वह गुण मौजूद है जो वायरस को शरीर के अंदर मौजूद प्रोटिन के बचाव आवरण के अंदर से

शरीर को नुकसान पहुंचाने का मौका नहीं देता है। शोध वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि पूरी

दुनिया में यह वायरस फैल जाने की वजह से वायरस के स्वरुप में भी सामान्य वैज्ञानिक

प्रक्रिया के तहत बदलाव हो रहे हैं।

अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी में जुटा है दल

इस शोध दल के नेता  डॉ कनरॉड चान ने कहा कि अनुसंधान का यह दौर अब समाप्त हो चुका

है। अब इस पूरे शोध के आंकड़ों को क्लीनिकल ट्रायल के पहले की तैयारियों में विश्लेषित किया

जा रहा है। ताकि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ दुनिया के अन्य

वैज्ञानिकों तक पहुंचायी जा सके। इसका मकसद पूरी दुनिया  इससे बचाव के लिए चल रहे

तमाम अनुसंधान केंद्रों को उनकी खोज और निष्कर्षों के बारे में तुरंत अवगत कराना है। उन्होंने

कहा कि अनुमति हासिल होने के बाद इंसानों पर अगर क्लीनिकल ट्रायल कामयाब रहता है तो

यह निश्चित तौर पर पूरी दुनिया के लिए एक बहुत अच्छी बात होगी।


 

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