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सिंधू और सायना पर भारत की पदक उम्मीदों का दारोमदार




बासेल: सिंधु और सायना के भरोसे ही विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत की दावेदारी टिकी हुई है।

भारतीय बैडमिंटन की दो क्वीन पीवी सिंधू और सायना नेहवाल पर सोमवार से यहां शुरू हो रही

विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में एक बार फिर देश की पदक उम्मीदों का दारोमदार रहेगा।

दोनों को ही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अपने पहले खिताब की तलाश है और उनका सेमीफाइनल में मुकाबला हो सकता है।

ओलंपिक रजत विजेता सिंधू ने इस टूर्नामेंट में 2013 और 2014 में कांस्य पदक जीते थे

जबकि 2017 और 2018 में उन्होंने रजत पदक जीते थे जबकि सायना 2015 में रजत पदक और 2017 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

टूर्नामेंट में क्वार्टरफाइनल तक की बाधाएं पार करने पर दोनों भारतीय खिलाड़ियों का सेमीफाइनल में मुकाबला हो सकता है।

लेकिन सेमीफाइनल से पहले सिंधू के सामने क्वार्टरफाइनल में पूर्व नंबर एक और

दूसरी वरीयता प्राप्त चीनी ताइपे की ताई जूयिंग की सबसे बड़ी बाधा रहेगी।हालांकि

सिंधू को इस बात से राहत मिलेगी कि

उनकी प्रबल प्रतिद्वंद्वी स्पेन की कैरोलिना मारिन चोट के कारण इस टूर्नामेंट से हट गयी हैं।

दोनों भारतीय खिलाड़यिों को पहले दौर में बाई मिली है।

दूसरे दौर में सिंधू का मुकाबला चीनी ताइपे की पाई यू पो या बुल्गारिया की लिंडा जेचिरी के बीच

मुकाबले की विजेता से होगा। तीसरे दौर में सिंधू का सामना नौंवी वरीय अमेरिका की बेईवेई झांग से हो सकता है।

सायना का दूसरे दौर स्विट्जरलैंड की सबरीना जाकेट और हॉलैंड की

सोराया डि विश्च इजबर्गन के बीच होने वाले मैच की विजेता से मुकाबला होगा।

तीसरे दौर में सायना का मुकाबला 12वीं सीड डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट से हो सकता है।

सिंधू इस साल बेशक अब तक कोई खिताब न जीत सकी हों लेकिन

वह इस चैंपियनशिप में पदक हैट्रिक बनाने के इरादे से उतरेंगी।

सिंधू ने विश्व चैंपियनशिप की तैयारी के लिये हाल में थाईलैंड ओपन से अपना नाम वापिस ले लिया था।

सिंधू को विश्व चैंपियनशिप में पांचवीं वरीयता दी गयी थी

इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में चार बार की पदक विजेता हैं।

ओलंपिक रजत विजेता सिंधू ने इस टूर्नामेंट में 2013 और 2014 में कांस्य पदक जीते थे

जबकि 2017 और 2018 में उन्होंने रजत पदक जीते थे।

सिंधू पिछले वर्ष के आखिर में वर्ल्ड टूर फाइनल्स में खिताब जीतने के बाद अपने पहले खिताब की तलाश में है।

वह गत माह इंडोनेशिया ओपन के फाइनल में पहुंची थीं

लेकिन उन्हें जापान की अकाने यामागुची से हार का सामना करना पड़ा था।

इसके ठीक बाद वह जापान ओपन के क्वार्टरफाइनल में यामागुची से ही हारी थीं।

चैंपियनशिप में भारत को सिंधू के अलावा सायना नेहवाल से भी उम्मीदें रहेंगी।

हालांकि सायना थाईलैंड ओपन के दूसरे राउंड में हार गयी थीं।

सायना 2015 में रजत पदक और 2017 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।सिंधू और सायना पर भारत की पदक उम्मीदों का दारोमदार

सायना को टूर्नामेंट में आठवीं वरीयता दी गयी है।

पुरूष वर्ग में किदाम्बी श्रीकांत को सातवीं, समीर वर्मा को 10वीं और बी साईं प्रणीत को 16वीं वरीयता दी गयी है।

प्रणीत हाल में जापान ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंचे थे। पुरूष वर्ग में एच एस प्रणय की भी चुनौती रहेगी।

भारत को पुरूष एकल वर्ग में प्रकाश पादुकोण के 1983 में कांस्य पदक जीतने के बाद से पहले पदक की तलाश है।

टूर्नामेंट में पहले दिन श्रीकांत का मुकाबला आयरलैंड के नहाट एनगुएन से, समीर का

सिंगापुर के लोह कीन यू से, प्रणीत का कनाडा के जैसन एंथनी हो-श्यू से और प्रणय का फिनलैंड के एतू हीनो से होगा।

पुरूष युगल में भारत की उम्मीदें थाईलैंड ओपन मे खिताब जीतकर इतिहास बनाने वाली

सात्विकसैराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी रहेगी जिन्हें टूर्नामेंट में 15वीं वरीयता मिली है।

पुरूष युगल में मनु अत्री और बी सुमित रेड्डी, एम आर अर्जुन और रामचंद्रन श्लोक तथा अरूण जार्ज और संयम शुक्ला भी अपनी चुनौती पेश करेंगे।

महिला युगल में जे मेघना और पूर्विशा एस राम, अश्विनी पोनप्पा और एन सिक्की रेड्डी तथा पूजा डांडू और संजना संतोष अपनी चुनौती रखेंगे।

भारत ने महिला युगल में एकमात्र बार कांस्य पदक 2011 में जीता था

और तब यह पदक ज्वाला गुट्टा तथा अश्विनी पोनप्पा ने दिलाया था।

मिश्रित युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और सिक्की रेड्डी तथा सात्विकसैराज और पोनप्पा उतरेंगे।

यह विश्व चैंपियनशिप का 25वां संस्करण है। इसका आयोजन पहली बार 1977 में स्वीडन के माल्मो में हुआ था।

यह 1995 के बाद पहली बार स्विटजरलैंड लौट रहा है। तब इसका आयोजन लुसाने में हुआ था।

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