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चिदांवरम की गिरफ्तारी से मिलते संकेत




चिदांवरम को अंततः कल रात गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी बहुत ही नाटकीय अंदाज में हुई।

उसके पहले उन्होंने बड़े शान से कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया था।

लेकिन इन तमाम घटनाक्रमों के बीच अब यह व्यवस्था कायम होती जा रही है कि अब देश के नेता भी अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों में जेल जाने लगे हैं। वरना इस मुद्दे पर भारतीय न्याय व्यवस्था हर बार संदेह के कटघरे में खड़ी रहती है।

पहले भी कई अवसरों पर नेताओं पर मुकदमे हुए हैं, लोग जेल भी गये हैं।

लेकिन आम तौर पर यह धारणा बनी हुई है कि देश के बड़े नेताओं का देश की वर्तमान न्याय व्यवस्था कुछ नहीं बिगाड़ पाती है।

जो कुछ लोग न्यायिक हिरासत अथवा सजायाफ्ता होकर जेल चले भी जाते हैं, उनकी तुरंत ही तबियत बिगड़ जाती है।

फिर ऐसे लोग बाहर आने तक अस्पतालों में आराम फरमाते रहते हैं। इसस न्याय व्यवस्था और प्रणाली पर आम जनता का विश्वास कम होता गया है।

रहस्यमय तरीके से गायब हो जाने के 27 घंटे बाद देश के पूर्व वित्त और गृह मंत्री

चिदांवरम देश के सामने अपनी तरफ से सफाई देने के लिए आये।

उन्होंने कांग्रेस दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि वो 24 घंटे कहां थे।

चिदंबरम ने बताया कि वो बुधवार रात से दस्तावेज तैयार कर रहे थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चिदंबरम सीधे अपने घर गए, जहां से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी से पहले कांग्रेस दफ्तर में मीडिया को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि

पिछले 24 घंटे में बहुत भ्रम फैलाया गया। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि मामले में

सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल नहीं की है।

मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ कोई चार्जशीट नहीं है।

मुझे और मेरे बेटे कार्ति को फंसाया गया है। किसी भी एफआईआर में मेरा नाम नहीं है।

आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व गृहमंत्री पी। चिदंबरम को सीबीआई और ईडी की टीम तलाश रही थी।

मंगलवार शाम से पी चिदंबरम पर आरोप लगे कि वे गायब हो गए हैं।

गायब होने से पहले उन्होंने अपने ड्राइवर और क्लर्क को बीच रास्ते में उतार दिया था।

इसके बाद अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया था। मंगलवार से बुधवार तक पी। चिदंबरम को तलाश रही जांच एजेंसियों ने सभी करीबियों के घर की तलाशी ली थी।

दिल्ली-एनसीआर के एक दर्जन से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई,

लेकिन चिदंबरम को जांच एजेंसियां तलाश नहीं पाईं।

इसके बाद बुधवार शाम चिदंबरम खुद सामने आए और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

वैसे इस नाटकीय घटनाक्रम का अंतिम दृश्य भी नाटकीय ही रहा। जिस भवन का उदघाटन समारोह में

खुद चिदांवरम बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थे ने किया था, बीती रात हिरासत में वह उसी भवन में रहे।

लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय के नये भवन का उदघाटन हुआ था तब वह गृह मंत्री थे।

अब गिरफ्तारी होने के बाद जाहिर तौर पर सर्वोच्च न्यायालय में उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई नहीं होगी।

इसलिए सामान्य परिस्थितियों में अगर सीबीआई और ईडी की मांग पर उन्हें दोनों विभागों के

रिमांड पर भेजा जाता है तो उनके लिए परेशानी हो सकती है।

मामला 350 करोड़ की गड़बड़ी का है। इसी बीच सोशल मीडिया पर तेजी से पी चिदांवरम की देश विदेश में फैली संपत्ति के विवरण भी सार्वजिनक किये जाने लगे हैं।

दरअसल यह संपत्ति वाकई उनकी है अथवा नहीं, इसका पुष्टि नहीं होने के बाद भी

यह धारणा बनायी जा रही है कि उन्होंने देश का धन लूटकर देश विदेश में बेशूमार दौलत कमायी है।

लेकिन बड़े नेताओं के मामले में अब तक सभी जांच एजेंसियों का रवैया एक जैसा ही नजर आता है।

राजनीतिक प्रभाव की वजह से एजेंसियां अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं कर पाती हैं।

लालू प्रसाद को सजा होने के बाद जो माहौल बना था,वह फिर से धीरे धीरे खत्म होने लगा था।

अब चिदांवरम जैसे कद्दावर नेता की गिरफ्तारी से कमसे कम यह भरोसा बढ़ा है कि भारतीय कानून के दायरे में छोटा बड़ा हर कोई बराबर है।

अन्यथा यही धारणा दृढ़ रही है कि देश के सारे कानून पूरी कड़ाई के साथ सिर्फ देश की गरीब जनता पर ही लागू होते हैं।

चिदांवरम ने वाकई गड़बड़ी की है अथवा नहीं, यह कोर्ट को तय करना है।

लेकिन आम जनता ऐसे मुद्दों पर यह अवश्य तय कर सकती है कि देश में राजनीति के नाम पर इस किस्म के गोरखधंधे को होते ही हैं।

इसलिए अब राजनीति में इस किस्म की कमाई की सफाई से ही व्यवस्था ठीक हो सकती है।

वरना नीरव मोदी और विजय माल्या का प्रकरण आगे भी चलता रहेगा।

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