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शुभेंदु अधिकारी की बैठक से गायब रहे भाजपा के 24 विधायक

  • आतंरिक गुटबाजी से टूट रहा है भाजपा संगठन का ढांचा

  • राज्यपाल से मिलने गये थे भाजपा के विधायक

  • तीस विधायकों के घर वापसी की चर्चा जोरों पर

  • पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर उपजा है संकट

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलायी गयी बैठक में भाजपा के 74 में से 24 विधायक

अनुपस्थित रहे। बैठक में जो विधायक उपस्थित भी हुए थे, उनमें से कई के बारे में यह

सर्वविदित हैं कि वे किसी अन्य नेता की तुलना में मुकुल राय के अधिक करीबी हैं। इस

स्थिति में स्पष्ट हो गया है कि अमित शाह की पसंद शुभेंदु अधिकारी बहुत अधिक दिनों

तक संगठन को अपने बलबूते पर नहीं संभाल पायेंगे। वैसे इस दौरान पार्टी के प्रदेश

अध्यक्ष दिलीप घोष भी उनसे दूरी बनाकर ही चल रहे हैं। अनेक विधायकों के साथ नहीं

आने के बाद भी शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार की शाम को राज्यपाल जगदीप धनखड़ से

भेंट की। इसमें बंगाल के मुद्दे पर ही चर्चा की गयी, ऐसा बताया गया है।

24 विधायकों के अनुपस्थिति रहने की वजह से बंगाल भाजपा के अंदर भी यह आशंका

चर्चा में है कि शीघ्र ही एक और बड़ा घड़ा भाजपा से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस में

शामिल हो सकता है। दूसरी तरफ यह सूचना भी फैल रही है कि किन्हीं कारणों से टीएमसी

में जगह नहीं पाने वाले चुपके से कांग्रेस का दरवाजा भी खटखटा रहे हैं। इससे यह भी

स्पष्ट हो गया है कि अधिकांश विधायक शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व को स्वीकार करने के

लिए तैयार नहीं है। नंदीग्राम के चुनाव में ममता बनर्जी को पराजित कर खुद को हैवीवेट

नेता साबित करने वाले शुभेंदु अधिकारी अब बाद के कालखंड में निरंतर कमजोर साबित

हो रहे हैं। पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखने वालों का मानना है कि अगर पार्टी शुभेंदु

अधिकारी के स्थान पर मुकुल राय को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाती तो स्थिति

दूसरी हो सकती थी क्योंकि मुकुल राय राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं।

शुभेंदु अधिकारी को मोदी की बैठक में बुलाने से भी कई नाराज

यास तूफान के बाद प्रधानमंत्री के सर्वेक्षण के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के साथ

श्री मोदी की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को भी बुलाये जाने को लेकर ममता बनर्जी के साथ

साथ भाजपा के विधायक भी नाराज हुए हैं। उनका तर्क है कि जब एक विधायक को

बुलाया गया था तो उस तूफान प्रभावित इलाके के अन्य विधायकों से भी प्रधानमंत्री को

बात करनी चाहिए थी। इसके पहले ही यह बात चर्चा मे आ गयी थी कि टीएमसी में वापस

लौटने के बाद खुद मुकुल राय ने अनेक विधायकों को फोन कर तृणमूल कांग्रेस में लौट

आने की बात कही थी। चर्चा के मुताबिक तीस विधायकों ने मुकुल राय के संपर्क में होना

स्वीकार भी किया है। पार्टी छोड़कर भाजपा में गये कई अन्य नेता भी पहले से ही टीएमसी

में वापस लौटने की दरखास्त दे चुके हैं। अब शुभेंदु की बैठक में विधायकों की अनुपस्थिति

से यह भी स्पष्ट हो गया है कि बंगाल भाजपा में शुभेंदु का नेतृत्व ही अब संकट का बड़ा

कारण बन चुका है।

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