शेख हसीना ने खारिज किया संसद भंग कर चुनाव टालने का प्रस्ताव

शेख हसीना ने खारिज किया संसद भंग कर चुनाव टालने का प्रस्ताव
  • समझौता नहीं होने पर आंदोलन की राह पर बीएनपी गठबंधन

रफीकुल इस्लाम



ढाकाः शेख हसीना ने बांग्लादेश में चुनाव टालने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी इस गतिरोध को समाप्त नहीं किया जा सका है।

बीएनपी गठबंधन ने सरकार के बदले एक दस सदस्यीय सलाहकार मंडल गठित कर उसकी देखरेख में अगले तीन महीनों के भीतर चुनाव कराने का प्रस्ताव सरकार को दिया था।

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है। इससे दूसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गयी है।

इसके बाद बीएनपी गठबंधन ने पूरे देश में फिर से आंदोलन करने का आह्वान किया है।

वैसे विपक्षी गठबंधन के सात सूत्री मांगों में से कुछ को स्वीकार कर लिया गया है।

यह जानकारी सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता एवं देश के सड़क परिवहन मंत्री ओवायदुल कादिर ने दी है।

कल यहां आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी।

सत्तारूढ़ अवामी लीग ने विरोधियों के चुनाव टालने के प्रस्ताव से इंकार कर दिया है।

दूसरी तरफ कल की बैठक में भाग लेने के बाद लौटे बीएनपी गठबंधन के प्रवक्ता और महासचिव मिर्चा फखरुल इस्लाम ने कहा कि अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में वे आंदोलन की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

यह प्रेस कांफ्रेंस डॉ कमाल हसन के आवास पर आयोजित की गयी थी।

बीएनपी गठबंधन ने किया आंदोलन का एलान

उन्होंने बताया कि शुक्रवार को इसकी शुरुआत राजशाही के सम्मेलन से होगी।

उनका दावा है कि जनता के माध्यम से वह सरकार को अपनी मांगों को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर देंगे।

इस गुट का दावा है कि वे भी चाहते हैं कि देश में एक स्थिर सरकार रहे और इस अनिश्चय की स्थिति समाप्त हो।

इसलिए उसकी कोशिश भी जारी रहेगी। इस पर अंतिम फैसला तो सरकार को ही करना है।

इस बीच यह जानकारी दी गयी है कि इन तमाम बातों को लेकर प्रधानमंत्री शेख हसीना खुद भी पत्रकारों से मिलेंगे।

सरकार की तरफ से बताया गया है कि संसद की समयावधि समाप्त होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने की वाध्यता है।

इसलिए उसे बदलने के लिए कामचलाऊ सलाहकार मंडली बनाकर उसकी देख-रेख में चुनाव कराने का कोई औचित्य ही नहीं है।

शेख हसीना ने कहा है चुनाव में जो जीतेगा सरकार उसकी बनेगी

प्रधानमंत्री ने विरोधी दलों से साफ कर दिया है कि संविधान के मुताबिक उन्हें भी चुनाव में भाग लेना चाहिए।

चुनाव में जो दल अथवा गठबंधन जीतेगा, सरकार उसकी बनेगी।

इसके अलावा चुनाव की घोषणा के दौरान सामान्य जिन परंपराओं का पालन किया जाता है, उनपर अमल किया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के मौके पर सेना तैनात रहेगी पर सेना को कार्यपालिका के अधिकार नहीं दिये जाएंगे।

जरूरत के मुताबिक सेना की तैनाती चुनाव आयोग के निर्देश पर होगी।

इसके अलावा बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया के रिहा होने के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि

यह दरअसल अदालत का मसला है।

जेल में बंद इन नेताओं ने जमानत की अर्जी दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर अदालत उनकी जमानत मंजूर कर लेती है तो इसमें सरकार को कोई आपत्ति भी नहीं है।

सत्तारूढ़ अवामी लीग के नेताओं के साथ इस बात-चीत में

बीएनपी गठबंधन के बीस नेताओं के एक शिष्टमंडल ने भाग लिया था।

दूसरी तरफ अवामी लीग के पक्ष में 14 दलों का गठबंधन है।



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