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सोनामुड़ा से होकर जल परिवहन का ट्रायल रन सफल रहा

  • कई स्थानों पर बड़े जहाजों के गुजरने की दिक्कत

  • जलमार्ग पर कुछ नीचे पुलों को भी बदलना आवश्यक

  • दिक्कतों को दूर करने के बाद बड़े जहाज भी चल सकेंगे

अमीनूल हक

ढाकाः सोनामुड़ा से होकर वह ट्रायल रन की नाव सफलतापूर्वक लौट आयी, जिसे रवाना

किया गया था। दाउदकांदी सोनामुड़ा जल मार्ग पर नौ परिवहन का ट्रायल रन गुरुवार को

प्रारंभ हुआ था। वह शनिवार को अपनी यात्रा पूरी कर लौट आया। इस ट्रायल रन के पूरा

होने के बाद इस जलमार्ग की वर्तमान स्थिति और सुधार की गुंजाइश पर पूरा ध्यान दिया

गया है। ट्रायल रन पूरा होने के बाद यह बताया गया कि इस जल मार्ग के प्रारंभ होने से

बांग्लादेश को लिए भी पूर्वोत्तर भारत के रास्ते निर्यात के नये अवसर पैदा होंगे। दूसरी

तरफ भारत को भी इस रास्ते से सामान पहुंचाने से उसकी परिवहन लागत भी बहुत कम

होगी। यानी यह जल मार्ग दोनों देशों के लिए फायदे का अवसर साबित होगा। इस

प्रस्तावित जल मार्ग पर नाव भेजने के बाद यह पाया गया है कि कई स्थानों पर अभी

सुधार की आवश्यकता है। मसलन कुछेक स्थानों पर पानी की गहराई बहुत कम है।

इसलिए ऐसे इलाकों से गुजरते वक्त बड़े पानी के जहाज फंस सकते हैं। कुछ स्थानो पर

जल मार्ग के ऊपर से जो सड़क गुजरे हैं, उनकी पुल की ऊंचाई बड़े जहाजों के लिहाज से

कम है। इसके अलावा इस मार्ग के कई एक स्थानों पर नदी के तट के टूटने जैसी

परिस्थितियां हैं, उन स्थानों पर भी जल परिवहन कभी भी बाधित हो सकता है।

सोनामुड़ा तक बड़े जहाज पहुंचान में कुछ बाधाएं हैं

इसलिए पानी के बड़े जहाजों से सोनामुड़ा तक माल पहुंचाने के लिए सबसे पहले इन

परेशानियों को दूर करना पड़ेगा। जिस नाव को दाउदकांदी से सोनामुड़ा भेजा गया था वह

आकार में छोटा है। लेकिन नियमित जल मार्ग चालू होने पर इससे काफी बड़े जहाज इस

मार्ग से आना जाना करेंगे। कुछेक स्थानों पर दो बड़े जहाजों के एक साथ गुजरने पर भी

दिक्कत आ सकती है। इन सारी दिक्कतों को दूर कैसे किया जाए, उस पर काम चालू हो

गया है।

यह बता देना प्रासंगिक है कि जब इस रास्ते की पहली जांच हो रही थी जो बतौर पत्रकार

सिर्फ राष्ट्रीय खबर का प्रतिनिधि ही उस उच्च स्तरीय दल के साथ मौजूद था। भारत के

पूर्वोत्तर के राज्यों तक दूसरे इलाकों से सामान पहुंचाने का समय और खर्च कम करने के

मकसद से इस नौ रुट को चालू किया जा रहा है। इससे दिल्ली अथवा दक्षिण भारत से इन

राज्यों तक बांग्लादेश के रास्ते जलपरिवहन का इस्तेमाल किया जाना है। समुद्र के रास्ते

यहां तक माल पहुंचने के बाद यहां की गहरी नदियों पर मालवाहक नावों की मदद से यह

माल पूर्वोत्तर भारत के राज्यों तक भेजा जाना भारत के लिए भी फायदेमंद होगा। वर्तमान

में भारत और बांग्लादेश के बीच हवाई और रेल सेवा के अलावा समुद्र के रास्ते भी माल की

ढुलाई होती है लेकिन नदियों के सहारे नौ परिवहन को और बेहतर और कम खर्चीला आंका

है।

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