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सरमा ही असम भाजपा के अगले सरदार होंगे पार्टी का एलान

  • बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के मुखिया हिमंत

  • पूर्वोत्तर में चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध हैं वह

  • इस बार पहले से ही उनका पलड़ा भारी था

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : सरमा ही अब असम के नये सरदार होंगे। इसकी भनक तो पहले से मिल रही

थी। अब भाजपा की तरफ से इसका औपचारिक एलान भी कर दिया गया। असम में

मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस खत्म हो गया है। असम में भारतीय जनता पार्टी की दोबारा

वापसी के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम से भी पर्दा उठ गया है।

वीडियो में देखें कैसे हुआ नाम का एलान

आज भाजपा नेता हेमंत बिस्वा सरमा को असम विधायक दल का नेता चुना गया है।

हिमंत बिस्व शर्मा अब असम के नए मुख्यमंत्री होंगे। नए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने

शाम चार बजे राज्यपाल जगदीश मुखी से मुलाकात कर राज्य में सरकार बनाने का दावा

पेश किया है। हेमंत बिस्वा कल श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी महासचिव अरुण सिंह

केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रहें। बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह

तोमर ने कहा, “सर्वसम्मति से असम राज्य बीजेपी विधानमंडल के नेता के रूप में हिमंत

बिस्व शर्मा को विधायक दल का नेता घोषित करता हूं। असम का पर्यवेक्षक बनाकर भेजे

गए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी देते

हुए बताया कि सरमा कल यानी सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सरमा के

नाम का प्रस्ताव रखा और भाजपा के प्रदेश पार्टी अध्यक्ष रंजीत कुमार दास और हाफलांग

से नव निर्वाचित विधायक नंदिता गार्लोसा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। चूंकि और

किसी के नाम का प्रस्ताव नहीं रखा गया तो ‘सरमा को भाजपा विधायक दल का नेता

सर्वसम्मति से चुन लिया गया है। विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले सर्बानंद

सोनोवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

सरमा ही अधिक विधायकों की पसंद से इस बार

बीजेपी आलाकमान ने सर्बानंद सोनावाल और हिमंत बिस्व शर्मा को कल दिल्ली बुलाया

था। दोनों नेताओं की दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित

शाह से मुलाकात हुई थी। बीजेपी ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार की

घोषणा नहीं की थी। उसने 2016 विधानसभा चुनाव में सोनोवाल को इस पद के

उम्मीदवार के रूप में पेश किया था और चुनाव जीता था। इसी के साथ पूर्वोत्तर में भगवा

दल की पहली सरकार गठित हुई थी। पूर्वोत्तर में कांग्रेस मुक्त भारत के बीजेपी के मिशन

का नेतृत्व करते हुए हिमंत बिस्व सरमा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बीजेपी के आधार का विस्तार

करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने को साबित किया। पूर्वोत्तर में कुछ सालों

पहले तक बीजेपी की कोई मौजूदगी नहीं थी, लेकिन अब हिमंत बिस्व सरमा की वजह से

यहां कई राज्यों में बीजेपी की सरकार है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में असम में कोविड -19

महामारी को संभालने से लेकर बीजेपी को सीएए आंदोलन से निकालने वाले हिमंत बिस्व

सरमा अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। ‘पूर्वोत्तर के चाणक्य’, यूं बने बीजेपी के

‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के मुखिया है। इस बार,पार्टी कहती रही कि वह चुनाव के बाद फैसला

करेगी कि असम का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हिमंत बिस्वा सरमा के राजनीतिक

करियर की शुरुआत साल 1980 से हुई थी। उस समय वो छठी कक्षा में थे। उन्होंने ऑल

असम स्टूडेंट यूनियन ज्वाइन की। इसके बाद उन्हें गुवाहाटी यूनिट का जनरल सेक्रेटरी

बना दिया गया था। 1990 के दशक में वो कांग्रेस में शामिल हुए और पहली बार 2001 में

जालुकबारी सीट से चुनाव लड़ा।

लगातार पांचवी बार चुनाव जीते हैं हिमंत

अब वो लगातार पांचवीं बार जालुकबारी विधानसभा सीट से विधायक चुने जा रहे हैं।

2015 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी। 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के

लोकसभा चुनाव में हिमंत बिस्वा सरमा की अहम भूमिक रही। 2016 में असम जीतने के

बाद उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का अध्यक्ष बना दिया गया था। जिसके बाद

उन्होंने पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने का बड़ा काम किया था।

बीजेपी ने 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 60 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उसकी

गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद से नौ और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ने छह

सीटें जीतीं। सर्बानंद सोनोवाल ने कांग्रेस नेता राजिब लोचन पेगू को 43,192 मतों के अंतर

से हराकर माजुली में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी नेता

हिमंत बिस्व सरमा ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रोमेन चंद्र बोरठाकुर को 1,01,911

मतों के अंतर से हराकर जालुकबारी सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। सोनोवाल और

सरमा के अलावा 13 अन्य बीजेपी मंत्री आसानी से अपनी सीट बरकरार रखने में कामयाब

रहे।

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