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शरद पवार के ईर्द गिर्द घूमने लगी महाराष्ट्र की राजनीति

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  • शिवसेना नेता मिलने उनके घर पहुंचे
  • 50-50 की बात पर जिच अब भी कायम
  • रातों रात राजनीति के केंद्र में आये पवार
  • एनसीपी की बैठक में विपक्ष में बैठने का फैसला
रासबिहारी

नईदिल्लीः शरद पवार फिर से महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गये हैं।

चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के तुरंत बाद श्री पवार ने

यह स्पष्ट कर दिया था कि उनके पास जनादेश नहीं है इसलिए वह विपक्ष

में रहेंगे। इस बयान के साथ ही उन्होंने प्रारंभिक चरण में भी स्पष्ट कर दिया

था कि शिवसेना के साथ एनसीपी का वैचारिक मतभेद है।

इसलिए सरकार बनाने के लिए एनसीपी ऐसी कोई तोड़-जोड़ का हिस्सा

भी नहीं बनेगी। इधर भाजपा और शिवसेना के बीच 50-50 के फार्मूले पर

विवाद होने के बाद अंततः शिवसेना को फिर से शरद पवार के दरवाजे पर

जाना पड़ा है। शिवसेना द्वारा ढाई साल शिवसेना के मुख्यमंत्री की मांग

को भाजपा ने अस्वीकार कर दिया है। उसके बाद से तेजी से महाराष्ट्र की

राजनीति करवटें ले रही हैं। अब पिछले 24 घंटे में हालत इतने बदल गये है

कि महाराष्ट्र की राजनीति के किंग मेकर के तौर पर शरद पवार उभरते

नजर आ रहे हैं। गुरुवार को शिवसेना के विधायक दल की बैठक के बाद

से राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलता जा रहा है।

एनसीपी की बैठक में विपक्ष में बैठने के जनादेश का सम्मान करने का

प्रस्ताव पारित किया गया है। दूसरी तरफ शरद पवार से मिलने शिवसेना

के कई नेता उनके घर पहुंचे हैं।

शरद पवार से मिले तो दूसरे खेमे में भी हलचल

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मीडिया को बताया था कि लोकसभा चुनाव से

पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

के साथ उद्धव ठाकरे की बातचीत में 50-50 के फॉर्मूले पर फैसला हुआ था।

ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद उसी फॉर्मूले का हिस्सा था। अब जब

भाजपा इस पर लिखित आश्वासन देगी तभी सरकार बनाने की दिशा

में आगे बढ़ा जाएगा। हालांकि, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

के यह साफ किया कि शिवसेना के साथ 50-50 फॉर्मूले (ढाई-ढाई साल

के लिए मुख्यमंत्री) पर कभी कोई बात नहीं हुई। जहां उनके इस बयान से

साथ शिवसेना की भाजपा के साथ होने वाली बैठक टाल दी।

इस बीच विभिन्न दलों के कई विधायकों ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री

देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और राज्य में भाजपा और शिवसेना के बीच

सरकार बनाने को लेकर चल रही खींचतान के बीच उनको समर्थन दिया।

उन विधायकों में जिन्होंने फडणवीस सरकार को सपोर्ट दिया- बीवीए के

क्षितिज ठाकुर (नालासोपारा), किसानों और मजदूरों की पार्टी के श्यामसुंदर

शिंदे (लोहा), जनसूर्य शक्ति के विनय कोरे, निर्दलीय विधायक रवि राणा

(बडनेरा), संजय शिंदे (करमाला), गीता जैन (मीरा भायंदर), महेश बाल्दी

(उरण), किशोर जोरगेवार (चंद्रपुर), विनोद अग्रवाल (गोंदिया), राजेंद्र राउत

(बरसी), प्रकाश अन्ना अघडे (इचलकरंजी) शामिल हैं।

भाजपा को समर्थन देने गुरुवार को यह सब विधायक देवेंद्र फडणवीस से

मिले, जिस दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें बेमौसम बारिश

के कारण फसलों को हुए नुकसान और किसानों की सहायता के लिए

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम शामिल थे।



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