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बंगाल के मैदान में अब शरद पवार की भी चुनावी चमक

  • अमित शाह को पछाड़ने ममता को दे रहे सलाह

  • यहां भी जीते तो सबसे कद्दावर नेता होंगे

  • यूपीए के अध्यक्ष बनने की दौड़ में आगे

  • जनवरी के पहले सप्ताह होगा दौरा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः बंगाल के मैदान में मराठा क्षत्रप शरद पवार भी सक्रिय होने जा रहे हैं। वैसे वह खुलकर

चुनाव प्रचार में भाग नहीं लेंगे लेकिन वह ममता बनर्जी की मदद करेंगे ताकि वहां भी अमित

शाह को चित किया जा सके। याद दिला दें कि महाराष्ट्र में भाजपा को पछाड़ने का असंभव सा

नजर आने वाला काम भी एनसीपी नेता शरद पवार की वजह से संभव हो पाया है। अब

अंदरखाने से इस बात की पुष्टि हो रही है कि अखिल भारतीय राजनीति में शरद पवार अपनी

सक्रियता बढ़ाने जा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में दखल देने के

मकसद से वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुमंत्र देना प्रारंभ कर दिया है।

पश्चिम बंगाल से यहां तक पहुंच रही सूचनाओं के मुताबिक अमित शाह की चालों से ममता

बनर्जी निश्चित तौर पर घिरी हुई नजर आ रही हैं। उनके कई पुराने सहयोगी संकट की घड़ी में

उन्हें छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे में शरद पवार ने अपने महाराष्ट्र के अनुभव के आधार पर वहां

तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल के मैदान में राजनीति के मोहरे बिछाने में मदद पहुंचाने वाले

हैं। दरअसल समझा जा रहा है कि यूपीए के नेता के तौर पर सोनिया गांधी के बदले उनका

नाम आगे आने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका का अधिक महत्व होगा।

शायद इसी वजह से खुद श्री पवार ने बंगाल की राजनीति में ममता की मदद करने की ठानी

है।

बंगाल के मैदान में जीते तो सबसे कद्दावर नेता 

सूत्रों की मानें तो अगले माह के पहले ही सप्ताह में श्री पवार कोलकाता जा सकते हैं। दोनों

दलों के चुनावी रणनीतिकार इसे अंतिम रुप प्रदान कर रहे हैं। दरअसल ममता की मदद के

पीछे एक वजह यह भी है कि दोनों ही नेता कांग्रेस छोड़कर अपना अपना संगठन बनाने वाले हैं

और दोनों ने अपने बलबूते पर अपनी जमीन खड़ी की है। लिहाजा ऐसे में महाराष्ट्र में भाजपा

को पछाड़ देने के बाद अगर पश्चिम बंगाल के मैदान में भी उनकी चाल कामयाब होती है तो

वह राष्ट्रीय फलक पर भाजपा विरोधी खेमा के सबसे कद्दावर नेता के तौर पर स्थापित हो

जाएंगे। चूंकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने माकपा के साथ चुनावी तालमेल कर लिया है,

इसलिए श्री पवार की रणनीति का लाभ शायद उन्हें नहीं मिल पायेगा। फिर भी यहां यह चर्चा

जोर पकड़ रही है कि बंगाल की राजनीति में अगर शरद पवार का सिक्का चल निकला तो

निश्चित तौर पर भाजपा के लिए वह एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएंगे।

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