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त्रिपुरा में भूख से मर गये सात ब्रू शरणार्थी, राजनीति गरमायी




  • शिविर में भूख से मर गये सात आदिवासी
  • राशन और पैसा देना बंद किया गया
  • 30 नवंबर तक शिविर बंद करने का फैसला
  • सूचना बाहर आते ही तेज हुई हलचल
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः त्रिपुरा में ब्रू शरणार्थियों के शिविर की स्थिति अत्यंत दयनीय हो

चुकी है। इन शिविरो से देर से मिली सूचनाओं के मुताबिक उत्तरी त्रिपुरा

जिला के इस शिविर में अब तक हाल के दिनों में सात लोगों के मारे जाने

की खबर आयी है। यह सभी लोग भूखमरी के शिकार हुए हैं।

सोमवार को यह सूचना आने के तुरंत बाद प्रशासनिक हलके में सनसनी

फैल गयी है। सरकारी स्तर पर इन मौतों को भूखमरी करार दिये जाने

का खंडन किया जा रहा है। इन शरणार्थियों की मौत भूख से होने का दावा

इन शिविरों से सीधे तौर पर जुड़े संगठनों का है। दावा किया जा रहा है

कि इसी एक ही परेशानी से अब भी तीन लोग अस्पतालों में भर्ती है,

जिसका ईलाज चल रहा है। वैसे इन मौतों की सूचना आने के बाद से

इलाके में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है। मिजोरम की सीमा पर

इस मुद्दे पर सड़क जाम जैसे आंदोलन भी हुए हैं।

मिजोरम तक पहुंची आंदोलन की आंच

शरणार्थी शिविरों में रहने वालों की मांग है कि उन्हें पहले की तरफ

मुफ्त राशन का इंतजाम जारी रखा जाना चाहिए। मिजोरम के ब्रू

आदिवासी के फोरम ने इस सूचना के बाद आरोप लगाया है कि इन

शरणार्थियों को जो सुविधाएं मिलती थी, उन्हें केंद्र सरकार के निर्देश

पर रोक दिया गया है। दरअसल इन शरणार्थियों वहां से अपने मूल आवास

में लौट जाने के निर्देश जारी किये गये थे। लेकिन वापसी के लिए

परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने की वजह से वे शिविरों से लौट नहीं

रहे हैं। दूसरी तरफ इसी वापसी के आदेश के बाद उनके राशन और आर्थिक

मदद की सुविधाएं रोक दी गयी है। इस शरणार्थी शिविर में मौजूद

एमबीडीपीएफ के महासचिव ब्रूनो मसा ने मोबाइल पर पत्रकारों को बताया

कि भूख से मरने वालों में एक चार माह का बच्चा भी है।

उसकी मौत आज सुबह हामसापाड़ा शिविर में हुई है।

उसे लेकर मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो चुकी है।

त्रिपुरा में वहां के एसडीओ ने जांच कराने की बात कही

इस सूचना के सार्वजनिक होने के बाद कंचनपुर के एसडीओ अभेदानंद वैद्य

ने कहा कि भूख से मौत के मामलो की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ी तो

इसकी विशेष जांच की जाएगी। दरअसल केंद्र सरकार ने त्रिपुरा के इन

शिविरों को बंद करने का फैसला पहले ही लिया था। इन शरणार्थियों को

मिजोरम में लौट जाना है। यह काम इसी महीने के अंत तक

पूरा किया जाना है।



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