fbpx Press "Enter" to skip to content

सीरम इंस्टिट्यूट ने वैक्सिन का उत्पादन प्रारंभ किया

  • कोडाजेनिक्स की वैक्सिन बनायी जा रही है

  • एक करोड़ डोज पहले चरण में तैयार होगी

  • नाक के स्प्रे के तौर पर इसे दिया जाएगा

  • वैक्सिन के प्रारंभिक परीक्षण सफल

रांचीः सीरम इंस्टिट्यूट ने अमेरिकी कंपनी की कोरोना वैक्सिन कोडाजेनिक्स के वैक्सिन

का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। प्रारंभिक परीक्षण में इस वैक्सिन के बेहतर परिणाम आने

की वजह से अगले चरण के परीक्षण के पहले ही इन्हें तैयार किया जा रहा है। ऐसा इसलिए

किया जा रहा है ताकि क्लीनिकल ट्रायल में पास होते ही इसका वितरण पूरी दुनिया में

प्रारंभ किया जा सके। वैसे यह बात उल्लेखनीय है कि कोरोना संकट की वजह से पूरी

दुनिया में भारत की दवा और वैक्सिन उत्पादन की क्षमता का अब डंका बज रहा है। इससे

पहले इस क्षेत्र में भारतीय क्षमता से अधिकांश देश परिचित भी नहीं थे। जहां तक सीरम

इंस्टिट्यूट की बात है तो यह दुनिया में सबसे अधिक वैक्सिन बनाने की क्षमता वाली

संस्थान है।

अमेरिकी कंपनी की घोषणा के मुताबिक जिस वैक्सिन को तैयार किया जा रहा है, वह

दरअसल नाक की वैक्सिन है। पशुओं पर हुए परीक्षण में इसके सार्थक परिणाम आने के

बाद ही आगे की सारी कार्रवाई की जा रही है। इस नैसल वैक्सिन की परियोजना में

अमेरिकी कंपनी एडजुवेंट कैपिटल और टॉप स्पिन पार्टनर्स ने पूंजी निवेश भी किया है।

इसके उत्पादन से जुड़े सभी पक्षकार अब तक के शोध परिणामों से संतुष्ट हैं और यह

उम्मीद कर रहे हैं कि क्लीनिकल ट्रायल में भी यह वैक्सिन सफल होगा। पुणे की सीरम

इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के कारखाने में जिस वैक्सिन का उत्पादन अभी चल रहा है वह

सीडीएक्स-005 नाम से परिचित है। जानवरों पर जब इसका परीक्षण किया गया था तो

उसके बेहतर परिणाम निकले हैं।

सीरम इंस्टिट्यूट बनायेगी कोडाजेनिक्स की वैक्सिन

कोडाजेनिक्स कंपनी के सीइओ जे रॉबर्ट कोलेमैन ने कहा कि जैसा काम चल रहा है, उससे

इसी साल के अंत तक दुनिया को यह वैक्सिन उपलब्ध करा पाना संभव होगा। ऐसा

इसलिए भी हो पायेगा क्योंकि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की उत्पादन क्षमता दुनिया

में सबसे अधिक है। कंपनी इस उत्पादन के जारी रहने के बीच ही ब्रिटेन में इसका प्रथम

क्लीनिकल ट्रायल प्रारंभ करने जा रहा है। जिस वैक्सिन के बारे में चर्चा की गयी है उसे

एक नाक के स्प्रे के जरिए नाक के अंदर दिया जाएगा। इस तरीके से दवा दिये जाने पर

वैक्सिन का तत्काल प्रभाव होता है, ऐसा माना गया है। दूसरी तरफ इस तरीके से दवा दिये

जाने पर व्यक्ति को भी अधिक परेशानी नहीं होती। वैक्सिन बनाने के तौर तरीकों के बारे

में जो जानकारी दी गयी है, उसके मुताबिक सार्स कोव 2 के वायरस के जिनोम संरचना का

अध्ययन कर इसे तैयार किया जा रहा है। इसके काम यानी इंसानी शरीर पर हमला करने

के तौर तरीकों को समझकर ही वैक्सिन बनाया गया है। यह वैक्सिन भी दरअसल उसी

वायरस के अनुरुप काम करता है लेकिन उसके अंदर का प्रतिरोधक मूल वायरस को

सक्रिय होने से रोक देता है। यह इंसानी शरीर के टी सेल को वायरस रोकने के लायक

बनाने के साथ साथ शरीर की आतंरिक प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ा देता है।

इससे संबंधित अनुमति पहले ही हासिल कर चुकी है कंपनी

इस कंपनी ने अपनी वैक्सिन के परीक्षण के लिए आवश्यक अनुमति पहले ही हासिल कर

ली है। भारत में भी उसे केंद्र सरकार ने परीक्षण की अनुमति दी है। सीरम इंस्टिट्यूट

इसका व्यापक पैमाने पर उत्पादन कर रहा है ताकि आगे के अनुसंधान का काम तेजी से

आगे बढ़ाया जा सके। इस काम में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि सफल साबित

होने पर पूरी दुनिया तक इसे कम से कम समय में पहुंचाया भी जा सके। कंपनी के लोग

और वैज्ञानिक मानते हैं कि एक बार सफल साबित होने के बाद उसे तत्काल पूरी दुनिया

तक पहुंचाना समय की मांग है।

वैसे इस नैसल वैक्सिन यानी नाक के रास्ते दिये जाने वाले वैक्सिन के बारे में भी

जानकारी दी गयी है। आम तौर पर इंजेक्शन के जरिए अथवा मुंह में दवा की बूंद

टपकाकर वैक्सिन देने के तौर तरीकों से हम परिचित है। इस वैक्सिन को नाक के उस

हिस्से तक पहुंचाया जाता है, जो वैक्सिन के छिपने का एक प्रमुख स्थान के तौर पर

पहचाना गया है। वहां से यह वैक्सिन अपनी तकनीक से उन स्थानों तक फैलता जाता है,

जहां जहां वायरस का संक्रमण हो सकता है। इस काम में इंजेक्शन जैसी परेशानी अथवा

दर्द भी किसी को नहीं होता। नाक के रास्ते से यह सांस लेने की प्रक्रिया के जरिए फेफड़े

तक तुरंत ही पहुंच जाता है।

इसके पहले हुए शोध में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसीन ने पाया है कि इस

वैक्सिन का एक डोज ही कारगर है। दूसरी तरफ इस विधि से दवा दिये जाने की वजह से

इंजेक्शन और सीरिंज का अतिरिक्त खर्च भी समाप्त हो जाएगा। इससे वैक्सिन देने की

कुल लागत भी अपेक्षाकृत कम होगी।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from महाराष्ट्रMore posts in महाराष्ट्र »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

One Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!