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लॉक डाउन की गंभीरता को समझना होगा यह अब मजाक नहीं है

अपडेटः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम आज दिये गये अपने संबोधन में इस

लॉक डाउन की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए इसे 21 दिनों तक प्रभावी बनाया है

लॉक डाउन की गंभीरता को अब भी नहीं समझने वालों को दंडित करने का समय है।

यह कठिन फैसला जिन इलाकों में लागू किया जा रहा है, वहां के लोगों को

इसकी गंभीरता को समझना होगा। कल रात ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्च स्तरीय

बैठक के बाद झारखंड में आगामी 31 मार्च तक लॉक डाउन करने का कठिन फैसला

लागू किया। इससे पहले जनता कर्फ्यू की अवधि समाप्त होने के बाद भी अति उत्साही

लोग सड़कों पर मंडराने निकल पड़े थे। कोरोना वायरस के प्रसार को देखते समझते हुए

अति बुद्धिमानियों को यह समझना और समझाना होगा कि इस लॉक डाउन का मतलब

चौक चौराहों पर एकत्रित होकर अड्डेबाजी करना नहीं है। आज भी लॉक डाउन की

स्थिति लागू होने के दौरान भी राजधानी रांची के अनेक इलाकों में लोग इसी अवस्था में

गप्पे लड़ाते नजर आये हैं। दरअसल यह सारी सावधानी इसलिए बरती जा रही है ताकि

लोग एक दूसरे से दूर रहे। इससे कोरोना के प्रसार को यथासंभव रोका जा सकता है।

हमने अपने अंदर भी कहीं से आये संक्रमण को दूसरों तक फैलाने का साधन नहीं बने,

इसके लिए भी दूसरों से अलग रहना जरूरी है। दूसरी तरफ बाहर से कौन कैसा संक्रमण

ले आया है, जो हम तक नहीं पहुंचे, इसके लिए भी लोगों से दूर रहना जरूरी है। इसी दूरी

को कायम रखकर कोरोना के बढ़ते चक्र को रोकने का ही साधारण सा तरीका है यह

लॉक डाउन। इस छोटी सी बात को भी अगर लोग नहीं समझ पा रहे हैं तो उनके लिए तो

अंततः वही उपाय कारगर है जो आम तौर पर असली कर्फ्यू के दौरान पुलिस अथवा

सुरक्षा बलों के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

लॉक डाउन की गंभीरता देश के लोगों के भले के लिए है

झारखंड में ऐसी स्थिति आ सकती है, इसकी आशंका तो पहले से ही व्यक्त की गयी

थी। विदेशों से तथा कोरोना प्रभावित इलाकों से आने वालों तथा उनके घरवालों ने इस

बारे में सावधानी नहीं बरती। जिनलोगों को खुद को भीड़ से दूर रखने का निर्देश दिया

गया था, उनमें से अनेक लोगों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। लेकिन चूंकि लॉक

डाउन का फैसला अब झारखंड में भी लागू कर दिया गया है। राज्य में अब तक कोरोना

पीड़ित किसी रोगी की पुष्टि नहीं होने के बाद भी भारतीय परिदृश्य को देखते हुए ऐसा

फैसला लिया गया है। यह प्रतिबंध आगामी 31 मार्च तक लागू रखने की जानकारी दी

गयी है। वैसे स्पष्ट है कि स्थिति की समीक्षा करने के बाद इसे आगे भी बढ़ाया जा

सकता है। इस बारे में लॉक डाउन का फैसला लागू करने संबंधी अधिसूचना सरकार की

तरफ से जारी कर दी गयी है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किन सेवाओं को

नियमित काम करने की छूट दी गयी है। इस लॉक डाउन के फैसले की प्रमुख बात यह

भी है कि तमाम सरकारी कार्यालयों को फिलहाल बंद रखने के आदेश के साथ साथ

कर्मचारियों को अपने घर से ही काम करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सरकार ने

यह स्पष्ट हिदायत दी है कि इस अवधि में किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपना

मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा इसलिए भी है ताकि आवश्यकता पड़ने

पर उन्हें तुरंत ही कार्यालय में उपस्थित भी होना है।

हेमंत सरकार ने सब कुछ बहुत साफ कहा है

सरकार के अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि इस दौरान पांच या उससे अधिक

लोगों का जमावड़ा अब प्रतिबंधित किया गया है। फिर भी आज अनेक इलाकों में लोग

पांच नहीं तो चार चार के समूह में अड्डेबाजी करते नजर आये हैं। इनमें से कौन वायरस

पीड़ित है अथवा किसे वायरस का हमला होना है, इसकी पहचान का कोई तरीका सामने

नहीं आने तक तो अगले 28 दिनों तक रोगी के लक्षण सामने आने की प्रतीक्षा करनी

होगी। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधान के तहत

कार्रवाई की जाएगी। लेकिन कुछ अराजक तत्व इस स्पष्ट निर्देश के बाद भी जिस

तरीके से आम जनजीवन को खतरे में डाल रहे हैं, वैसे लोगों के खिलाफ अब कड़ी

कार्रवाई करने की भी जरूरत है। साथ ही अपने आस पास के लोगों को भी यह समझाना

होगा कि जिंदा रहे तो गप्प लड़ाने के पर्याप्त अवसर आगे मिलते रहेंगे। अभी खुद को

आत्मानुशासन में रहते हुए भीड़ से खुद को और खुद से दूसरों को बचाये रखने की

राष्ट्रीय जिम्मेदारी सभी पर बराबर रुप से है। इसके बीच भी हमें यह याद रखना होगा

कि जरूरत के सामान उपलब्ध हों और ऐसे राष्ट्रीय संकट के मौके पर सामानों की

कालाबाजारी और आवश्यकता से अधिक का भंडारण एक राष्ट्रीय दोष है। हमें इस दोष

से भी बचकर रहना होगा। ताकि संकट की इस घड़ी में भी सभी को बराबर की सुविधा

और लाभ मिल सके। लॉक डाउन हरेक के भले के लिए है, इसकी गंभीरता को कम

करने वालों पर अब कार्रवाई करने का भी वक्त आ चुका है।


 

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