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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नौ बार के विधायक सदानंद सिंह से खास बात-चीत

  • एलान किया कि इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे

  • इस बार अपनी सीट पर पुत्र को लड़ाना चाहते हैं वह

  • नीतीश कुमार और लालू के बारे में कई जानकारी दी

  • सृजन घोटाले में शामिल हैं बड़े नेता यह जगजाहिर

दीपक नौरंगी

भागलपुरः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह इस बार कहलगांव से विधानसभा का

चुनाव नहीं लड़ेंगे। राष्ट्रीय खबर के साथ खास बात-चीत में उन्होंने इस बात का एलान कर

दिया।

वीडियो में देखिये उनका पूरा साक्षात्कार

जान लें कि कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से नौ बार विधायक रह चुके सदानंद सिंह चुनाव

जीतने के मामले में बिहार में अनोखा कीर्तिमान रखते हैं। पूरे बिहार में अब तक कोई भी

किसी भी विधानसभा क्षेत्र से इतनी अधिक बार विधायक नहीं रहा है। इसलिए चुनाव नहीं

लड़ने के एलान पर सवाल दर सवाल होना लाजिमी थी। उन सारे सवालों का शांत चित्त से

उत्तर देते हुए श्री सिंह ने कहा कि दरअसल अब उम्र का असर है। विधायक के तौर पर

जितनी सक्रियता की आवश्यकता होती है, वह अब नहीं रही। इसलिए वह नहीं चाहते हैं

कि जिस सक्रिय विधायक को कहलगांव की जनता अब तक देखती आयी है, उन

मतदाताओं को निराशा हो। लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपनी सीट पर अपने पुत्र शुभानंद

मुकेश को आगे लाना चाहते हैं। साथ ही उन्होंन स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते थे कि

उनका बेटा राजनीति में आये। लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उनका पुत्र

अंततः राजनीति में सक्रिय हुआ है। इसी वजह से वह चाहते हैं कि कहलगांव की सीट पर

उनके स्थान पर इस बार उनका पुत्र ही चुनाव लड़े। विधायक सदानंद सिंह सन 2002 से

2005 तक विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं। अपने राजनीतिक जीवन के बारे में उन्होंने

बताया कि वह पिछले 52 सालों से लगातार कांग्रेस पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। इस

लिहाज से यह माना जा सकता है कि वर्तमान में वह बिहार कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता

भी हैं। कहलगांव विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक रहना ही उनकी इस उपलब्धि

को प्रमाणित कर देता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पहली बार कई राज भी खोले

इसी बात चीत के क्रम में श्री सिंह ने पहली बार कुछ ऐसी जानकारियां भी दी, जो आज से

पहले कभी सार्वजनिक चर्चा में नहीं आयी थी। उन्होंने कहा कि काफी अरसा पहले ही

नीतीश कुमार की युवावस्था में उनकी ऊर्जा और शैली से प्रभावित होकर उन्होंने नीतीश

कुमार को आगे बढ़ाने की सिफारिश कुछ नेताओं से की थी क्योंकि उन्हें ऐसा लगा था कि

इस युवा नेता में जो जोश है, वह बिहार के काम आ सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा

कि लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाला में जांच की सिफारिश की अनुमति भी उन्होंने ही

विधानसभा अध्यक्ष रहते वक्त दी थी। आम तौर पर इन दोनों बातों की बहुत अधिक चर्चा

इससे पहले कभी नहीं हुई थी।

सृजन घोटाला में बड़े नेता शामिल हैं

एक अन्य सवाल के उत्तर में उन्होंने स्वीकार किया कि सीबीआई की कार्यशैली से ही

स्पष्ट है कि भागलपुर के बहुचर्चित सृजन घोटाला में बड़े नेता शामिल हैं। इस बारे में

मीडिया में पहले ही बहुत कुछ आ चुका है। नाम आने के बाद भी अधिकारियों के खिलाफ

कार्रवाई नहीं होना भी सीबीआई को ही संदेह के घेरे में लाता है। श्री सिंह ने कहा कि आम

तौर पर सीबीआई अपने स्तर पर की जाने वाली कार्रवाइयों की सूचना सार्वजनिक करती

है। लेकिन सृजन घोटाले में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। इससे यह संदेह और बढ़ता है कि

इसमें बड़े नेता निश्चित तौर पर शामिल हैं, जिनके बारे में पहले ही सार्वजनिक तौर पर

काफी कुछ जानकारी आ चुकी है।

एक अन्य सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष को बदलने की

अनुशंसा उन्होंने की थी। इससे भले ही कुछ लोग नाराज हुए हों लेकिन यह पार्टी को

मजबूत करने के लिए लिया गया फैसला था। वर्तमान अध्यक्ष से उन्हें संगठन की

मजबूती की बहुत उम्मीद है जबकि पूर्व अध्यक्ष अच्छे आदमी होने के बाद भी संगठन को

गति नहीं दे पा रहे थे।


 

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