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आत्मनिर्भर भारत की आड़ में बढ़ रहा चीनी कारोबार




आत्मनिर्भर भारत का अभियान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है।




इसकी दिशा में वह लगातार बात करते तथा लोगों को प्रोत्साहित करने नजर आते हैं।

लेकिन अब बदलते परिवेश के बीच भारतीय व्यापारियों ने इसी आत्मनिर्भर भारत की

आड़ में चीन निर्मित उत्पादनों के लिए चोर दरवाजे खोल दिये हैं। आंकड़े इस बात की

गवाही देते हैं कि चीन से सामान लाने पर लगे प्रतिबंध के बाद भी चीन से आयात लगातार

बढ़ रहा है। चीन के खिलाफ बयानबाजी करने वाले चीनी पटाखों और मोबाइल तक ही

अपनी सोच को कैद कर रहे हैं दूसरी तरफ अनेक भारतीय व्यापारी इसी आत्मनिर्भर

भारत का हवाला देकर चीनी उपकरण खरीद रहे हैं। इसके लिए दूसरे रास्ते से उन्हें मंगाया

जा रहा है। लिहाजा यह माना जा सकता है कि भारत और चीन के बीच गलवान घाटी की

घटना के बाद से जो सीमा विवाद उत्पन्न हुआ है, उसके बीच ही भारतीय प्रधानमंत्री के

सपने को भारतीय व्यापारी ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। चीन के साथ विवाद के बाद वहां के

सामान पर रोक लगाने की मांग उठने के साल भर बाद भी चीन से आयात बढ़ रहा है। चीन

अब भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। इस साल अप्रैल में चीन से

65.1 लाख डॉलर का सामान आयात हुआ, जो पिछले साल अप्रैल के मुकाबले दोगुने से भी

ज्यादा था। हालांकि आयात में 114 फीसदी इजाफे की एक वजह पिछले साल लॉकडाउन

के बीच बहुत कम आयात भी कही जा सकती है मगर इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जे, कंप्यूटर

हार्डवेयर और दूरसंचार उपकरण आदि के आयात में तेजी देखी जा रही है। इसके लिए

झारखंड सरकार के वन विभाग द्वारा दूसरी एजेंसी के माध्यम से चीन निर्मित ड्रोनों की

खरीद को ही देखा जा सकता है।

आत्मनिर्भर भारत के नारों के बीच चीनी ड्रोनों की खरीद

ऐसे ड्रोनों को उड़ाने की अनुमति नहीं होने क बाद भी यह खरीद हो रही है। जाहिर है कि

इसमें आपूर्तिकर्ता कंपनी ने चोर दरवाजे से ही चीन में निर्मित ड्रोन मंगाये हैं, जिन्हें

डीजीसीए की मान्यता नहीं होने के बाद भी उनका सरकारी इस्तेमाल की तैयारी चल रही

है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल में देश में इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों

की कुल जरूरत का 40.71 फीसदी हिस्सा चीनी आयात से ही पूरा किया गया। पिछले साल

अप्रैल में यह हिस्सा 33.54 फीसदी ही था, जबकि आंकड़ा 2019 में 33.82 फीसदी और

2018 में 33.90 फीसदी था। वित्त वर्ष 2021 में चीनी आयात की हिस्सेदारी कुल 40.5




फीसदी रही जो वित्त वर्ष 2020 में 37.2 फीसदी और 2019 में 36.9 फीसदी थी। वित्त वर्ष

2021 में देश के कुल निर्यात में चीन की हिससेदारी 16.53 फीसदी रही, जो 12 साल में

सबसे अधिक है। हालांकि चीन के साथ कुल व्यापार घाटा 2020-21 में घटकर 44.11 अरब

डॉलर रह गया मगर देश के कुल व्यापार घाटे में चीन की हिस्सेदारी 43 फीसदी है, जो चार

साल में सबसे अधिक है। भारत मुख्य रूप से चीन से इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे, दूरसंचार उपकरण,

कार्बनिक रसायन, कंप्यूटर हार्डवेयर, डेरी के लिए औद्योगिक उपकरण, कंज्यूमर

इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक के लिए कच्चा माल आदि मंगाता है। चीन निर्मित वस्तुओं के

विरोध के बावजूद कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के आयात में इजाफा हुआ है। इस साल

अप्रैल में भारत के बाजार में चीन निर्मित वैक्यूम क्लीनर, रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव जैसे

उत्पादों की हिस्सेदारी पिछले अप्रैल के मुकाबले बढ़ी है। अप्रैल में भारत में आयात होने

वाले करीब 63 फीसदी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद चीन से आए, जबकि पिछले साल

अप्रैल में इसमें चीन की हिस्सेदारी केवल 26 फीसदी थी। 2020-21 में इसकी हिस्सेदारी

52.3 फीसदी बढ़ी, जो 2019-20 में 44 फीसदी थी।

आयात और निर्यात के आंकड़े भी सच्चाई बता रहे हैं

पिछले साल देश में आयात होने वाले कंप्यूटर हार्डवेयर में आधे से ज्यादा चीन से आया

था। वित्त वर्ष 2020 में इसकी हिस्सेदारी 46.4 फीसदी थी जो वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर

50.8 फीसदी हो गई। अप्रैल 2021 में कंप्यूटर हार्डवेयर के कुल आयात में चीन की

हिस्सेदारी 55 फीसदी रही, जो पिछले साल इसी महीने 51 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2021 में

देश में आयात किए गए कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में चीन की हिस्सेदारी आधे से अधिक

रही, जबकि बीते दो वर्षों में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी थी। इस साल अप्रैल की

बात करें तो इसका चीन से आयात बढ़कर 63 फीसदी हो गया। इस स्थिति और उपलब्ध

सरकारी आंकड़ों से ही समझा जा सकता है कि आत्मनिर्भर भारत के मोदी के अभियान

की आड़ में बेइमान भारतीय व्यापारी क्या गुल खिला रहे हैं। उन्हें निजी लाभ की पड़ी है

और इस किस्म के भेदिया घर में मौजूद होने की वजह से चीन को भारतीय आर्थिक

गतिविधियों के अलावा भी अन्य गतिविधियों की गोपनीय सूचना इन उपकरणों के

माध्यम से नहीं मिल रही होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।



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