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दूसरे ग्रहों में खुद ही फैसला लेकर काम करते रहेंगे यह रोबोट

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैश रोबोटों का विकास जारी

  • भविष्य के लिए इंसानी बस्ती बसाने की पूर्व तैयारी

  • यंत्रमानव बिना सांस लिये अपना काम कर सकता है

  • सोचने की शक्ति होने पर वह खुद फैसला भी लेगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दूसरे ग्रहों की विपरीत परिस्थितियों में इंसान का टिक पाना मुश्किल होता है। खास

कर जब वायुमंडल में ऑक्सीजन नहीं हो तो अलग से ऑक्सीजन हासिल करना भी पूरे

अंतरिक्ष अभियान को अधिक पेचिदा और खर्चीला बना देता है। दूसरी तरफ जब कोई

मशीन किसी दूसरे ग्रह पर जाता है तो उसके साथ यह सारी परेशानियां नहीं होती। लेकिन

इन यंत्रों को भी नियंत्रण कक्ष से लगातार निर्देशित करना पड़ता है। इन दोनों समस्याओं

से निजात का एक विकल्प वैसे रोबोट हैं, जो अपनी समझदारी से क्या काम करना है,

उसका फैसला ले सकते हैं। अब वैज्ञानिक वैसे ही रोबोट विकसित करने के अभियान पर

काम कर रहे हैं। थ्री डी प्रिटिंग तकनीक से तैयार इन रोबोटों को न सिर्फ कृत्रिम बुद्धिमत्ता

से लैश किया जा रहा है बल्कि संकेतों के आधार पर उन्हें क्या करना है, उसके लिए भी

प्रशिक्षित किया जा रहा है। कुल मिलाकर ऐसे यंत्रमानवों में इंसान जैसी सोचना की शक्ति

डाली जा रही है ताकि वे किसी दूसरे ग्रह पर जाकर अपने स्तर पर काम करते हुए अपने

नियंत्रण कक्ष को ग्रह के बारे में अधिकाधिक जानकारी भेज सकें।

शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी से दूर किसी दूसरे ग्रह पर अगर इंसानों की बस्ती

बनाने की आवश्यकता हुई तो ऐसे रोबोट ही वहां जाकर सबसे पहले हालात का जायजा

लेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो वह उस क्षेत्र में इंसान के बसने लायक माहौल बनाने की भी

शुरुआत करेंगे। लिहाजा अकेले रोबोट को यह सारा काम अपनी सोच से करना पड़ेगा।

इसी वजह से वैज्ञानिक रोबोटों को इंसान जैसी सोचना और काम करने की शक्ति प्रदान

करना चाहते हैं। कहीं जिंदा रहने के लिए इंसान की जो मजबूरियां होती हैं, यह यंत्रमानव

उन मजबूरियों से पूरी तरह मुक्त रहेगा।

दूसरे ग्रहों का अलग माहौल उनके काम में बाधा नहीं बनेगा

इस काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए रोबोटिक्स और कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ

एक साथ काम कर रहे हैं। उनका ढांचा भी कुछ ऐसा बनाया जा रहा है जो किसी दूसरे ग्रह

की विपरीत माहौल में सही तरीके से काम करने के लिए टिकाऊ बना रह सके। इसी वजह

से थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से ऐसे रोबोट बनाये जा रहे हैं। बोस्टोन डायनामिक्स

जैसी कंपनी में हम ऐसे कुशल रोबोट को काम करते देख सकते हैं जो इंसान के मुकाबले

अधिक कार्यकुशलता के साथ अपना काम अधिक समय तक बिना रूके अंजाम देते रहते

हैं। ऐसे कुशल रोबोट कारखाना के मानव श्रम की आवश्यकताओं को कम करने के साथ

साथ उत्पादकता को भी बहुत बढ़ा देते हैं। यह रोबोट कैसा होगा, इस पर भी काफी बहस हो

रही है। दरअसल किसी दूसरे ग्रह में अधिक कुशलता के साथ चलने के लिए ऐसे कुशल

रोबोट को रेंगने वाला अथवा पैदल चलने वाला होना चाहिए, इस पर भी चर्चा हुई है। दोनों

तरीके के अपने अपने फायदे हैं और अपनी अपनी परेशानियां भी हैं। ऐसे में कुछ लोगों को

मत है कि इसे कुछ इत तरीके से बनाया जाए कि वह सामान्य तौर पर चल सके और

जरूरत पड़ने पर रेंगते हुए भी आगे बढ़ सकते। यह भी इंसान का ही गुण है कि वह जरूरत

के मुताबिक दोनों तरीके से चल सकता है। बात सिर्फ इतने भर की नहीं है बल्कि उसका

आकार और वजन कितना हो, उस पर किस किस किस्म के काम की जिम्मेदारी हो, यह

सब कुछ सोचकर ही उसकी डिजाइन को अंतिम रुप प्रदान किया जाएगा। वर्तमान में तो

सिर्फ उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता देने और काम के लिए प्रशिक्षित करने की तकनीक विकसित

की जा रही है।

अनजाना इलाका में हर तरीके से काम करने लायक यंत्र बने

वैज्ञानिकों की सोच है कि किसी अनजाना ग्रह में भेजे जाने वाला रोबोट कुछ ऐसा होना

चाहिए कि वह अप्रत्याशित परिस्थितियों में क्या करना है, उसका फैसला खुद और त्वरित

तौर पर कर सके। इंसान के जैसा सांस लेने की जरूरत से मुक्त रोबोट दूसरे ग्रहों में

परिस्थिति के मुताबिक खुद ही फैसला लें, इसके लिए उनमें आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का

होना जरूरी है, जो तैयार की जा रही है। उसे दूसरे ग्रह में अधिक तापमान, गहरी खाई,

विपरीत रासायनिक प्रतिक्रिया अथवा विकिरण सभी से सामना हो सकता है। लिहाजा वह

इन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों को समझने लायक समझदारी लेकर वहां जाए तो वह

बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारी को पूरा कर पायेगा। वैज्ञानिक मानते हैं कि वर्तमान

प्रजाति के इंसान को इस किस्म का फैसला लेने की शक्ति मिलने के पीछे लाखों वर्षों के

क्रमिक विकास की पद्धति रही है। इसके संक्षिप्त रुप को ऐसे रोबोट में डालकर ही उन्हें

दूसरे ग्रहों पर भेजने से वे ज्यादा कार्यकुशलता के साथ अपना वह काम कर पायेंगे,

जिसके लिए उन्हें तैयार किया जा रहा है।

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