आधार कार्ड की सुरक्षा में फिर छेद इस बार सामने आया साफ्टवेयर

आधार की सुरक्षा में फिर छेद
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  • एक मीडिया समूह ने किया परीक्षण

  • विशेषज्ञों ने कर दी गड़बड़ी की पुष्टि

  • नकली आधार कार्ड बनाना भी संभव

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः आधार कार्ड की सुरक्षा निश्चित तौर पर खतरे में है। सरकार की तरफ से बार बार सफाई देने के बाद एक मीडिया समूह ने इस मुद्दे की गोपनीय जांच की है। जांच का निष्कर्ष है कि बाजार में मिल रहे मात्र ढाई हजार रुपये के साफ्टवेयर की मदद से आधार की तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि आधार की सुरक्षा पर इससे पहले भी सवाल उठते रहे हैं

लेकिन हर बार सरकार की तरफ से सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था होने के दावे किये जाते रहे हैं।

इस बार मीडिया समूह के स्टिंग ऑपरेशन ने इन तमाम दावों की धज्जी उड़ा दी है।

पूरे मामले की जांच के क्रम में पाया गया है कि आधार के काम में इस्तेमाल होने वाले साफ्टवेयर का

एक पैच (छोटा सा कंप्यूटर प्रोग्राम) बाजार में आया है।

इस पैच का इस्तेमाल करने के बाद किसी भी कंप्यूटर से बिना किसी सुरक्षा औपचारिकता पूर्ण किये ही

आधार पर सारा काम किया जा सकता है।

आधार कार्ड के आंकड़ों में भी फेरबदल संभव

इसकी मदद से नया आधार भी बनाया जा सकता है।

आशंका है कि फर्जी आधार कार्ड बनाने में भी इस किस्म की तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।

जिसकी जानकारी आधार की जिम्मेदारी उठाने वाली संस्था को भी नहीं है।

इसलिए बिना दोबारा जांच के यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि कौन सा आधार कार्ड असली है और कौन नकली।

वर्ष 2010 में जब आधार बनाने का काम जोर शोर से प्रारंभ किया गया था तो इसकी एजेंसी यूआइडीएएआइ ने निजी कंपनियों और एजेंसियो की मदद से यह काम किया था।

इन एजेंटों को एनरोलमेंट क्लाइट मल्टी प्लेटफॉर्म (इसीएमपी) नामक एक साफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया था।

इस साफ्टवेयर की विशेषता थी कि इसका इस्तेमाल करने वाले कहां बैठे हैं, इसकी जानकारी यूआइडीएएआइ को मिलती रहती थी।

इसमें काम प्रारंभ करने के पूर्व इस्तेमाल करने वाले एजेंट के उंगलियो के निशान की बाध्यता थी।

यानी बिना प्रमाणित उंगलियों के निशान के इस साफ्टवेयर में लॉग इन नहीं किया जा सकता था।

बाद में नये साफ्टवेयर पैच में जीपीएस की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है। साफ्टवेयर नहीं बदला गया है।

आधार कार्ड में गड़बडी ढाई हजार के साफ्टवेयर पैच से

इसका खामियजा यह है कि अब कोई भी एजेंट बिना किसी उंगली के निशान से लॉग इन किये ही मनमर्जी से आधार साफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं।

जीपीएस की पद्धति हटा लिये जाने की वजह से यह पता भी नहीं चल पा रहा है कि कौन सा आधार कार्ड कहां बनाया जा रहा है।

इस वजह से दुनिया के किसी भी इलाके में बैठकर आधार कार्ड बनाया जा सकता है और इसका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

इस नये पैच की वजह से अब जिनके नाम का आधार कार्ड बनाया जा रहा है, उनके उंगलियों के निशान के अलावा आंख की पुतली की तस्वीर की मिलान की भी जरूरत नहीं है।

आधार के लिए काम करने वाले एजेंट मात्र ढाई हजार रुपये के भुगतान पर यह साफ्टवेयर खऱीद रहे हैं।

इसके बाद पांच सौ रुपये प्रति कार्ड की दर से आधार कार्ड बनाने का धंधा बदस्तूर जारी है।

कई विशेषज्ञों ने इस पूरे मामले की जांच करने के बाद यह प्रमाणित किया है कि आधार की सुरक्षा में सेंध लगाना संभव है।

यहां तक कि इसके इस्तेमाल से पूर्व का डाटाबेस में नये आंकड़े भी शामिल किये जा सकते हैं।

इसके जाली आधार कार्ड अथवा अनधिकृत लोगों के आधार कार्ड बनाने की आशंका पूरी तरह सत्य है।

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