fbpx Press "Enter" to skip to content

खुफिया एजेंसियों ने फिर से भारत सरकार को सतर्क किया

  • दूसरे रास्तों से हथियार भेज रहा है चीन

  • थाईलैंड और म्यांमार के माध्यम से नया रास्ता

  • पूर्वोत्तर को अशांत करने की पहली चाल है उसकी

  • हर उग्रवादी गिरोहों को मिल रहा है सीधा समर्थन

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: खुफिया एजेंसियों ने फिर से भारत सरकार को सतर्क किया है। चीन अब

उग्रवादियों के जरिये इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाना चाहता है। हाल ही में म्यांमार की

सेना ने इशारों ही इशारों में यह आरोप लगाया था कि चीन उग्रवादी संगठन अराकन आर्मी

को जमकर हथियार सप्लाई कर रहा है, ताकि वह क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा कर सके।

खुफिया एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार इसी कड़ी में अब थाइलैंड में भी चीन में बने हथियारों का

एक बड़ा जखीरा है, जिसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के रास्ते म्यांमार में लेकर आए जाने

की तैयारी कर रही है। अब भारत सरकार ने भी थाई और म्यांमार सरकार के साथ संपर्क

स्थापित कर लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह हथियार भारत के नॉर्थ

ईस्ट के लिए लाया जा रहा है। हालांकि, म्यांमार और भारत में अवैध रूप से चीनी

हथियारों का आसान प्रवाह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में भारत सरकार को सतर्क किया है। भारत के पूर्वोत्तर

राज्यों से इस साल अब तक एके-47, एम-16एस, चीनी पिस्तौल और लेथोड्स सहित कुल

423 अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। खुफिया एजेंसियों ने यह भी कहा है कि चीन

म्यांमार सीमा पर विद्रोही समूहों को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है,

क्योंकि वे अच्छी कीमत चुकाते हैं।एजेंसियों ने सरकार को सतर्क करते हुए कहा, प्रमुख

विद्रोही समूहों विशेष रूप से असम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम के लोग चीनी

खुफिया एजेंसियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखते हैं और ये चीनी उदारता और

हथियारों से लाभान्वित हुए हैं।

खुफिया एजेंसियों ने चीन की दोहरी चाल का खुलासा किया

चीन के प्रति असतर्क होना का फिलहाल मौका नहीं हैएजेंसियों ने बताया है कि उत्तर-पूर्व में विद्रोही समूहों का प्रशिक्षण, हथियारों एवं गोला-

बारूद की पहुंच और निर्वासित आतंकवादियों और नेताओं को शरण देना भारत के

खिलाफ चीन की दोहरी चाल का हिस्सा है। वह अपने अलावा आतंकवादियों के माध्यम से

भी पूर्वोत्तर को अशांत करना चाहता है। इसमें म्यांमार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण

स्थान पर स्थित है। यह हिंद महासागर के व्यापार मार्गो के लिए एक वैकल्पिक भूमि पुल

प्रदान करता है, मलक्का स्ट्रैट्स पर दबाव को कम करता है और यूनान प्रांत के विकास के

लिए प्राकृतिक संसाधनों का एक खजाना है। सूत्रों ने कहा कि हाल ही में एके-47 असॉल्ट

राइफलों, मशीनगन, एंटी टैंक माइंस, ग्रेनेड सहित करीब 10 लाख डॉलर के गोला-बारूद से

युक्त चीन निर्मित हथियारों की एक बड़ी खेप म्यांमार-थाईलैंड की सीमा पर थाईलैंड की

तरफ माई सोट जिले में जब्त की गई है। चीनी हथियारों की यह एकमात्र खेप नहीं है, जो

बरामद हुई है। इस साल की शुरुआत में म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय जंक्शन के पास

मोनाखाली बीच पर 500 असॉल्ट राइफल, 30 यूनिवर्सल मशीनगन, 70,000 गोला बारूद,

ग्रेनेड का एक विशाल भंडार और एफ-6 चीनी मैनपैड्स धकेली गई थी। वहां से यह खेप

संडाक में अराकान आर्मी कैंप तक पहुंची और फिर इसे दक्षिण मिजोरम में परवा कॉरिडोर

का इस्तेमाल करते हुए राखाइन में तस्करी कर लाया गया। जब्त किए गए हथियार मूल

चीनी निर्मित थे और म्यांमार सीमा पर विद्रोही समूहों के लिए तस्करी किए जाने के लिए

थे, क्योंकि वे अच्छी कीमत देते हैं। म्यांमार में, चीन वर्तमान में अराकान सेना को

हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है, जो म्यांमार की सीमा से लगे चिन और

राखीन राज्यों में सक्रिय है।

चीन आराकान आर्मी के अलावा पूर्वोत्तर के आतंकवादियों के साथ

चीन अब अराकान आर्मी का उपयोग कर रहा है, जो कि म्यांमार द्वारा आतंकवादी

संगठन के रूप में घोषित किया गया है। 2019 में जब कलादान परियोजना का एक चरण

पूरा होने वाला था, अराकान सेना ने अपने ऑपरेशन के क्षेत्र को रखाइन और दक्षिणी चीन

में स्थानांतरित कर दिया था। 2019 में अराकान सेना और म्यांमार के बीच 593 से अधिक

झड़पें हुईं, जिनमें से अधिकांश कलादान परियोजना के करीब थीं। सूत्रों ने कहा कि चीन

अराकन सेना की फंडिंग का 95 प्रतिशत तक प्रदान करता है। बांग्लादेश और थाईलैंड के

माध्यम से आपूर्ति किए गए चीनी हथियार स्पष्ट करते हैं कि म्यांमार में भारत द्वारा

शुरू किए गए प्रोजेक्ट खतरे में हैं। हाल ही में म्यांमार सेना के कमांडर-इन-चीफ़ जनरल

“मिन ओंग” ने रूस के एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा था कोई देश आसानी से

अपने यहाँ आतंकियों का सफाया कर सकता है, लेकिन अगर उनके पीछे किसी बड़ी

ताकत का हाथ हो, तो फिर दुनिया को हमारी मदद के लिए आगे आना चाहिए। जनरल

मिन ओंग का इशारा यहाँ चीन की ओर था, क्योंकि अराकन आर्मी के पास से बड़ी संख्या

में चीनी हथियार ज़ब्त किए जा रहे हैं।

[subscribe2]

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from आतंकवादMore posts in आतंकवाद »
More from उत्तर पूर्वMore posts in उत्तर पूर्व »
More from चीनMore posts in चीन »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from बांग्लादेशMore posts in बांग्लादेश »
More from म्यांमारMore posts in म्यांमार »
More from रक्षाMore posts in रक्षा »

2 Comments

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: