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भारतीयों पर हुई जासूसी का राज धीरे धीरे खुलने लगा

  • अनेक लोग आये थे इस मिस्ड कॉल के झांसे में
  • कई अलग नाम से भी कारोबार करती थी कंपनी
  • लोगों को आकर्षक प्रस्ताव देकर फंसाते थे
  • भारत में इसका दायरा काफी बड़ा ही था
विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः भारतीयों पर हुई जासूसी का राज उम्मीद से अधिक तेज गति से खुलता जा रहा है।

दरअसल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा इस बार में केंद्र सरकार पर हमला किये जाते ही मामला और गंभीर होता नजर आ रहा है।

इस बीच साइबर विशेषज्ञों ने अपने अपने तरीके से इस तरीक से भारतीयों पर हुई जासूसी की पुष्टि भी कर दी है।

अब लोग इस बात को लेकर सामने आ रहे हैं कि जिस तरीके से यह जासूसी की गयी है, वैसी घटना उनके साथ भी घटित हो चुकी है।

लेकिन एक सामान्य घटना समझकर उन्होंने इस पर ध्यान नही दिया था।

अब इसका राज खुलने के बाद लोग पुराने घटनाक्रम को याद करते हुए अपने साथ हुई जासूसी को समझ पा रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने इस गड़बड़ी के लिए एनएसओ समूह को जिम्मेदार ठहराया है।

अब यह राज भी खुला है कि पिगासूस स्पाईवायर के इस्तेमाल के लिए

इजराइल की इस कंपनी ने कई मुखौटा नामों का भी इस्तेमाल किया है।

इनमें से क्यू सूट और टिड्रेंट नाम की पहचान हो चुकी है।

भारतीयों पर जासूसी के लिए बहुत आसान तरीके से इस्तेमाल इजराइल की इस कंपनी ने किया था।

लोग अपने मोबाइलों पर अनजान नंबरों से आने वाले मिस्ड कॉल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया करते थे।

इस एक मिस्ड कॉल के नंबर को देखने के चक्कर में सामने वाले का मोबाइल इस जासूसी के जाल में फंस जाता था।

कई बार इसी कंपनी ने लोगों को फर्जी और आकर्षक दिखने वाले लिंक

भेजकर भी उनके जरिए लोगों के मोबाइल हैक कर आंकड़े और जानकारी को

चुराया है।भारतीयों की जासूसी खुलासे पर व्हाट्सएप का पेंच सामने आया

भारतीयों पर हुई जासूसी आखिर किसके कहने पर

अब यह स्पष्ट हो चुका है कि भारतीयों पर हुई जासूसी के इस जाल में सिर्फ

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं थे।

इसकी चपेट में कई बड़े वकील, सरकारी अधिकारी और अन्य प्रमुख लोग भी आये हैं।

विशेषज्ञ यह सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर खास खास लोगों को इस जाल में फांसने से आखिर फायदा किसको होना था।

इस किस्म की अनैतिक जासूसी की गतिविधियों पर नजर रखने वाली

कंपनियों को नजर इस गतिविधि पर गयी थी।

इन कंपनियों ने व्हाट्सएप को भी इस बारे में आगाह किया था।

इसका पता चलने और भारतीयों पर हो रही जासूसी की पुष्टि होने के बाद

अपनी तरफ से व्हाट्सएप ने करीब 14 सौ भारतीयों को इस बारे में

साफ तौर पर आगाह कर दिया था।

इस मामले में जांच करने वाली एक अन्य कंपनी टोरंटो विश्वविद्यालय

के सिटिजंस लैब की भी मदद ली थी।

इस अनुसंधान केंद्र ने भी अपनी तरफ से कई भारतीयों को उनके खिलाफ

हो रही अनैतिक जासूसी के प्रति आगाह किया था।

अब इसका राज खुलने के बाद जिनलोगों को ऐसे मिस्ड कॉल

अथवा लिंक भेजे गये थे, वे भी इन घटनाक्रमों को याद कर पा रहे हैं।

इस आधार पर यह माना जा रहा है कि दरअसल इस किस्म की

जासूसी का जाल काफी बड़ा था और मई महीने तक यह जासूसी चरम पर थी।

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