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पृथ्वी का दूसरा और छोटा चांद भी नजर आया

  • पिछले तीन साल से पृथ्वी के चक्कर काट रहा

  • तीन साल से था पर 15 फरवरी को पता चला

  • अप्रैल के माह में निकल जाएगा कहीं और

  • सैटेलाइट या उल्कापिंड इसका पता नहीं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी का दूसरा चांद भी है। हम इससे पहले सिर्फ उसी चंद्रमा को

जानते थे जिस पर अपोलो मिशन की बदौलत इंसान ने पहली बार पैर रखा

था। अभी हाल ही में भारत का चंद्रयान 2 अभियान भी अंतिम चरण में

आंशिक तौर पर विफल हुआ है। लेकिन अब पृथ्वी का दूसरा और छोटा चांद

भी वैज्ञानिकों की नजर में आया है। मजेदार बात यह है कि यह पिछले तीन

साल से पृथ्वी के चक्कर काट रहा है। वैज्ञानिकों ने इसका नाम 2020 सीडी 3

रखा है। तीन साल से पृथ्वी का चक्कर काटते इस पर अब वैज्ञानिकों को नजर

गयी है, ऐसी बात नहीं है। यह पृथ्वी के ही चक्कर काट रहा है, यह पहली बार

पता चला है। इस बात का पता चलने के बाद इस पर और शोध हुआ है।

जिसका निष्कर्ष है कि यह निरंतर पृथ्वी के चक्कर नहीं काटेगा।

अंतरिक्ष में मंडराते इस छोटे से टुकड़े के बारे में अनुमान है कि वह अप्रैल के

आस-पास पृथ्वी के पास से निकल जाएगा। गत 15 फरवरी से लगातार उस

पर नजर रखी जा रही है। इसी आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि

अपने चक्कर काटने की परिधि के बदलने की वजह से वह अप्रैल में कभी भी

पृथ्वी की धुरी से दूर चला जाएगा। वैसे यह कोई मृत उपग्रह है इस बारे में भी

पक्की जानकारी नहीं मिल पायी है। लेकिन अधिकांश वैज्ञानिक यह मान रहे

हैं कि यह दरअसल एक अत्यंत छोटा उल्कापिंड ही है। इससे पृथ्वी को कोई

खतरा भी नहीं है। लेकिन इस एक घटना से वैज्ञानिकों ने बताया है कि पृथ्वी

के आस-पास बहुत कुछ ऐसी घटनाएं अचानक घटित हो जाती हैं, जिसके बारे

में पहले से कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

पृथ्वी का दूसरा चांद दरअसल क्या यह पता नहीं

पृथ्वी के आस पास मंडराते सभी उल्कापिंडों और अन्य वस्तुओं, जिनमें

समाप्त हो चुके सैटेलाइट भी हैं, पर नजर रखने के लिए ही इंटरनेशनल

एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन माइनर प्लानेट सेंटर स्थापित किया गया है। यह उस

हर वस्तु पर नजर रखता है जो पृथ्वी के चक्कर काट रही है। इससे जुड़े वरिष्ठ

वैज्ञानिक कैसपर वेइरझोस कहते हैं कि आम नजर से यह सैटेलाइट जैसा तो

नजर नहीं आ रहा है। इससे वैसे विकिरण भी नहीं दिख रहे हैं जो आम तौर पर

किसी सैटेलाइट पर सूर्य की रोशनी पड़ने से होते हैं। लेकिन उन्होंने साफ कर

दिया कि बिना अन्य तथ्यों की पुष्टि के वह यह भी नहीं कहना चाहते हैं कि

यह कोई छोटा उल्कापिंड ही है।

एरिजोआना विश्वविद्यालय में नासा द्वारा प्रायोजित एक शोध कार्यक्रम में

भी आसमान पर मंडराते वस्तुओं पर नजर रखी जा रही है। इसी के तहत

इसकी खोज हुई है। जब यह खगोल दूरबीन पर नजर आया तो कैसपर के साथ

थियोडोर प्रूने भी थे। जब इन दोनों की नजर इस पर पड़ी तो वे इसे तुरंत ही

समझ नहीं पाये थे। लिहाजा इसके बारे में माइनर प्लानेट सेंटर को जानकारी

दी गयी थी।

आकार में छोटा होने की वजह से अक्सर नजर नहीं आता

दो वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद अंतरिक्ष पर इस वस्तु पर अन्य लोगों

का भी ध्यन गया। यह इतना छोटा और कम विकिरण वाला है कि सामान्य

दूरबीन से यह नजर भी नहीं आता है। एक बार इसका पता चलने के बाद

लगातार इस पर नजर रखने का सिलसिला प्रारंभ हुआ। जिससे यह पता चला

कि सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से अंतरिक्ष में चक्कर काटता यह वस्तु

हाल ही में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आया था। इसी वजह से वह

पृथ्वी के चक्कर काटने लगा है। लेकिन इस पर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण अब भी

अधिक प्रभावी है। इसलिए अप्रैल माह तक यह पृथ्वी से दूर निकल जाएगा।

अब तक यह नजर क्यों नहीं आया था के सवाल पर वैज्ञानिकों का कहना है

कि आम तौर पर अत्यंत छोटे आकार की चीजों पर लगातार नजर रखा पाना

संभव नहीं होता। कई बार सूर्य की रोशनी की वजह से भी वे दूरबीन की आंखों

से ओझल रह जाते हैं। पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के बीच आने की

वजह से इस पर लोगों की नजर पड़ी। वरना शायद यह अपनी धुरी पर कहीं

और निकल चुका होगा। इसका पता चलने के बाद भी वैज्ञानिकों को यह छह

या सात बार ही नजर आ पाया है। इसलिए इसके बारे में अधिक आंकड़े

एकत्रित नहीं हो पाये हैं। और जानकारी मिलने के बाद ही वैज्ञानिक पक्के तौर

पर यह बता पायेंगे कि जो नजर आ रहा है वह दरअसल क्या वस्तु है। अब

तक के अनुमान के मुताबिक यह किसी कार की आकार का है। पृथ्वी के

गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल जाने के पहले ही वैज्ञानिक अधिकाधिक बार

इसे देखकर इसके बारे में कोई ठोस निष्कर्ष निकालना चाहते हैं


 

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