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समुद्री पौधों से दुनिया के इंसानों की भूख मिटाने की नई तैयारी




  • इंसानी भोजन की जरूरत लगातार बढ़ने वाली है

  • समुद्र को खेत बनाकर इस्तेमाल करने की तैयारी

  • प्रचुर किस्म की प्राकृतिक पौष्टिकता होती है इनमें

  • समुद्री खरपतवार के प्रसंस्करण से सुलझेगी बड़ी समस्या

राष्ट्रीय खबर

रांचीः समुद्री पौधों का इस्तेमाल भी इंसान की भूख मिटाने और उसके पौष्टिक भोजन देने

के लिए किया जा सकता है। पहली बार इस दिशा में व्यापारिक प्रयोग का कार्य भी प्रारंभ

हो गया है। समुद्री पौधों की बिक्री पहले से भोजन के तौर पर होती आयी है। लेकिन

व्यापक पैमाने में इसका भूख मिटाने के लिए इस्तेमाल करने की बात अब सामने आयी

है। वरना अकेले अमेरिका में विभिन्न बाजारों में यही उत्पाद पिछले तीन वर्षो में करीब

पांच खरब का कारोबार कर चुके हैं। अब ब्रिटेन आधारित एक स्टार्टअप कंपनी

ओसिनियम ने इसे व्यापक स्तर पर आजमाने की तैयारी प्रारंभ कर दी है। वे इसके लिए

पर्यावरण के अनुकूल तकनीक विकसित कर इंसान के भोजन के लिए समुद्री खरपतवार

का इस्तेमाल करने जा रहा है। इस शोध से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि उनका प्रसंस्करण

विभिन्न इलाकों में लोगों को सस्ते दर पर समुद्री पौधों से पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा

पायेगा।

इस परिकल्पना को अमली जामा पहनानने वाले डॉ चार्ली बेभिंगटन मानते हैं कि दुनिया

की निरंतर बढ़ती आबादी के बीच समुद्री खरपतवार को न सिर्फ भोजन बनाया जा सकता

है बल्कि समुद्र में प्राकृतिक तौर पर समुद्री पौधों की बेहतर खेती भी की जा सकती है।

इससे एकसाथ कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उनका मानना है कि समुद्री

खरपतवार समुद्री जीवन पर भी कई स्तरों पर संकट उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे में उनका

बतौर भोजन का इस्तेमाल करना इस संकट के समाधान का आसान रास्ता होगा। दूसरी

तरफ जब वाकई इंसान इसे अपने पौष्टिक भोजन के तौर पर स्वीकार कर लेंगे तो इसकी

मांग बढ़ने के बाद समुद्र में पहले से ही इसकी खेती के लायक सारे माहौल मौजूद होंगे।

इसलिए जैसे जैसे मांग बढ़ती जाएगी वैसे वैसे उसकी खेती भी बढ़ती जाएगी।

समुद्री पौधों का भोजन बनेगा तो उनकी खेती भी होगी

इससे इंसानी भूख के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध होने के साथ साथ समुद्री जीवन पर

इसकी वजह से जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं, उन्हें भी दूर किया जा सकेगा। यह प्रमाणित

हो चुका है कि इन्हीं खरपतवारों के तेजी से बढ़ने की वजह से अनेक इलाकों में कोरोल का

जंगल समाप्त हो रहा है। कोरल के जंगल के नहीं होने से अनेक किस्म के समुद्री प्राणियों

का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता चला जा रहा है। वैज्ञानिक शोध में यह बात प्रमाणित हो

चुकी है कि ऐसे समुद्री पौधों यानी खरपतवार में प्रचुर पौष्टिकता होती है। इसलिए सिर्फ

उनके प्रसंस्करण की आवश्यकता है ताकि वे इंसानी भोजन की श्रेणी में आ सकें। इस

प्रयास को गंभीरता से इसलिए भी लिया जा रहा है क्योंकि ऐसा होने पर समुद्र में जो

कार्बन उत्सर्जन हो रहा है, उसे भी नियंत्रित किया जा सकेगा। यानी यह प्रक्रिया एक तरफ

इंसानों का भूख मिटायेगी तो दूसरी तरफ समुद्री जीवन को बचाने के साथ साथ वायुमंडल

के कार्बन उत्सर्जन की मात्रा को भी कम करने में सहायक साबित होगी। यह प्रमाणित

वैज्ञानिक तथ्य है कि गीले तौर पर मौजूद समुद्री खरपतवार जिसे सी वीड कहा जाता है,

अपने अंदर 47 किलो कार्बन सोख लेता है। यानी पृथ्वी पर यह एक एकड़ के कार्बन सोखने

के बराबर है। इस प्रक्रिया से जुड़े लोग मानते हैं कि जब मांग अधिक होगी और इस सी वूड

की खेती होने लगेगी तो इस खेती के लिए भी समुद्री तल को साफ रखना तथा अनधिकृत

किस्म के मछली शिकार को रोका जाएगा। इससे भी समुद्र का और समुद्र के साथ साथ

दुनिया के वायुमंडल का भला ही होगा।

फायदा सिर्फ समुद्र नहीं पूरे वायुमंडल को भी होगा

आज जिस तरीके से जमीन पर हम जंगल काटे जाने का नतीजा भोग रहे हैं, ठीक वैसी ही

स्थिति समुद्र के अंदर भी मछली शिकार और अन्य कारणों से है। समुद्री खरपतवार की

वैज्ञानिक खेती इसे रोकने में मददगार होगी क्योंकि समुद्र से इंसानों को बेहतर किस्म का

पौष्टिक भोजन भी प्राप्त होने लगेगा। इस समुद्री खरपतवार की विशेषता है कि इसमें

अनेक किस्म के विटामिन, खनिज, प्रोटिन के साथ साथ माइक्रोन्यूट्रियेंट्स होते हैं।

जिनमें से अधिकांश ही एंटी ऑक्सीडेंट हैं। लिहाजा उनका भोजन इंसान की भूख मिटाने

के साथ साथ इंसान के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का भी विकास करेगा। वैज्ञानिक

आकलन है कि वर्ष 2050 आते आते धरती पर अभी के मुकाबले 50 से 70 फीसदी अधिक

भोजन की आवश्यकता होगी। ऐसे में समुद्र को खेत समझकर भोजन की खेती करना हर

दृष्टि से बेहतर विकल्प साबित होगा। इससे जमीन पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ भी कम

होगा और उर्बरकों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। दुनिया में भोजन के

नाम पर जो प्रोटिन की कमी देखी जा रही है, उसे भी यह समुद्र का नया भोजन दूर कर

पायेगा। यानी हर स्तर पर समुद्र में खेती से रोजगार के नये अवसर भी खुल जाएंगे जो

सीधे तौर पर भोजन की श्रृंखला से जुड़े हुए होंगे।



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