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सीट बंटवारे पर भाजपा और आजसू में नहीं बनी बात







  • भाजपा का प्रस्ताव मात्र 8 से 12 सीट

  • सुदेश 19 सीटों की मांग पर अड़े हैं

  • भाजपा का एक गुट सुदेश से खफा

संवाददाता

रांचीः सीट बंटवारे पर भाजपा और आजसू की वार्ता विफल होने की सूचना है। भाजपा नेतृत्व के बुलावे पर आजसू

अध्यक्ष सुदेश महतो दिल्ली गये थे। वहां से इस बात चीत का कोई सार्थक नतीजा नहीं निकल पाने की सूचनाएं बाहर

आयी हैं।

इसलिए ऐसा कहा जा रहा है कि झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी

ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रही वार्ता विफल हो गई।

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो भाजपा के झारखंड विधानसभा चुनाव प्रभारी ओ. पी. माथुर से सीट बंटवारे की वार्ता

विफल होने के बाद दिल्ली से रांची लौट आए।

आजसू अपने लिए 17 सीटों की मांग कर रहा था लेकिन भाजपा ने उसकी मांगों को नहीं माना।

इससे पूर्व आजसू ने भाजपा से 19 सीटों की मांग की थी।

झारखंड भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने कहा कि भाजपा आजसू को आठ से 12 सीट तक देने के लिए

सहमत है। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 72 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

वहीं, आजसू को आठ सीट और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को एक सीट दी गई थी।

सीट बंटवारे पर आजसू का दावा पिछले चुनाव पर

इस चुनाव में आजसू ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन, वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा

और आजसू के बीच कई सीटों पर पेंच फंस रहा है। दोनों पार्टियां लोहरदगा और चंदनकियारी सीट चाहती हैं।

उप चुनाव में लोहरदगा सीट से विजयी हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत के भाजपा में शामिल

हो गए हैं वहीं चंदनकियारी से पिछली बार झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के टिकट पर राज्य के वर्तमान

पर्यटन मंत्री अमर बाउरी ने जीत दर्ज की थी। वह बाद में झामुमो से नाता तोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे।

इस बार के चुनाव में भाजपा जो दस सीटें आजसू को देना चाहती है उनमें सिल्ली, रामगढ़, जुगसलाई, तमाड़,

टुंडी, बरकागांव, ईचागढ़, हुसैनाबाद, डुमरी और गोमिया शामिल हैं।



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