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अपने अंतरिक्ष अभियान के पहले वर्ष में पहले से ही तय है दूरबीन की जिम्मेदारी




  • अंतरिक्ष में सोना भी तलाशेगा जेम्स वेब टेलीस्कोप
  • हब्बल टेलीस्कोप का स्थान लेगा यह नया उपकरण
  • इसमें खास चीजों की पहचान के यंत्र लगे हुए हैं
  • धरती से चांद पर मक्खी देख सकते हैं इसका लेंस

वाशिंगटनः अपने अंतरिक्ष अभियान पर शीघ्र ही रवाना होगा जेम्स वेब टेलीस्कोप। इस खगोल दूरबीन को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है ताकि वह वहां पहले से स्थापित और काफी पुराना पड़ चुके हब्बल टेलीस्कोप का स्थान ले सके। वैसे इसके बार में अब तक जो सूचनाएं सामने आयी हैं, उसके मुताबिक इस खगोल टेलीस्कोप के पहले साल की जिम्मेदारियों में अंतरिक्ष में सोना तलाशना भी शामिल है।




यह फिर से बता दें कि दरअसल सोना बनने की जो रासायनिक प्रक्रिया होती है, वह इस पृथ्वी पर संभव नहीं है। धरती पर भी जहां कहीं सोना के खदान मिलते हैं, वे दरअसल किसी बड़े उल्कापिंड के धरती से आ टकराने के ही परिणाम है। यानी यह सारा सोना अंतरिक्ष से ही धरती तक आ पहुंचा है।

इसलिए अंतरिक्ष में सोना तलाशना भी जेम्स वेब टेलीस्कोप की एक प्रारंभिक जिम्मेदारी होगी। वैसे भी खगोल वैज्ञानिकों ने एक वैसे उल्कापिंड की पहले ही पहचान कर ली है, जिसका अधिकांश हिस्सा सोना से भरा हुआ है। इस उल्कापिंड के शेष हिस्से में लोहा है। सैद्धांतिक तौर पर इस उल्कापिंड से सोना निकालकर लाने पर भी काम चल रहा है।

अपने अंतिरक्ष अभियान में दस लाख मील की दूरी पर रहेगा

इसलिए अपने अंतरिक्ष अभियान के पहले वर्ष में जेम्स वेब टेलीस्कोप भी अंतरिक्ष में सोना वाले इलाकों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

वैसे अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले इस टेलीस्कोप के जिम्मे उन प्राचीन सौरमंडलों की तलाश करना भी होगा, जो अब तक हब्बल टेलीस्कोप की नजर से बचे हुए हैं।




इसी वजह से इस खगोल दूरबीन में अत्याधुनिक उपकरण भी लगाये गये हैं। साथ ही पृथ्वी के लायक माहौल वाले खगोलीय पिंडों की पहचान करना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

वर्तमान में इस टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में ले जाने वाले रॉकेट में ईंधन भरने का काम चल रहा है।

इसके अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वर्ष 1990 में तैनात हब्बल टेलीस्कोप के बदले यह नया उपकरण काम करने लगेगा। इस जेम्स वेब टेलीस्कोप के बारे में बताया गया है कि इसके कैमरों का लेंस इतना शक्तिशाली है कि यह धरती से चांद तक की दूरी पर मौजूद एक बड़ी मक्खी को देख सकता है।

अंतरिक्ष में जाने के बाद पहले छह महीने इसे पूरी तरह स्थापित होने में लगेगा। इसके बाद वह धरती से करीब दस लाख मील की दूरी से चक्कर काटते हुए सौरमंडल की गतिविधियों की सूचनाएं हमें भेजता रहेगा।



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