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समुद्री जल में एसिड बढ़ा तो तबाह होगी दुनिया

  • एक सीमा से ऊपर गया तो रोक पाना असंभव
  • समुद्री जीवन पर हुए अनुसंधान के नतीजे सामने
  • एसिडयुक्त बारिश से जमीन की उर्वराशक्ति नष्ट होगी
  • पृथ्वी के वातावरण में घुल रहा है अदृश्य तरीके का खतरा
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः समुद्री जल में एसिड की मात्रा बढ़ जाने पर दुनिया पर नये किस्म

का खतरा मंडराने लगा है। इसका पता चलने के बाद हुए अनुसंधान में

वैज्ञानिकों ने जो निष्कर्ष निकाला है, वह आसन्न खतरे की स्पष्ट चेतावनी

देता है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि समुद्र के जल में अगर एसिड की

मात्रा एक खास सीमा से ऊपर चली गयी तो पूरी पृथ्वी के तबाह होने की

प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ हो जाएगी।

वर्तमान में पृथ्वी के अपने प्रदूषण और समुद्र के अंदर होने वाले ज्वालामुखी

विस्फोटों की वजह से भी इस एसिड की मात्रा बढ़ रही है।

समुद्री जीवन में हो रहे बदलाव पर शोध करने वालों ने यह पाया है कि समुद्री

प्रवाल समूहों पर एसिड का प्रभाव बढ़ गया है। इस वजह से प्रवाल पर जीवन

बसर करने वाले समुद्री प्राणी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

इसी शोध को जब आगे बढ़ाया गया तो एक के बाद एक नये तथ्य जुड़ते चले

गये। दरअसल समुद्र के जल में एसिड का घुलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

वहां के जल में विभिन्न प्रकार के नमक होने की वजह से ही समुद्र का पानी

खारा होता है। गहरे समुद्र के भीतर जब ज्वालामुखी का विस्फोट होता है

तो उससे भी जो गैस निकलती है, वह पानी में घुलती हुई ऊपर की तरफ

आती है। इन गैसों के साथ साथ गंधक और कार्बन की मात्रा भी समुद्री जल

में बढ़ जाती है।

समुद्री जल पर यह शोध समुद्री जीवन की वजह से हुआ

अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह समुद्री जल प्राकृतिक

तौर पर साफ भी होता रहता है। उसमें मौजूद नमक के साथ रासायनिक

प्रतिक्रिया की वजह से ढेर सारा नुकसान समाप्त हो जाता है। यह एक प्रकृति

प्रदत्त विधि है। हाल के दिनों में समुद्र के पानी में जमीन के प्रदूषण की वजह

से इसकी समुचित सफाई नहीं हो पा रही है।

इसी वजह से समुद्री जल में एसिड की मात्रा बढ़ रही है। शोध के क्रम में कुछ

इलाकों में यह मात्रा खतरे की सीमा से अधिक भी पायी गयी है।

इसी वजह से वहां का समुद्री जीवन समाप्त प्राय हो चुका है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने पाया है कि समुद्र के पानी से भाप और बाद में

बादल बनने की प्रक्रिया को भी यह एसिड प्रभावित कर सकता है।

कई बार अधिक एसिड वाले जल का बादल बनने की स्थिति में जहां बारिश

होती है, वहां भी जमीन पर इस एसिड के प्रभाव से जमीन बंजर होने लगती

है। कई बार वातावरण में मौजूद प्रदूषण भी बादल के बरसने के दौरान उसमें

एसिड घोलने लगते हैं। इससे भी जमीन पर कृषि कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव

पड़ता है। वैज्ञानिकों ने इसे भीषण अदृश्य खतरा बताया है क्योंकि इस खतरे

को हम खुली आंखों से भले ही देख नहीं सकते लेकिन उससे तबाही का आना

निश्चित है।

इस एसिड युक्त जल का पृथ्वी के कार्बन चक्र से सीधा संबंध

इस तरीके से अपने ऊपर कार्बनेट का खोल चढ़ा लेता है समुद्री जीवन

विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी का कार्बन के चक्र का भी इस समुद्री जल के

एसिड से सीधा संबंध है। एसिड की वजह से ही समुद्र आधारित पृथ्वी का

कार्बन चक्र प्रभावित होता है। इस शोध से जुड़े लोग मानते हैं कि एसिड का

प्रभाव अगर बादलों के जरिए पूरी दुनिया तक फैला तो पूरी दुनिया की तबाही

का जो सिलसिला प्रारंभ होगा, उसे रोक पाना किसी के बूते की बात नहीं

होगी।

उस स्थिति में पहले समुद्री जीवन तबाह होने पर संदेह है लेकिन जमीन पर

सबसे पहले इंसान की इस जहरीले वातावरण की वजह से पूरी तरह समाप्त

होने लगेंगे। दूसरे शब्दों में यह स्थिति पृथ्वी पर से इंसानों के अस्तित्व को ही

समाप्त कर सकती है।

इस बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी से करीब 66 मिलियन वर्ष पहले

भी घटित हो चुकी है। इस दौरान भी एसिड की वर्षा की वजह से अनेक

प्रजातियां पृथ्वी से विलुप्त हो गयी थी। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक इस बात

को भी रेखांकित कर चुके हैं कि जब समुद्र में एसिड की मात्रा खतरनाक

तरीके से बढ़ जाएगी तो समुद्री प्राणियों में से कई अपने कार्बोनेट खोल को

बढ़ा लेंगे।

इसी स्थिति से यह स्पष्ट हो जाएगा कि पृथ्वी पर तबाही की प्रक्रिया प्रारंभ

हो चुकी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि दुनिया के अन्य प्राणियों में माहौल के

जैसा खुद को बदल लेने की जितनी क्षमता है, उतनी क्षमता इंसान को नहीं है।

इसलिए बदलाव प्रारंभ होने पर सबसे पहले इंसान ही उसके शिकार बनेंगे।

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