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समुद्री घोंघा अपना पूरा शरीर उगा सकता है




  • कुछ प्राणियों अपने कुछ अंग दोबारा उगा लेते हैं

  • हमला होने पर छिपकिली भी पूंछ छोड़ जाते हैं

  • सर उगा लेने की क्षमता का पहली बार पता चला

  • इस अवस्था में शायद सूर्य की रोशनी से ऊर्जा लेते हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः समुद्री घोंघा देखने में रंग बिरंगे भी होते हैं। उनकी अनेक प्रजातियां समुद्र में पायी

जाती हैं। पहली बार उनकी इस विशेषता का पता चला है कि शायद वह अपने शरीर के हर

हिस्सा दोबारा उगा सकते हैं। दरअसल सर काट लेने के बाद नया सर उगा लेने की घटना

के प्रकाश में आने के बाद इस पर गहन वैज्ञानिक शोध प्रारंभ हुआ है।

वीडियो में समझिये इसकी पूरी विशेषता

इससे पहले छिपकिली जैसे कुछ सरीसृपों द्वारा हमला से बचने के लिए अपनी हिलता

डूलता पूंछ छोड़कर भाग जाने की घटनाएं तो पहले से हमारी जानकारी में थी। यह

दरअसल किसी का शिकार बनने के लिए उनमें प्राकृतिक तौर पर विकसित हुआ था।

लेकिन पूरा शरीर ही उगा लिया जाए, इसकी जानकारी पहली बार मिली है। समुद्री घोंघा

के इस गुण पर अब गहन शोध इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि इससे चिकित्सा

विज्ञान में भी नई जानकारी और फायदे हो सकते हैं। कई बार इंसानी शरीर में असाध्य

किस्म के विकार पैदा होने की स्थिति में अगर इस तरीके से नया अंग विकसित करने की

विधि शामिल हो जाए तो निश्चित तौर पर यह क्रमिक विकास के दौर में इंसानों को और

आगे बढ़ा देगा। अगर इंसानों में यह क्षमता विकसित हो तो क्षतिग्रस्त अथवा विकारग्रस्त

होने वाले अंगों को दवा से ठीक करने के बदले नया अंग विकसित कर उसे और बेहतर भी

बनाया जा सकेगा। लेकिन समुद्री घोंघा यह काम कैसे कर लेता है, इसे पूरी तरह समझने

में अभी वक्त लगेगा। अपने शरीर का कोई हिस्सा छोड़कर भाग जाना जीव विज्ञान में

ऑटोटोमी कहलाता है। इस विधि से मारे जाने से बचने वाले प्राणी के पास यह विशेषता

होती है कि छोड़े गये अंग को वह दोबारा उगा सकता है। खास तौर पर ऐसा पूंछ के मामले

में होता है।

पूंछ छोड़कर भागती छिपकिली को हम सभी ने देखा है

अपनी फड़फड़ाती पूंछ छोड़कर भागने वाला शिकार हमलावर प्राणी को भोजन उपलब्ध

करा देता है और खुद को बचा ले जाता है। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक शरीर की कोशिकाओँ

में होने वाले बदलाव को समुद्री घोंघा से समझना चाहते हैं। ताकि यह बात और स्पष्ट हो

सके कि वह अपने लिए नया सर भी कैसा उगा लेता है। जापान में चल रहे शोध के दौरान

पहली बार इसे देखने का मौका मिला है। वहां की जीव विज्ञानी सायाका मिटोह कहती हैं

कि उन्होंने जापानी प्रजाति के एक समुद्री घोंघा को अपना सर धड़ से अलग करते देखा।

उसके बाद भी उसका शरीर काम करता रहा और फिर उसका सर एक नये शरीर को तैयार

करने में सफल रहा। शोध जारी रहने के दौरान कई अन्य समुद्री घोंगा को भी ऐसा करते

देखा गया। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सर को अलग करने के बाद यह प्रजाति पेड़ पौधों

की तरह फोटो संश्लेषण की विधि से सूर्य की रोशनी से ऊर्जा हासिल करने लगती है।

इसलिए सर नहीं होने के बाद भी वे जीवित रह जाते हैं। इस बीच उनके शरीर में क्या कुछ

होता है, यह फिलहाल एक पहेली है। नारा महिला विश्वविद्यालय की प्रोफेसर योइची यूसा

ने इस पर नये सिरे से शोध भी किया है। प्रयोग के दौरान इनलोगों ने सोलह ऐसे समुद्री

घोंघा के सर काट दिये थे। इनमें स छह ने अपने अंग दोबारा उगाना प्रारंभ कर दिया। इन

छह में से तीन जीवित हैं। इन तीनों में से एक ने तो दो बार अपना पूरा शरीर ही क्रमवार

तरीके से उगा लिया। जापान के पास पायी जाने वाली समुद्री घोंघा की दो प्रजातियों में यह

गुण होने का अब तक पता चल पाया है।

समुद्री घोंघा कटे हुए सर ने नया धड़ पैदा करता है

यूसा कहती हैं कि इससे पहले किसी प्राणी में अपना पूरा शरीर ही नये सिरे से बना लेने की

जानकारी नहीं मिल पायी थी। केचुआं भी अलग होने के बाद दो अलग अलग जीवों में

विकसित होने लगता है, इसकी जानकारी लोगों को है। कनाडा की समुद्र जीव विज्ञानी

सूसान एंटोनी कहती हैं कि यह अपने आप में अजीब स्थिति है लेकिन यह वाकई हैरान

करने वाला सच भी है। अनुमान है कि सर कट जाने के बाद वे किसी पेड़ अथवा पौधे की

तरह सूर्य की रोशनी से ऊर्जा लेकर न सिर्फ खुद को जीवित रखते हैं बल्कि नये सिरे से

अंगों की रचना भी करते हैं। सर कट जाने के बाद समुद्री घोंघा का शरीर हल्का हरा भी हो

जाता है। शोध में यह भी पाया गया है कि समुद्री घोंघा की कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं, जो

एक साथ नर और मादा होती हैं। वे आवश्यकता के मुताबिक नर अथवा मादा की भूमिका

निभा सकती हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे अपने शरीर में तुरंत ही ऐसा बदलाव करने की

भी क्षमता रखते हैं



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