सन 2300 तक समुद्री जलस्तर 50 फीट बढ़ेगा पर्यावरण बिगड़ने के नतीजे

सन 2300 तक समुद्री जलस्तर 50 फीट बढ़ेगा पर्यावरण बिगड़ने के नतीजे
  • डूब जाएंगे दुनिया के अनेक महानगर

  • दुनिया की 11 फीसद आबादी रहती है

  • वीरान होने लगे हैं अमेरिका के कई शहर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सन 2300 यानी अगली दो सदी बीतने तक समुद्र का जलस्तर करीब पचास फीट ऊपर आ जाएगा।

इस वजह से दुनिया के अनेक प्रसिद्ध शहर में समुद्र में समा जाएंगे।

पूरी दुनिया में जिस तेजी से पर्यावरण बिगड़ रहा है, उसके खतरनाक नतीजों के बारे में

वैज्ञानिकों ने यह पूर्व चेतावनी दे दी है।

दूसरी तरफ वैज्ञानिक अलग अलग तरीके से उत्तरी ध्रुब पर बर्फ को और अधिक पिघलने से

रोकने के लिए तरह तरह के उपाय कर रहे हैं।

दुनिया के अनेक देशों ने आपस में मिलकर कार्बन उत्सर्जन भी कम करने की दिशा में काम करना प्रारंभ किया है।

इसके बाद भी स्थिति में सुधार होने का कोई लक्षण अब तक नहीं नजर आ रहा है।

अभी ही समुद्री जल का तापमान गर्म होने की वजह से अनेक इलाकों का समुद्री जीवन प्रभावित होने लगा है।

इसकी वजह से समुद्री मछलियां भी अपने पारंपरिक इलाके को छोड़कर अन्यत्र चली जा रही हैं।

दूसरी तरफ जो वनस्पति खुद से हिल नहीं सकते, वे मरते जा रहे हैं।

सन 2300 तक दुनिया का समुद्र भी बदल जाएगा पूरी तरह

इसका सबसे बुरा असर कई इलाकों के कोरल रीफों पर पड़ता दिख रहा है।

इन रीफों के समाप्त होने की स्थिति में करीब 25 प्रतिशत समुद्री मछलियों की प्रजाति के

अस्तित्व पर भी स्वतः संकट आ जाएगा।

दुनिया भर के समुद्र में जिस तेजी से अंटार्कटिका के बर्फ खंडों का पानी पहुंच रहा है,

उससे रह रहकर समुद्री जलस्तर ऊपर आ जाता है।

अमेरिका के कई बड़े शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं।

जिसका नतीजा है कि इन शहरों का कारोबार पूरी तरह चौपट हो चुका है।

पर्यटकों के सहारे चलने वाले इन शहरों के हजारों भवन अब वीरान पड़े हुए हैं।

इन शहरों में संपत्ति के भाव भी कौड़ी के हो चुके हैं क्योंकि उनका कोई खरीददार नहीं मिल रहा है।

रूटेजर्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध के आधार पर जो अनुमान व्यक्त किया है उसके मुताबिक पूरी दुनिया में समुद्री जल स्तर में इस सदी के अंत तक 1.4 से 2.8 फीट की बढ़ोत्तरी होगी।

वर्ष 2150 तक यह बढ़कर 5.4 फीट तक पहुंच जाएगा और सन 2300 आते आते यह जलस्तर 50 फीट अधिक होकर अनेक इलाकों को अपने अंदर समेट चुका होगा।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि दुनिया की करीब 11 प्रतिशत आबादी इन्हीं इलाकों में रहती है।

इसके अलावा समुद्र तल से 33 फीट की ऊंचाई तक रहने वाले लोगों को भी अपने इलाकों से हटना ही पड़ेगा।

यह नई किस्म की सामाजिक और आर्थिक परेशानी पैदा करेगी।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी रिपोर्ट में बिगड़ते पर्यावरण के प्रति गंभीर चिंता जतायी है।

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