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स्कॉटलैंड का अंतिम बर्फ भी तीन सौ वर्षो में आठवीं बार पिघला




ग्लासगोः स्कॉटलैंड का प्रसिद्ध स्फिंक्स बर्फ का इलाका अब पिघल चुका है। वैसे तो पिछले तीन सौ वर्षो में इसे आठवी बार पूरी तरह पिघलता हुआ देखा जा रहा है। लेकिन इस बार की हालत को लेकर वैज्ञानिक ज्यादा चिंतित हैं।




उनके मुताबिक मौसम के बदलाव के खतरनाक परिणामों की गति अब धीरे धीरे तेज होती चली जा रही है।

दूसरी तरफ सूर्य से आ रहे सौर किरणों का तूफान भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा आ रहे हैं। इसलिए मौसम के बदलाव के अप्रत्याशित खतरनाक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

स्कॉटलैंड का स्पिंक्स बर्फ एक प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र रहा है। इसे ब्रिटेन का सबसे स्थायी बर्फीला इलाका माना जाता रहा है। अब वहां भी बर्फ नहीं बची है।

ग्लासगो में ही आयोजित संयुक्त राष्ट्र के खास सम्मेलन के बाद ऐसा होना अपने आप में महत्वपूर्ण घटना है।

ब्रिटेन के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत ब्रारियाच के बगल में यह इलाका स्थित है। यहां बर्फ की वजह से ही सालों भर पर्यटक आते रहते हैं।

अब वहां का सारा बर्फ पिघल जाने की वजह से सिर्फ पहाड़ के पत्थर ही नजर आ रहे हैं।




वैसे वैज्ञानिक रिकार्डों के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1933, 1959, 1996, 2003, 2006, 2017 और 2018 में भी स्कॉटलैंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की बर्फ के पूरी तरह पिघल जाने का रिकार्ड रहा है।

वैसे पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों के मुताबिक वर्ष 1700 में भी एक बार इसकी बर्फ पूरी तरह पिघल गयी थी।

स्कॉटलैंड का यह इलाका प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र है

इस बारे में शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि पांच वर्षों में तीन बार बर्फ का पूरी तरह पिघल जाना ही इस बात को प्रमाणित कर देता है कि तेजी से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है।

मौसम के बदलाव के इस प्रभाव से समुद्री जलस्तर के बढ़ने के अलावा भी कई संकटों के बारे में वैज्ञानिक पहले से ही आगाह करते आ रहे हैं।

इसके तहत बेमौसम बारिश, अत्यधिक बारिश और अप्रत्याशित इलाकों में इसी बारिश की वजह से आने वाली बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

दुनिया के कई इलाकों में लोग ऐसा होते हुए देख भी रहे हैं। समुद्री तट के करीब बसे इलाको में जलस्तर बढ़ने के अलावा भी समुद्री तूफान के बढ़ने की आशंका है

जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसी वजह से अधिक तूफान और चक्रवात पैदा होंगे।



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