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समुद्र तल पर अजीब नजारा देखकर वैज्ञानिक हैरान

  • आर्कटिक के स्पंज भी अब जगह बदल रहे हैं

  • इसे अब तक असंभव सा माना जाता रहा है

  • शरीर को संकुचित और फैलाकर ऐसा करते हैं

  • कैमरे में दर्ज हो रही है इसकी सारी घटनाएं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः समुद्र तल की इस एक घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। जिसे अब तक

असंभव माना जाता था अब वह नजारा भी वहां दिखने के बाद पूरे मामले की गंभीरता से

छानबीन हो रही है। दरअसल बिना आधार के स्पंज आम तौर पर आजीवन एक ही स्थान

पर बने रहते हैं। ऐसा आज तक होता आया है। पहली बार आर्कटिक के स्पंजों को जगह

बदलते देखकर वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं।

वीडियो में देखिये क्या कुछ दर्ज हुआ है

गत 26 अप्रैल को इस घटना की पुष्टि होने के बाद अब पूरे इलाके में गहराई से इस मामले

की छानबीन की जा रही है। समुद्र तल पर अत्याधुनिक यंत्रों की नजर से इसे देखा गया है।

इसमें पाया गया है कि स्पंज के एक स्थान से दूसरे स्थान तक खिसक जाने के निशान

मौजूद हैं। ऐसा पहले कभी होता हुआ नहीं देखा गया था। मैक्स प्लैंक इंस्टिटयूट ऑफ

मेरिन माइक्रोबॉयोलाजी के तेरेसा मारगांटी एवं अल्फ्रेड वेगनर होल्मज सेंटर फॉर पोलार

एंड मेरिन रिसर्च के ऑटून परसर ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि

स्पंज के साथ चलने वाले स्पाइक के निशान साफ साफ नजर आ रहे हैं। इससे स्पष्ट हो

जाता है कि वे स्थान बदल रहे हैं। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है, इस बारे में अभी पक्के तौर

पर कुछ कह पाना कठिन है। पहली बार अनेक स्थानों पर ऐसा होता हुआ देखा जा रहा है

जबकि स्पंज के एक ही स्थान पर बने रहने की पूर्व वैज्ञानिक सोच रही है। स्पंज के साथ

जुड़े स्पाइक्स एक दूसरे से भी जुड़े रहते हैं। लिहाजा उनके स्थान बदलने की स्थिति में

उसके निशान साफ साफ नजर आते हैं। इतनी अधिक संख्या में स्पंजों का स्थान बदलना

पहली बार देखा जा रहा है जो हैरान करने वाली बात है।

समुद्र तल पर कैमरों में दर्ज नहीं होता तो भरोसा नहीं होता

समुद्र तल पर कैमरों की मदद से वैज्ञानिकों ने यह देखा है कि अनेक स्पंजों के ढेर अपने

पूर्व स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान की तरफ बढ़ रहे हैं। यह सभी विकसित स्पंज हैं।

उनका स्थान बदलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके पास चलने फिरने लायक

कोई मांशपेशी अथवा कोई दूसरा अंग भी नहीं होता है। वे अपने शरीर को सिकुड़ते और

बढ़ाते हुए गति हासिल कर सकते हैं। प्रयोगशाला में पहले भी इसकी जांच हो चुकी है कि

वहां तैयार स्पंज अपने शरीर के आकार को बदलने के लिए भी ऐसा करते हैं यानी वे अपने

शरीर का आकार बढ़ाते और घटाते हैं। इससे उन्हें किसी खास आकार को हासिल करने में

सफलता मिल जाती है। बर्फ से ढके इलाकों के नीचे समुद्र तल पर ऐसी गतिविधियों की

वीडियो रिकार्डिंग भी सामने आयी है, जिसमें स्पंजों के स्पाइक के स्थान बदलने के

निशान साफ साफ नजर आ रहे हैं। जिस इलाके में ऐसा होता हुआ दिख रहा है, उसका

ऊपरी सतह हमेशा ही बर्फ से ढका रहता है। यह लैंग्सेथ रिज का इलाका है। कैमरा और

अत्याधुनिक सबमेरिन जैसे छोटे यंत्र की मदद से ऊपर स्थापित नियंत्रण कक्ष से पूरी

गतिविधि को नियंत्रित किया गया था। इसमें साफ नजर आ रहा है कि अनेक किस्म के

स्पंज अपना इलाका बदल रहे हैं। इस इलाके में स्पंज की आबादी भी दूसरे इलाकों के

मुकाबले अधिक है। इलाके में सत्तर प्रतिशत जीवित स्पंजों के इलाका बदलने की घटना

की असली वजह से बारे में वैज्ञानिक अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए तैयार नहीं हैं।

वे इसके लिए और अनुसंधान करने की बात कह रहे हैं।

कई मीटर दूरी तय किये हैं इन स्पंजों ने

स्थान बदलने के जो निशान दर्ज किये गये हैं, वे कई मीटर लंबे और कई बार कई

सेंटीमीटर ऊंचे भी पाये गये हैं। वे कई बार अपने अपने स्पाइक की वजह से एक दूसरे से

जुड़े हुए भी होते हैं। लिहाजा एक साथ अनेक स्पंजों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक चले

जाने के निशान भी साफ नजर आ रहे हैं। तमाम आंकड़ों के आधार पर तैयार थ्री डी मॉडल

में भी यह देखा गया है कि कई बार वे दिशा भी बदल रहे हैं। लिहाजा इसे सामान्य

गुरुत्वाकर्षण की वजह से होने वाली घटना के तौर पर नहीं माना जा सकता है। शायद

अपने लिए बेहतर भोजन की तलाश में स्पंज ऐसा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का प्रारंभिक

अनुमान है कि इस इलाक में समुद्र तल पर मौजूद पत्थरों के छोटे छोटे टुकड़ों में भी

खनिज की मात्रा अधिक होने की वजह से भी स्पंज भोजन के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।

इन गतिविधियों का स्पंज के वंशवृद्धि से भी कोई रिश्ता है अथवा नहीं, उसकी जांच के

लिए पानी के अंदर यंत्र से लगातार निगरानी की जा रही है। संभव है कि आने वाले दिनों में

मिलने वाले चित्रों और वीडियो से इसका भी खुलासा हो जाए।

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