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वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की ठंड में एसिड के प्रभावों की जांच की







  • प्रयोगशाला में बनाया वातावरण और किये परीक्षण

  • अंतरिक्ष की जोरदार ठंड में अलग प्रतिक्रिया होती है

  • अलग अलग परिस्थिति में अलग अलग परिणाम

  • अंतरिक्ष अभियानों के भावी शोध की चल रही तैयारी


प्रतिनिधि

नईदिल्लीः वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में उन परिस्थितियों की जांच की है, जो एसिड की प्रतिक्रिया को अंतरिक्ष में बयान करने वाले थे।

सभी को पता है कि अंतरिक्ष में कड़ाके की ठंड होती है।

शून्य से कई सौ से लेकर हजार डिग्री नीचे तक के तापमान पर हर कुछ की रासायनिक अवस्था भी बदल जाती है।

इसी सोच के तहत वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग अपने स्तर पर अंजाम दिया।

इस परीक्षण के बड़े अजीब परिणाम सामने आये।

पहली बार इस तथ्य को परखा जा सका कि दरअसल एसिड का असर अलग अलग तापमान पर

अलग अलग होता है।

पृथ्वी के सामान्य वायुमंडल में एसिड हवा के संपर्क में जिस तरीके से प्रभाव छोड़ते हैं,

उससे यह स्थिति पूरी तरह भिन्न पायी गयी है।

प्रयोगशाला में हुए परीक्षण में यह पाया गया कि अत्यधिक ठंड में अंतरिक्ष की स्थिति में एसिड सामान्य तरीके से असर नहीं करते।

प्रयोगशाला में इसके लिए हाइड्रोक्लोरिक एसिड का प्रभाव देखा गया था।

शोध के लिए इस एसिड को अंतरिक्ष की परिस्थितियों जैसी स्थिति से गुजारा गया था।

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में भी इसके लिए तापमान को काफी कम कर दिया था।

शोधकर्ताओं ने हीलियम की बूंद पर इसकी प्रतिक्रियाओं की जांच की।

यह पाया गया कि सामान्य वातावरण से अलग हटकर एसिड ने काम किया है।

स्पेक्ट्रोस्कोप और कंप्यूटर की मदद से इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी गयी थी।

यह देखा गया कि आम वातावरण की तरह एसिड ने इस स्थिति में प्रतिक्रिया नहीं की।

वैज्ञानिकों ने एसिड की आणविक संरचना के काम को देखा

एसिड और पानी के असर को जांचने के बाद यह देखा गया कि दरअसल इस माहौल में

एसिड ने अत्यंत सुक्ष्म परमाणु के स्तर पर प्रतिक्रिया की और उसकी वजह से

काफी छोटी तरंगों वाली कंपन को भी दर्ज किया जा सका।

लेकिन एसिड और पानी के मिश्रण पर अजीब घटना भी दर्ज की गयी।

चार बूंद पानी एसिड में मिलाये जाने के बाद यह देखा गया कि सबसे पहले एसिड ने अपने को पानी से अलग कर लिया।

इसके बाद एसिड का एक प्रोटोन पानी को उपलब्ध कराते हुए अलग से हाईड्रोनियम का निर्माण किया गया।

दूसरी तरफ शेष क्लोराइड के अणु अपनी जगह पर कायम रहते इस हाइड्रोनियम को

पानी की तीन अन्य बूंदों के साथ घूलने में मददगार बने।

इस तरीके से यह साबित हो गया कि पृथ्वी की तरह एसिड की सामान्य प्रतिक्रिया इस माहौल में नहीं हुई।

इसी प्रयोग के आधार पर वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे हैं कि अंतरिक्ष में मौजूद एसिड भी

अत्यंत कम तापमान पर शायद इसी तरीके से प्रतिक्रिया कर अलग यौगिकों का निर्माण कर रहे हैं।

प्रयोग के अगले चरण में चार बूंद पानी को बर्फ की शक्ल में बदलने के बाद

उसमें जब हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाया तो उसकी अलग प्रतिक्रिया देखी गयी।

इस बार एसिड न तो अलग हुआ और न ही उसके अणु पानी में घूले।

उसके सारे प्रोटोन क्लोराइड अणु के साथ ही जुड़े नजर आये।

अंतरिक्ष अभियान की संभावनाओं को परखने में की जांच

इस शोध से जुड़े प्रोफसर मार्टिना हावेनिथ ने कहा कि इस प्रयोग से

कमसे कम इतनी तो जानकारी मिली है कि अंतरिक्ष में इनकी वैसी प्रतिक्रियाएं नहीं होती हैं,

जैसी की पृथ्वी के सामान्य तापमान और वायुमंडल में होती हैं।

यानी कहीं पर एसिड खुद के अणु का दान कर कुछ और का निर्माण करता है

तो कहीं पर यह किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया का भागी नहीं बनता।

अलग अलग अवस्था में अलग अलग प्रतिक्रिया का यही निष्कर्ष निकलता है।

इस एक प्रयोग से अन्य तमाम एसिडों पर भी ऐसी ही रासायनिक प्रभाव का अंदेशा है।

जबकि तापमान काफी कम हो। वैसे इस अनुसंधान के बाद अब वैज्ञानिक आणविक मात्रा में

बदलाव कर इसी बात को जांचना चाहते हैं कि कहीं अलग अलग अनुपात में उनकी प्रतिक्रियाएं

कहीं भिन्न तो नहीं होती हैं।

इसके आधार पर महाकाश अभियान में शामिल की जाने वाली योजनाओं को

अंतिम रुप प्रदान किया जा सकेगा।


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