उम्र के रोकने और घटाने की तरकीब पर मिली वैज्ञानिकों को सफलता

उम्र के रोकने और घटाने की तरकीब पर मिली वैज्ञानिकों को सफलता
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  • एक्सेटर विश्वविद्यालय में हुआ है प्रयोग

  • कोशिकाओं को फिर से सक्रिय कर सकेंगे

  • उम्र जनित कई बीमारियों से मुक्ति मिलेगा

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः उम्र को रोकने और उसे उल्टा घूमाने में भी वैज्ञानिक अब सफल हो चुके हैं।

वैज्ञानिक परीक्षणों में इस विधि के कारगर होने के बाद वैज्ञानिकों के बीच इस सफलता की जानकारी दी गयी है।

इसके तहत मानव कोशिकाओं के अंदर बाहरी मदद से कुछ बदलाव किये गये थे।

इसी वजह से उम्र को उल्टा चलाने की प्रक्रिया में वैज्ञानिकों को यह सफलता मिल पायी है।

एक्सेटर विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल में यह परीक्षण चलाया गया था।

इसके तहत जो प्रयोग किये गये थे, उसके निष्कर्षों के बारे में अब सार्वजनिक घोषणा कर दी गयी है।

यह बताया गया है कि मानव शरीर में मौजूद कुछ खास किस्म के प्रोटिन ही

शरीर के जिनों को काम करने का संचालन निर्देश दिया करते हैं।

इसी वजह से इंसान धीरे धीरे उम्रदराज होता है।

वैज्ञानिकों ने उन सेलों की पहचान कर उन्हें दोबारा से सक्रिय करने में सफलता पायी है,

जिससे आदमी चिर युवा बना रह सकता है।

इसके लिए पहले पशुओं पर प्रयोग किये गये थे।

वहां प्रयोग सफल होने क बाद उन्हें इंसानों पर आजमाये जाने की तैयारी चल रही है।

वैज्ञानिक शोध प्रबंध में बताया गया है कि मानव अथवा पशुओं के शरीर में मौजूद कोशिकाएं ही इसे असल में नियंत्रित करती हैं।

इन कोशिकाओं के विखंडित होकर नई कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया जब धीमी पड़ने लगती है तो इंसान उम्रदराज होने लगता है।

दरअसल शरीर में मौजूद खास प्रोटिन इन कोशिकाओं को आगे से विखंडन की प्रक्रिया बंद कर नई कोशिकाओँ के निर्माण करने से रोक देते हैं।

अब प्रयोगशाला में इसी संकेत को नये सिरे से चालू करने की विधि आजमायी जा चुकी है।

उम्र से जुड़ी कई बीमारियों का भी स्थायी ईलाज संभव होगा

विश्वविद्यालय के प्रोफसर लोरना हैरिस ने बताया कि इस उपलब्धि से पूरा दल काफी उत्साहित है।

इसे और अधिक विकसित कर शरीर की कोशिकाओं को नये सिरे से विखंडन के निर्देश दिये जा सकते हैं।

जब फिर से शरीर की कोशिकाओं के विखंडन से नई कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है तो इंसान की आयु फिर से घटने लगती है।

यानी चेहरे और शारीरिक शक्ति से वह फिर से युवा हो सकता है।

वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि उम्र की वजह से होने वाली अनेक किस्म की बीमारियों से भी इस विधि से मुक्ति पायी जा सकती है।

खासकर याददाश्त चले जाने और शारीरिक अक्षमता से तो निश्चित तौर पर छुटकारा मिल सकता है।

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