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एक विशाल तारा को पहली बार टूटकर बिखरते हुए देखा




  • खगोल विज्ञान की दुनिया में पहली बार ऐसा नजर आया
  • एक सौ तीस दिन पहले सतर्क किया गया था
  • उसके बाद से यह लगातार बड़ा होता रहा
  • ऐसे विस्फोट को दूरबीन के सहारे देखा
राष्ट्रीय खबर

रांचीः एक विशाल तारा विस्फोट के बाद टूटकर पूरे अंतरिक्ष में बिखर गया। खगोल वैज्ञानिकों को पहली बार ऐसा देखने का अवसर मिला है। इसके बाद उस घटना के विश्लेषण और अन्य आंकड़े भी सार्वजनिक कर दिये गये हैं। धरती पर कई स्थानों पर स्थापित खगोल दूरबीनों से अंतरिक्ष के इस खास इलाके पर वैज्ञानिक पहले से ही नजर रखे हुए थे।




इसी बीच एक लाल रंग के तारे का आकार लगातार बढ़ते देख उस पर ध्यान केंद्रित किया गया था। यह लाल रंग का विशाल तारा धीरे धीरे बड़ा होता चला गया और उसकी रोशनी भी अत्यधिक तेज होकर पहले नीली और फिर सफेद हो गयी।

इसके बाद वह एक विशाल तारा विस्फोट कर गया। विस्फोट के बाद उसके कण आस पास के इलाके में सौर कणों की शक्ल में दूर तर फैलते चले गये। इस घटना को वैज्ञानिकों ने पहली बार देखा है।

एक विशाल तारा कैसे टूटता है इसका विश्लेषण भी

इस एक विशाल तारा का नाम वैज्ञानिकों ने एनजीसी गैलेक्सी के पास खोजा था। यह इलाका सौरमंडल में हमारी धरती से करीब 120 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं का मानना है कि विस्फोट करने वाला यह एक विशाल तारा आकार में सूर्य से भी करीब दस गुणा अधिक बड़ा था।

उसका आकार बड़ा होते देख तारा पर नजर रखने वाले खगोल वैज्ञानिको ने देखा कि इस विस्फोट के पहले ही इस तारा से काफी मात्रा में गैस और ऊर्जा का निकलना भी तेज हो गया था। इस एक विशाल तारा का नाम बेटेलगियूज बताया गया है।




अब इस विस्फोट के बाद वहां क्या कुछ हुआ होगा, इस पर वैज्ञानिक माथापच्ची कर रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह विस्फोट के बाद सौर कणों में बिखर गया होगा तो कुछ लोग मानते हैं कि इस भीषण विस्फोट के बाद वह एक अत्यंत ठोस न्यूरॉन तारे में तब्दील हो गया होगा।

वहां क्यों विस्फोट हुआ इस पर शोध जारी है

अनुमान है कि इस एक विशाल तारा पर मौजूद गैसों की आपसी प्रतिक्रिया की वजह से ऐसा हुआ है और अंतरिक्ष में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिसके बारे में आधुनिक विज्ञान को बहुत अधिक जानकारी अब तक नहीं है। वहां मौजूद हाईड्रोजन, हिलियम और अन्य पदार्थ ही विस्फोट पैदा कर सकते हैं।

इनकी मूल संरचना में लोहा भी होता है। इसलिए जब लोहा इस विस्फोट में शामिल हो जाता है तो वह और विशाल हो जाता है। इसमें जब आग फैलने लगती है और लोहा उसमें शामिल हो जाता है तो यह आग धीरे धीरे उसके केंद्र तक जा पहुंची है। वहां आग लगने की वजह से ही यह फैलने लगता है और अंततः विस्फोट कर जाता है।

करीब 130 दिन पूर्व खगोल वैज्ञानिकों को इस एक विशाल तारा के बारे में सूचना मिली थी। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के खगोल विज्ञान प्रयोगशाला की दूरबीन से इसे देखा गया था। उसके बाद से इसे देखते रहने की वजह से पहली बार किसी एक विशाल तारा के विस्फोट के बारे में यह दृश्य देखने को मिला।



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