समय को पीछे ले जाने की क्षमता हासिल करने वाले हैं वैज्ञानिक

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  • क्वांटम कंप्यूटर की मदद से समय पर नियंत्रण की कोशिश

  • आम इंसानों के जीवन पर कोई काम नहीं

  • सौर मंडल की संरचना पर होगा प्रयोग

  • तकनीक को और सटीक बनाने की कोशिश

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः समय को पीछे लौटाने की स्थिति किसी काल्पनिक कथा जैसी है।

अनेक फिल्मों में इसे रोचक तरीके से दिखाया भी जा चुका है।

अब क्वांटम कंप्यूटिंग की मदद से वैज्ञानिक शायद ऐसा कर पायेंगे।

यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो भौतिकीशास्त्र के समय का सिद्धांत भी आधुनिक विज्ञान में गलत साबित किया जा सकेगा।

वैसे इस बात को समझ लेना चाहिए कि वैज्ञानिकों का यह प्रयोग किसी इंसानी जिंदगी के लिए नहीं

बल्कि सौरजगत के समय को बदलने और समझने का प्रयास भर है।

इसकी मदद से वैज्ञानिकों को सौर मंडल की संरचना को समझने और समय समय पर उसमें हुए बदलाव को समझने में मदद मिलेगी।

यदि ऐसा हो पाता है तो समय की घड़ी के साथ साथ हमारे सौर मंडल में कब और कैसे क्या बदलाव हुए हैं

इसे भी और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

इस विधि से लोग अपने कंप्यूटर पर किसी भी काल खंड के पीछे की घटनाओं को देख और समझ पायेंगे।

मास्को के इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स एंड टेक्नोलॉजी में यह प्रयोग चल रहा है।

जिसमें प्रारंभिक सफलता भी हासिल हुई है।

इस शोध के साथ स्विटजरलैंड और अमेरिका के भी कुछ वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं।

वे इस समय को पीछे ले जाने की तकनीक को और बेहतर और कुशल बनाने पर काम कर रहे हैं।

समय के इस परीक्षण को और सटीक बनाने की कवायद जारी

इस शोध दलके नेता डॉ गार्डे लेसोविक ने कहा कि प्रयोगशाला में प्रारंभिक तौर पर थर्मोडायनामिक्स के सिद्धांत को उल्टा चलाने में सफलता मिली है।

इसे रोचक अंदाज में टाइम मशीन का नाम दिया गया है।

इस मशीन का नाम हम पहले भी कई फिल्मों में देख-सुन चुके हैं।

घटनाक्रमों को कंप्यूटर की बाईनरी संख्यावलि (केवल शून्य और एक) में सजाने के क्रम में जो कड़ी तैयार होती है,

उसी कड़ी को पीछे घुमाकर परिस्थितियों को समझने का काम चल रहा है।

सुनने में यह जितना सरल लगता है दरअसल में यह उतना ही कठिन कार्य है।

जिसे वैज्ञानिक आगे बढ़ा रहे हैं।

डॉ लेसोविक ने कहा कि किसी पुल टेबल पर एक त्रिकोणाकार में रखी गेंदों को खेल में क्यू (खेल का डंडा) से

मारकर इधर उधर करने की बात को पुल जानने वाले को समझ में आयेगी।

लेकिन अगर उन्हीं गेंदों को बिखरी अवस्था से वापस त्रिकोणाकार स्थिति में लाया जाए तो बहुतों को बात समझ में ही नहीं आयेगी।

लेकिन इसी तरीके से समय को पीछे करने की कवायद चल रही है।

शोध दल को प्रारंभिक अनुसंधान के तहत समय को पीछे ले जाने की कोशिशों में 85 प्रतिशत सफलता मिली है।

लेकिन जब इस प्रयोग में अन्य वैज्ञानिक शर्तों को जोड़ दिया जाता है तो सफलता का दर घटकर 50 प्रतिशत आ रहा है।

इसी वजह से इसे और सुधारने की जरूरत महसूस की जारही है।

ताकि सौर मंडल के इतिहास को समझने के काम आने वाले

सारे वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर समय को पीछे ले जाकर सटीक समाधान हासिल किया जा सके।

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