सूर्य की परिक्रमा कर रहे तीसरे यान ने पहली बार दी सूर्य की अनोखी जानकारी

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  • सूर्य की उत्तरी ध्रव कुछ ऐसा ही नजर आता है

  • वैज्ञानिक आंकड़ों से निकाला निष्कर्ष

  • तीन में से दो यानों में कैमरा नहीं

  • 2020 में जाएगा कैमरा युक्त नया यान

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सूर्य के उत्तरी ध्रुव को हम पहली बार समझ पायेंगे।

नासा और कनाडॉ की राष्ट्रीय साइंस काउंसिल के संयुक्त प्रयास से भेजे गये यान यूलाइसिस ने यह काम कर दिखाया है।

यह यान करीब 32 करोड़ 20 लाख मील की दूरी से सूर्य के इस तरफ झांक पाया है।

बताते चलें कि यान सूरज पृथ्वी की दूरी इससे आधी है।

वैसे नासा का पार्कर सोलर प्रोव भी अपनी यात्रा पर चक्कर काटता हुआ आगे बढ़ता जा रहा है।

वह भी अन्य अंतरिक्ष यानों की तरह अपने रास्ते में पड़ने वाले तमाम ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण के बल को

इस्तेमाल करते हुए अपने पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

यह पार्कर सोलर प्रोव अब तक पृथ्वी से छोड़े गये किसी भी यान के मुकाबले

सबसे अधिक दूरी और सबसे अधिक गति हासिल कर चुका है।

उधर इन दो यानों के अलावा यूरोपीय स्पेस एजेंसी द्वारा भेजे गये यान प्रोवा 02 ने भी इसकी तस्वीर पहली बार भेजी है।

अपनी कार्ययोजना के अनुसार यह यान पंद्रह वर्षों में तीन बार सूरज के चक्कर काट चुका है।

सूर्य का आंकड़ा भेजने वाले इस यान में कोई कैमरा नहीं है

लेकिन इनमें से दो यानों में कोई कैमरा नहीं होने की वजह से वे सीधे जीवंत चित्र नहीं भेज पाते हैं।

अलबत्ता इन यानों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों को इसके मॉडल बनाने में मदद मिलती है।

मालूम हो कि नासा ने भी सूर्य के करीब जाकर वहां की स्थिति का अध्ययन करने के लिए पार्कर प्रोव भी भेजा है।

प्रोवा 02 अंतरिक्ष यान से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इसका चित्र तैयार किया गया है।

इसके मुताबिक अत्यधिक गर्मी और निरंतर विस्फोटों के बीच सूरज का यह छोर किसी गहरे काले रंग के गड्डे जैसा नजर आता है।

पहली बार किसी यान की मदद से हम सूर्य के इस छोर को देख पा रहे हैं।

इसके पहले पृथ्वी से तथा अन्य अंतरिक्ष यानों से भी सूर्य को अलग अलग कोणों से देखा गया था।

लेकिन कोई यान इससे पहले सूर्य के इस छोर की पीछे तक नहीं पहुंच पाया था।

यूरोपिय स्पेस एजेंसी का यह जान पृथ्वी के बाहर से सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।

पृथ्वी की तरफ से देखने पर सूर्य एक गोलाकार सा आकार नजर आता है।

सामान्य नजर में यह गोल और चपटी चमकती हुई वस्तु है। वास्तव में यह चपटी वस्तु गोलाकार है।

जो अपने बड़े आकार की वजह से हमें पूरी तरह नजर भी नहीं आती है।

अब वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसके उत्तरी छोर का मॉडल तस्वीर बनायी है।

वैज्ञानिक आंकड़ों का निष्कर्ष है कि इन छोरों पर भी अल्ट्रावायोलेट किरणों से

इस बात की पुष्टि होती है कि वहां की स्थिति भी हर पल बदलती रहती है।

सूर्य के उत्तरी छोर पर हर पल बदलती है स्थिति

पार्कर सोलर प्रोव भी अपनी यात्रा पर बहुत आगे निकलने के बाद भी सूर्य के इस छोर की तरफ नहीं जायेगा।

इसलिए सूर्य की असली और जीवंत तस्वीर देखने के लिए हमें वर्ष 2020 में

अंतरिक्ष में जाने वाले नये यान इएसए सोलर आर्बिटर का इंतजार करना पड़ेगा।

इस अंतरिक्ष यान में लगे कैमरे काफी दूरी से ही सूर्य के हर हिस्से की तस्वीर

काफी विस्तार से खींच लेने के लिए सक्षम बनाये जा रहे हैं।

इस बीच पार्कर सोलर प्रोव काफी करीब से सूर्य के ठीक बीच और छोर की घटनाओं का विश्लेषण कर लौट आयेगा।

इस दौरान वह आंकड़े और अपने कैमरों के चित्र भी भेजता रहेगा।

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