वैज्ञानिकों ने तैयार की विद्युतीय प्रोटिन स्वीच

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  • रक्तकोशिकाओं के अंदर से निर्देश प्राप्त करेंगे
  • किसी भी हिस्से में करेगा काम
  • खराब और शिथिल अंगों को सक्रिय करेगा
  • नई पीढ़ी के ईलाज में वरदान बनेगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः वैज्ञानिकों ने एक ऐसी विद्युतीय प्रोटिन स्विच तैयार किया है,

जो अंदर में निर्देश प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि इस प्रोटिन स्विच से शरीर के

अंदर की अनेक किस्म की बीमारियों का ईलाज अब आसानी से संभव हो सकेगा।

वैज्ञानिक इस बात को लेकर भी उत्साहित है कि इसकी मदद से खराब

और शिथिल पड़ चुके अंगों को नये सिरे से सक्रिय कर पाना भी अब संभव होगा। 

ह्यूस्टन के राइस विश्वविद्यालय के एक शोध दल ने ई-कोली बैक्टेरिया का इस्तेमाल कर इनका परीक्षण किया है।

इस स्विच के जरिए रक्तकोशिकाओं के अंदर इलेक्ट्रान की गति और दिशा बदली जा सकती है।

अगली पीढ़ी के बॉयोइलेक्ट्रानिक्स की दुनिया के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस प्रोटिन स्विच के अंदर मौजूद धातु अन्य धातु के संपर्क के बाद अपना काम प्रारंभ कर लेते हैं।

रक्त कोशिकाओं के अंदर होने के बाद भी इन्हें बाहर से निर्देश देकर चालू अथवा बंद किया जा सकता है। 

वैज्ञानिकों को इससे खराब पड़े अंगों को भी सुधारने में मदद मिलेगी

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक जोफ सिलबर्ग ने बताया कि यह स्विच भी

दरअसल एक प्रोटिन से ही तैयार पदार्थ है, जो अपनी विशेषताओं की वजह से विद्युतीय कार्रवाई कर सकता है।

वर्तमान में कुछ नई किस्म की दवाओं में यह गुण विकसित किया गया है कि

वे मानव शरीर के अंदर रहते हुए एक खास समय पर ही काम करें।

अब इस स्विच के आ जाने से यह दवाई का काम भी ये प्रोटिन स्विच करते रहेंगे।

वैज्ञानिकों को अंदर की गतिविधियों पर नजर रखते हुए इन प्रोटिनों को निर्देशित करने की सुविधा प्राप्त होगी। 

वर्तमान में शरीर के अंदर प्रोटिन ही विभिन्न हिस्सों में विद्युतीय तरंग ले जाने का काम करते हैं।

यानी इसकी भूमिका एक बिजली के तार के जैसी होती है।

अब नयी प्रजाति के प्रोटिन स्वीच से यह माना जा सकता है कि

पूरा बिजली का जेनरेटर ही इंसानी शरीर के अंदर होगा,

जिसे जब चाहें आप बाहर से निर्देश देकर चालू कर सकते हैं। 

प्रोफसर सिलबर्ग ने कहा कि आम तौर पर सुनने में प्रोटिन एक बहुत छोटा सा शब्द है

लेकिन इस एक प्रोटिन के कण में इतनी सारी सूचनाएं संकलित होती हैं,

जिन्हें आसानी से व्यक्त नहीं किया जा सकता।

इसलिए ऐसे किसी एक प्रोटिन के होने से शरीर के अंदर की अनगिनत

गतिविधियों को संचालित और संशोधित किया जा सकेगा।

इसके माध्यम से दिमाग वैसे विद्युतीय संकेत पैदा भी कर सकेगा,

जो किसी अंग के शिथिल पड़ जाने की वजह से बंद हो गये हैं।

नये सिरे से इन इलाकों में विद्युती प्रवाह के रक्त कोशिकाओं के प्रवाह से खराब और शिथिल पड़े अंग भी सक्रिय हो जाएंगे। 

फेराडोक्सीन प्रोटिन की तर्ज पर बना है यह

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे लौह और गंधक आधारित

एक प्रोटिन जिसे फेराडोक्सीन कहा जाता है, की तर्ज पर बनाया गया है।

फेराडोक्सीन का इस्तेमाल जीवन के हर पहलु में इलेक्ट्रान के स्थानांतरण के लिए होता है।

लिहाजा इस पद्धति से तैयार विद्युतीय प्रोटिन स्विच हर इलाके पर काम कर पायेगा। 

शोध दल के सदस्यों ने बताया कि इस दिशा में शोध के तहत अनेक किस्म की तैयारियां हो चुकी है। इसके तहत बिजली के कैपासीटर और रजिस्टर भी बनाये जा चुके हैं।

यह पहला मौका है जब ऐसा कोई स्विच तैयार किया गया है।

उम्मीद है कि इसकी मदद से रक्त कोशिकाओं को डिजीटल संकेतों के माध्यम से निर्देशित और नियंत्रित कर पाना भी भविष्य में संभव होगा। 

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