वैज्ञानिकों ने तैयार किया अति सुक्ष्म आकार के नैनो रोबोट

वैज्ञानिकों ने तैयार किया अति सुक्ष्म आकार के नैनो यंत्र
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पैरों वाला यह रोबोट आपके शरीर के अंदर चहलकदमी करेगा
मुख्य काम किसी अंग तक दवा पहुंचाना
आगे और पीछे दोनों तरफ चल सकेगा
चार ईंच की सिलिकॉन से लाखो यंत्र
रोबोट को और विकसित करने की तैयारी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः वैज्ञानिकों ने एक चार पैरों वाला नया रोबोट तैयार किया है।

यह रोबोट आकार में बहुत ही छोटा है।

इसलिए इंसानी शरीर के अंदर इसे डाला जा सकता है।

शरीर के अंदर यह रोबोट अपने चार पैरों की मदद से चहलकदमी कर सकेगा।

दरअसल इस रोबोट का विकास शरीर के अंदर खास खास समय पर खास अंग तक दवाई का डोज वितरित करने के लिए ही किया गया है।

अब इसका प्रारंभिक परीक्षण सफल हो चुका है।

इस रोबोट की विशेषता यह है कि यह बाहर से प्राप्त होने वाले निर्देशों के आधार पर शरीर के अंदर किसी भी स्थान तक पहुंच सकता है।

इसकी भूमिका शरीर के किसी खास अंग तक खास दवा पहुंचाने की ही होगी।

चिकित्सा विज्ञान में पहले ही इस श्रेणी की दवाइयों का इस्तेमाल होने लगा है, जो खास खास समय पर अपने आप ही दवा की डोज शरीर को पहुंचाते रहते हैं।

अब इस नये किस्म के रोबोट के बन जाने के बाद किसी एक स्थान पर भंडारण की हुई दवा को किसी नियत समय पर किसी अंग तक ले जाने में यह काम कर सकेगा।

इसके चार पैर ही उसे किसी भी हिस्से तक चलकर जाने में मदद करेंगे।

इस तकनीक का विकास पेनिनसिल्वानिया विश्वविद्यालय ने किया है।

बाद में इस शोध में कोर्नेल विश्वविद्यालय के शोध कर्ता भी शामिल हुए हैं।

इस शोध को इस मुकाम तक पहुंचान में पेनिनसिल्वानिया वि.वि. के सहायक प्रोफसर मार्क मिस्कीन के साथ प्रोफसर इटाई कोहेन और पॉल मेक्वेन के अलावा शोध कर्ता अलेजेंडारो कार्टेस की भूमिका रही है।

अति सुक्ष्म रोबोटिक्स की दुनिया में निरंतर शोध हो रहे हैं।

इनमें से अधिकांश को सिर्फ इसी लक्ष्य के साथ तैयार किया जा रहा है

ताकि वह इंसानी अथवा किसी अन्य प्राणी के शरीर के अंदर प्रवेश कर बाहर से प्राप्त होने वाले निर्देशों के आधार पर काम कर सके।

इन चार पैरों वाले रोबोटों की उस कड़ी का सबसे नया आविष्कार समझा जा रहा है।

प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 4 ईंच लंबे एक सिलिकॉन की पर्त से 70 माइक्रोन लंबे ऐसे लाखों रोबोट बनाये जा सकते हैं।

अलबत्ता उन्हें तैयार करने में कई सप्ताह का समय लगता है।

वैज्ञानिकों ने इसके संचालन और निर्माण विधि को स्पष्ट किया

इन रोबोटों के बारे में बताया गया है कि हर रोबोट के अंदर अत्यंत पतला आयताकार शीशे की झिल्ली है।

इनके ऊपर सिलिकन की काफी बारिक पर्त चढ़ायी गयी है।

हर दो अथवा चार रोबोट को एक साथ जोड़ा जा सकता है ताकि वे बाहरी निर्देश प्राप्त कर सकें।

इन रोबोटों के पैर प्लेटिनम और टाइटेनियम की एक-एक बारिक पर्त के उपर एक सौ एटम की पर्त से बने हैं।

वैसे वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि बाद में टाइटेनियम के बदले ग्राफाइन का इस्तेमाल किया जाने वाला है।

इनके संचालन की विधि के बारे में बताया गया है कि जब कोई लेजर तरंग इनके सोलर सेल के अंदर पहुंचती है तो उसके अंदर भी विद्युतीय तरंगों का प्रवाह होने लगता है।

इसकी मदद से रोबोट के पैरों को आगे अथवा पीछे चलाया जा सकता है।

पैरों में लगे टाइटेनियम की परत कड़ी रहती है जबकि प्लेटिनम फैलकर लचीलापन प्रदान करती है।

इस कारण पैर मुड़कर चलने लगते हैं।

इसी विधि से उसे आगे अथवा पीछे चलाया जा सकता है।

आकार में ये रोबोट इतने छोटे हैं कि इन्हे किसी भी सामान्य इंजेक्शन के जरिए इंसान के शरीर के अंदर डाला जा सकता है।

प्रारंभिक अवस्था में इन रोबोटों को चमड़ी के सिर्फ गहराई पर रखा जाएगा,

जहां से वे बाहरी निर्देश पाकर चलते रहेंगे।

इससे लेजर किरणों का प्रभाव भी यथावत बना रहेगा।

इस प्रयोग के सफल होने के बाद वैज्ञानिकों का दल इससे अधिक विकसित रोबोट बनाने में जुटे हुए हैं।

ताकि रोबोट अल्ट्रासाउंड और चुंबकीय तरंगों से भी ऊर्जा प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा रोबोट में सेंसर, घड़ी और खुद को नियंत्रित करने वाले उपकरण लगाने की भी योजना है।

मिली जानकारी के मुताबिक इसी माह बोस्टन में होने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय बैठक में इस शोध के बारे में और जानकारी दी जाने वाली है।

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