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मानव जाति की सारी जिनोम श्रृंखला खोज लेने का दावा किया

  • अंतर्राष्ट्रीय शोध दल की कई साल की उपलब्धि

  • आठ प्रतिशत को तलाशने में अधिक वक्त लगा

  • हर जिनोम श्रृंखला का अपना अपना काम होता है

  • गंभीर किस्म की बीमारियों में मददगार बनेगा शोध

रांचीः मानव जाति की सारी जिनोम श्रृंखला के बारे में अब वैज्ञानिक जानते हैं, ऐसा दावा

किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि इनमे कई ऐसे हैं, जिनके बारे में पहले से

कोई सुराग तक नहीं था। इस काम को पूर करने में करीब बीस साल लगे हैं क्योंकि इंसान

की पहली जिनोम की खोज अभी से करीब दो दशक पूर्व की गयी थी। वैसे इंसानी जीवन

चक्र के सबसे गूढ़ रहस्य में से अधिकांश पहले ही खोज लिये गये थे लेकिन उसके बाद भी

करीब आठ प्रतिशत जिनोम के बारे में वैज्ञानिकों को कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। इन्हें

बड़ी सावधानी के साथ एक एक कर खोजा गया है। अब इन आठ प्रतिशत रहस्यमय

जिनोम की खोज से इंसानी जिनोम श्रृंखला की पूरी कड़ी पूरी होने का दावा किया गया है।

इस काम को करने के लिए वैज्ञानिकों को नई तकनीक का इस्तेमाल भी करना पड़ा है

क्योंकि पूर्व की विधि से इनका कोई अता पता नहीं चल पा रहा था। यूनिवर्सिटी ऑफ

कैलिफोर्निया (सांता क्रूज) की शोधकर्ता कारेन मिगा ने इस बारे में कहा कि यह ऐसा काम

था, जिसमें आपको पता ही नहीं था कि आप जो कुछ कर रहे हैं, उसका अंत में क्या नतीजा

निकलेगा। साथ ही यह पहली बार भी किया जा रहा था। लिहाजा शोधकर्ताओं को हर

कदम आगे बढ़ाने में दिक्कत तो हो रही थी क्योंकि इससे पहले इस जांच की कोई प्रचलित

विधि नहीं थी। डीएनए की पहचान करने के काम में जुटी दो निजी कंपनियों पैसिफिक

बॉयोसाइंस (कैलिफ) और ऑक्सफोर्ड नैनोपोर ने इसमें रास्ता दिखाया है। दोनों ही डीएनए

की शोध में काफी तरक्की कर चुके हैं।

मानव जाति के आठ जिनोम रहस्यमय थे

यूरोपियन बॉयोलॉजी लैब के उप निदेशक इवान बिरनी और हावर्ड के जॉर्ज चर्च ने इसे

महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है जॉर्ज ने कहा कि इससे पहले मानव जाति यानी पूरे इंसान के

ढांचा का यह विश्लेषण कभी नहीं किया गया था। जो जिनोम श्रृंखला पहले अज्ञात रह गये

थे, उन आठ की खोज से यह कड़ी पूरी हुई है, इसलिए उन्हें ज्यादा महत्वपूर्ण आंका गया

है। इस काम के पूरा होने के बाद इंसानी शरीर के डीएनए आधार को साढ़े चार प्रतिशत

बढाया गया है। पहले वैज्ञानिक आंकड़ों में यह 2.92 बिलियन थे, जिन्हें अब 3.05

बिलियन किया गया है। इससे इंसानी शरीर काम कैसे करता है, इस बारे में और बेहतर

जानकारी मिलने की उम्मीद है।

ईलाज में भी यह जानकारी बहुत काम की होगी

वैज्ञानिक मानते हैं कि इनकी पूरी श्रृंखला के सामने आने के बाद मानव जाति के शरीर में

जो गड़बड़ियां होती हैं, उनका जिनोम श्रृंखला से क्या रिश्ता होता है, उसका पता चल

पायेगा। क्योंकि अब जिनोम विश्लेषण की तकनीक अपेक्षाकृत सस्ती हो चुकी है। इससे

आने वाले दिनों में गंभीर किस्म की बीमारियों से पीड़ित रोगियों के ईलाज में भी फायदा

होने जा रहा है। हो सकता है कि जिनोम की गड़बड़ी की पहचान कर सिर्फ उन्हें ही

दोषमुक्त करने से इंसान को अपनी बीमारी से स्थायी तौर पर मुक्ति मिल जाए। डीएनए

के सामान्य ढांचों के बीच छिपे इस छोटे छोटे जिनोम श्रृंखला की अपनी अपनी भूमिका है।

वे शरीर की गतिविधियों को संचालित करने के लिए प्रोटिन निर्देश जारी करते हैं और हर

छोटी सी छोटी कड़ी की अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। इसलिए हर छोटी श्रृंखला

की जानकारी मिलने के बाद उनके काम करने के तरीकों की पहचान कर मानव जाति की 

बीमारियों का ईलाज पहले के मुकाबले अधिक आसान हो जाएगा। अब जिनोम श्रृंखला की

जांच से ही यह पता लगाया जा सकेगा कि इंसान की बीमारी का असली राज क्या है और

उसका पता चल जाने के बाद ईलाज भी आसान हो जाएगा।

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