अंतरिक्ष में झांकते हुए चकित हैं दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक

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  • सूर्य के चारों तरफ चक्कर काट रहा है अजीब आकार का उल्कापिंड

  • एक तरफ से दो चिपका हुआ गोला नजर आते हैं

  • दूसरी छोर से चिपटे आकार के दिख रहे हैं दोनों

  • करीब चार खरब मील की दूरी पर चक्कर काट रहे

  • इनसे सौर मंडल की सृष्टि का भी कुछ पता चल पायेगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंतरिक्ष विज्ञान अब लगभग हर रोज कुछ न कुछ नई जानकारी लेकर सामने आ रहा है।

इस बार वैज्ञानिकों ने एक ऐसे उल्कापिंड जैसी वस्तु का पता लगाया है।

यह वस्तु भी सूर्य के चारों तरफ चक्कर काट रहा है।

पहले इसे एक साथ जुड़े दो गोलाकांड पिंड समझा गया था।

दूसरे कोण से देखने पर यह स्पष्ट हुआ कि दरअसल यह गोलाकार नहीं है और चपटे आकार का है।

दूसरी तरफ से देखने की वजह से वैज्ञानिकों को पहले यह गोलाकार नजर आया था।

दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हैं और उसी अवस्था में सूर्य के चक्कर काट रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने इसे 2014 एम यू 69 नाम दिया है। वैसे इसे अल्टिमा थूले भी कहा जाता है।

यूट्यूब के वीडियो में देखें इस अद्धुत पिंड को

वर्तमान में यह पत्थर करीब चार खरब मील की दूरी पर है।

यान ने इसकी जो तस्वीरें खींची है, उन्हें पृथ्वी के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचने में बीस महीने लग जाएंगे

क्योंकि बीच की अवधि में यह यान अपने नियंत्रण कक्ष के संपर्क में नहीं रहेगा।

वैज्ञानिकों ने बताया कि अपने अंतरिक्ष अभियान के क्रम में न्यू होरिजन इस पत्थर समूह से करीब 22 सौ मील की दूरी से गुजरा था।

इस वक्त यान की अपनी गति करीब 32 हजार 200 मील प्रति घंटे की थी।

पास से गुजरते हुए ही यान ने इसकी तस्वीर खींची है।

प्रारंभिक विश्लेषण के मुताबिक इस पत्थर की उम्र करीब साढ़े चार खरब वर्ष है।

अंतरिक्ष यान से पहली बार नजर आया था यह पत्थर जो़ड़ा

इसलिए इस पत्थर के बारे में पता चलने पर इस सौरमंडल की सृष्टि के बारे में भी कुछ नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पहली बार अंतरिक्ष यान को जब यह नजर आया था तो यह दूर से लाल रंह के दो धब्बों के तौर पर दिखा था।

इसका आकार कुछ अजीब सा होने की वजह से इस पर रूचि बढ़ी।

तब वैज्ञानिकों ने देखा कि यह दोनों पत्थर एक दूसरे से चिपकते हुए आपस में भी चक्कर काट रहे हैं।

वे सूर्य की परिधि में ही हैं। इस आपसी चक्कर की वजह से ही दूसरी बार नजर आते ही इसके चपटे आकार का पता चल गया।

वैज्ञानिक इन दोनों के आपस में जुड़ने की गुत्थी से भी सौर मंडल की सृष्टि के रहस्यों को समझना चाह रहे है।

वैज्ञानिकों की रूचि इस बात को जानने में है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह दोनों इस तरीके से जुड़े।

वैज्ञानिक यह भी समझना चाह रहे हैं कि क्या वास्तव में दोनों एक ही पत्थर हैं, जो किन्हीं कारणों से इस आकार में आ गये हैं।

या फिर दो अलग अलग पिंड आपसी आकर्षण की वजह से एक दूसरे से जुड़कर इस आकार के बन गये हैं।

इन गुत्थियों के सुलझने से हमारी सौर जगत में चल रही गतिविधियों

और बाहरी प्रभाव के बारे में भी वैज्ञानिकों को नया बहुत कुछ जानने समझने का अवसर प्राप्त होगा।

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