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ऑक्टोपस के बारे में पता चलाकि वह स्पर्श से भी स्वाद ग्रहण कर लेता हैं

  • लचीले आकार का जीव पहले से ही अजूबा है

  • बहुत तेजी से रंग बदलने में भी माहिर है यह

  • नकली आहार को भी वह छुकर समझ लेता है 

  • समुद्री प्राणी की विशेषताओं के बारे में नई जानकारी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ऑक्टोपस के नाम से ही हमें कई किस्म की अनुभूति होती ही है। यह समुद्री जीव

अपने आकार और आचरण की वजह से प्रारंभ से ही हैरत का विषय रहा है। इस पर कई

साइंस फिक्शन फिल्में भी बन चुकी है। वैज्ञानिक पहले से ही इस बात को जान गये थे कि

इस समुद्री प्राणी का दिमाग भी तेज काम करता है। अब उनके स्वाद लेने के नये हथियार

का पता चला है। हम पहले से ही जानते हैं कि यह समुद्री जीव अपने अत्यंत लचीले

आकार और संरचना की वजह से छोटे से छोटे इलाके में भी समा सकता है। लेकिन उसके

शिकार का अनोखा तरीका भी हमेशा ही वैज्ञानिकों को रोमांचित और आम लोगों को

भयभीत करने वाला रहा है। साथ ही खुद को हमले से बचाने के लिए रंग और आकार

बदलने की उनकी महारत भी कमाल की है। अब जाकर पता चला है कि उसकी लंबी लंबी

बाहों के अंदर भी एक छोटा सा ब्रेन होता है। इसी ब्रेन की मदद से वह किसी चीज को स्पर्श

कर उसका स्वाद अनुभव कर सकता है। इन बाहों में सैकड़ों छोटे छोटे छिद्र होते हैं,

जिनकी मदद से वह शिकार करता है और उसी माध्यम से वह स्पर्श की बदौलत किसी भी

वस्तु का स्वाद भी समझ जाता है।

इस पर शोध करने वाले समुद्रविज्ञान के वैज्ञानिकों ने पाया है कि इन छोटे छोटे स्पर्श

तंतुओं से प्राप्त होने वाले संकेत उसकी बाहों पर बने ब्रेन तक पहुंचते हैं। हर एक छिद्र की

स्पर्श की क्षमता एक जैसी होती है। इसलिए किसी भी चीज अथवा प्राणी से इनका संपर्क

होने पर उस दिमाग तक इसका संकेत चला जाता है।

ऑक्टोपस के पास तंतुओं में भी स्वतंत्र दिमाग होता है

अजीब बात यह है कि यह स्वतंत्र दिमाग भी उसके मूल दिमाग से तंतुओं की बदौलत जुड़े

होते हैं। इस वजह से वह अपने हर छिद्रनुमा कोष की मदद से स्पर्श में आने वाले हर चीज

का स्वाद महसूस कर सकता है। हावर्ड विश्वविद्यालय के शोध कर्ताओं में मॉलिक्यूलर

बॉयोलॉजिस्ट लीना वैन गिसेन और उनके सहयोगियों ने इस बात का पता लगाया है।

शोध के आगे बढ़ाते हुए इन वैज्ञानिकों ने उन कोषों की पहचान भी कर ली है, जिनमें ऐसा

गुण होता है। इन्हें केमोटेक्टाइल सेल कहा गया है। यह सेल अपने दूसरे छोर पर एक खास

किस्म का टॉक्सिक संकेत भेजता है। स्वतंत्र दिमाग इन संकेतों का विश्लेषण कर स्वाद

का पता लगा सकता है। कुल मिलाकर आम भाषा में किसी ऑक्टोपस के पास हजारों की

संख्या में ऐसे जीभ होते हैं, जो इंसान के पास एक ही होता है लेकिन इंसान के इस एक

जीभ में भी स्वाद महसूस करने की अलग अलग ग्रंथियां होती हैं, जो दिमाग तक संकेत

भेजती है। दूसरी तरफ किसी हमले की आशंका होने पर इन्हीं छिद्रों से वह टॉक्सिक तरल

पदार्थ छोड़कर पास आने वाले को परेशान कर देती है। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक

निकोलस बेलिनो ने इस बारे में कहा कि शायद इसी खास गुण की वजह से समुद्र के तल

पर चलते वक्त अपने स्पर्श से ही वह बालू के नीचे छिपे अपने शिकार का पता लगा लेता

है। शिकार का पता लगने के बाद वह इन्हीं तंतुओं के जाल से उसे जकड़ लेता है।

स्पर्श से स्वाद की तकनीक की वजह से छिपे शिकार को पकड़ लेता है

स्पर्श से स्वाद के इसी गुण की वजह से वह समझ जाता है कि जो संकेत उसके दिमाग

तक पहुंचा है वह उसके भोजन के लायक है अथवा नहीं। यदि वह भोजन के लायक नहीं हो

तो वह आगे बढ़ जाता है। इस परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों ने मछली अथवा ऑक्टोपस के

भोजन के आकार की वस्तुओं को भी रखा था। लेकिन स्पर्श करते ही वह समझ गया कि

यह सिर्फ आकार में भोजन जैसे हैं जबकि वे भोजन नहीं थे। इसलिए वह उन्हें छोड़कर

आगे बढ़ गया। इन कोषों का पता चलने के बाद शोधकर्ताओं ने इन सेलों की नकल भी की

है। प्रयोगशाला में तैयार यह कृत्रिम सेल इंसानी शरीर की संरचना और मेढ़क के अंडों में

भी डाले गये थे। परीक्षण के लिए उन्हें अलग रखा गया था। बाद में जब उन्हें किसी

ऑक्टोपस के शिकार के संपर्क में लाया गया तो वह स्वतः सक्रिय हो गये। उससे भी

ऑक्टोपस के इस खास गुण की पुष्टि हो गयी है।


 

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