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स्कैनर के बिना पड़ोसी राज्यों से आने वाली शराब को रोकना संभव नहीं




  • शराबबंदी के फैसले के वक्त ही अधिकारियों ने दिया था सुझाव

  • अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं शराब तस्कर

  • पहली बैठक के बाद ही वरीय अफसरों से रिपोर्ट दी थी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः स्कैनर नहीं होने की वजह से किस गाड़ी मे छिपाकर शराब ले जायी जा रही है,

उसका पता लगाना बहुत मुश्किल है। दरअसल बिहार में शराबबंदी का नियम लागू होने के

बाद भी शराब के तस्कर अलग अलग तरीके से इसे पड़ोसी राज्यो से ले आते हैं।

वीडियो में जान लीजिए पूरा माजरा

भागलपुर में भी झारखंड से लायी गयी शराब की एक खेप पकड़ी गयी है। इस बार नीतीश

कुमार की सरकार को महिलाओं के वोट के पीछे भी शराबबंदी को महत्वपूर्ण माना जा रहा

है। लेकिन दूसरी तरफ यह बात रह रहकर सामने आ रही है कि बिहार में चोरी छिपे शराब

बिक रही है। कई अवसरों पर तो शराब की घरपहुंच सेवा और व्हाट्सएप समूह के माध्यम

से उसकी आपूर्ति की सूचनाएं भी आम हो चुकी हैं।

इस शराबबंदी के बारे में एक सेवानिवृत्त वरीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि दरअसल

किस गाड़ी के अंदर शराब छिपायी गयी है, उसे हर बार खोज लेना संभव नहीं होता। दूसरी

तरफ अगर वाहन की गहन तलाशी होने लगे तो दिन भर में किसी रास्ते पर एक दर्जन

वाहन भी आगे नहीं बढ़ पायेंगे। लिहाजा यह काम स्कैनर आसानी से कर पाता है। इस

स्कैनर के नीचे से गुजरने वाले हर वाहन पर शराब है अथवा नहीं वह साफ साफ दिख

जाती है। ऐसे उपकरण हर राज्य की प्रवेश चौकी पर लगाया जा सकता है।

स्कैनर की मदद से छिपायी गयी शराब साफ दिखती है

पड़ोसी राज्यो से आने वाली शराब की खेप को पकड़ने के लिए पहली ही बैठक में इस

उपकरण का इंतजाम करने की बात कही गयी थी। सूचना के मुताबिक शराबबंदी का

फैसला लागू किये जाने के वक्त भी कई अफसरों ने स्कैनर की आवश्यकता पर रिपोर्ट भी

सौंपी थी। लेकिन नीतीश सरकार के पिछले पांच साल के कार्यकाल में इस स्कैनर की

खरीद का कोई फैसला तक नहीं हो पाया है। बिहार की सीमा नेपाल के अलावा पश्चिम

बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश से लगती है। रिपोर्ट बताते हैं कि इन सभी पड़ोसी राज्यों

और देश से शराब की तस्करी विभिन्न मार्गों से होती है। इस तस्करी को गहन जांच के

जरिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि अलग अलग सामानों के बीच छिपाकर शराब की

तस्करी होती है। दूसरी तरफ विशेषज्ञ बताते हैं कि स्कैनर के माध्यम से किसी भी वाहन

में छिपायी गयी शराब का बिना भौतिक जांच के भी पता लगाया जा सकता है। इसलिए

इस बार की नीतीश सरकार अगर पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रोकना चाहती है तो

उसे इस स्कैनर जैसे उपकरण का इंतजाम करना होगा ताकि तेज गति से वाहनों की जांच

हो और शराब की तस्करी वाकई रोकी जा सके।



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