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शनि ग्रह में भी होता रहता है मौसम में बदलाव

  • इस सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है

  • बाहरी वायुमंडल में रंग बिरंगे बादल दिखते हैं

  • पचास से अधिक चांद भी हैं इस अकेले शनि ग्रह के

  • नासा के हब्बल टेलीस्कोप ने पर्यवेक्षण के बाद नतीजा निकाला

राष्ट्रीय खबर

रांचीः शनि ग्रह का हमारे हिंदू धार्मिक ज्योतिष में अलग महत्व है। लेकिन विज्ञान की

नजरों में भी इसका महत्व कतई कम नहीं है। इसी वजह से अंतरिक्ष के अन्य स्थानों पर

नजर रखने के साथ साथ इसकी गतिविधियों पर भी खगोल वैज्ञानिकों की नजर बनी

रहती है। दो वर्षों से अधिक समय तक वहां नजर रखे जाने का ही वैज्ञानिक निष्कर्ष यह

निकला है कि वहां भी मौसम बदलता रहता है। वैसे भी इसके बाहरी वायुमंडल में भीषण

उथल पुथल होते रहने की जानकारी तो पहले ही मिल चुकी थी। दरअसल नासा के हब्बल

टेलीस्कोप ने लगातार इस ग्रह पर नजर रखने के बाद जो चित्र उपलब्ध कराये हैं, उनके

विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि वहां भी मौसम का बदलाव होता रहता है। शनि ग्रह के

उत्तरी गोलार्ध में इस किस्म के बदलाव का वहां गरमी पड़ने का नतीजा बताया गया है।

वीडियो में देख लीजिए इस मामले को

यह देखा गया है कि खगोल दूरबीन से यह शनि ग्रह एक जैसा हमेशा नजर नहीं आता।

वहां के रंगों में परिवर्तन होने के आधार पर ही मौसम में भी परिवर्तन होने की जानकारी

वैज्ञानिकों को मिली है। ग्रीनबैल्ट में स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के

वैज्ञानिक एमी साइमन ने यह जानकारी दी है। उनके मुताबिक हब्बल टेलीस्कोप ने वहां

के जो रंगीन चित्र भेजे हैं, उनमें शनि ग्रह के बाहरी हिस्से में जो रंगीन धारियां हैं, वे वाकई

देखने में अति सुंदर हैं। यह पाया गया है कि उत्तरी गोलार्ध की तरफ बढ़ने के दौरान वहां

मौसम बदलने लगता है। अन्य वैज्ञानिक आंकड़ों से इस बदलाव को दर्ज किया जाता है

जबकि वहां के रंग बदलने से भी खगोल वैज्ञानिक मौसम के इस बदलाव को समझ पा रहे

हैं। इससे सौर जगत की जानकारी भी बढ़ती जा रही है।

शनि ग्रह विशाल और रहस्यमय ग्रह भी माना जाता है

वैसे हिंदू धर्म में भी शनि ग्रह की दशा बदलने से इंसानों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की

विस्तार से व्याख्या की गयी है। दिशा बदलने के क्रम में इस धार्मिक ज्योतिष में उसके

अलग अलग राशि में प्रवेश करने का उल्लेख होता है। दूसरी तरफ अब वैज्ञानिक यह देख

पा रहे हैं कि शनि ग्रह में मौसम का बदलाव वहां के वायुमंडल के रंग को भी बदलने लगता

है। लेकिन यहां पर अब वैज्ञानिक कसौटी पर शनि ग्रह में होने वाले मौसम के बदलाव की

ही चर्चा कर रहे हैं। रंग बदलने की इस चक्र को समझ लेने के बाद यह अनुमान लगाया जा

रहा है कि वहां के वायुमंडल में जो बादल मौजूद हैं, उनके घूमने की गति का भी रंगों पर

प्रभाव पड़ता है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों से इससे संबंधित और आंकड़ा एकत्रित होने

की स्थिति में शनि ग्रह के मौसम के बदलाव के बारे में और जानकारी मिल पायेगी। सूर्य

से 886 मिलियन मील की दूरी पर स्थित यह ग्रह सूर्य का पूरा चक्कर काटने में 29 वर्षों का

समय लेता है। ऐसे में अनुमान है कि वहां भी मौसम का बदलाव प्रति सात वर्षों में एक बार

होता होगा। यह भी गौर करने लायक बात है कि पृथ्वी सूर्य की तरफ थोड़ी झूकी हुई है

इसलिए उसे हर गोलार्ध में सूर्य की रोशनी मिलती है। लेकिन शनि ग्रह का अवस्थान

पृथ्वी से भिन्न है और वहां सूर्य की रोशनी भी दूसरे तरीके से पड़ती है। ऐसे में सूर्य किरणों

का प्रभाव वहां दूसरे तरीके से पड़ता होगा।

उसके दो चंद्रमाओं के बारे में अधिक जिज्ञासा है

इस क्रम में यह समझ लेना भी जरूरी है कि वह हमारे इस सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा

ग्रह है। वह आकार में पृथ्वी से नौ गुणा अधिक है। उसके बाद पचास से अधिक चंद्रमा है।

इन्हीं चंद्रमाओं की वजह से उसके चारो तरफ रंग बिरंगी एक रिंग जैसा बना रहता है।

इन चंद्रमाओं में से दो टाइटन और एनसेलाडूस में बर्फ और जीवन होने तक की संभावना

व्यक्त की गयी है। साथ ही वहां ज्वालामुखी विस्फोट के निशान होने पर भी अलग से

अनुसंधान चल रहा है। लेकिन रासायनिक संरचना के लिहाज से बात करें तो शनि ग्रह

और उसके चंद्रमाओँ का वायुमंडल भी पृथ्वी से बिल्कुल अलग है। नासा का ड्रैगन फ्लाई

मिशन भी टाइटन के ऊपर से गुजर चुका है। इसी वजह से नासा के हब्बल टेलीस्कोप के

जरिए वहां की गतिविधियों को और बेहतर तरीके से समझने की उम्मीद से आगे जेम्स

वेब टेलीस्कोप के स्थापित होने से शोध की गाड़ी आगे बढ़ने की उम्मीद है

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